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सिमरन, सेवा, संस्कृति की नजर आई झलक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2017 11:58 PM IST
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नजीबाबाद में आयोजित नगर कीर्तन में गुरु का गुणगान करते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के नजीबाबाद में सरबंसदानी साहिबे कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब के 350वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में सिख समाज की ओर से भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। सिख समाज के आधार सेवा, सिमरन, साहस, संस्कृति, इतिहास और आदर्शों को दर्शाते नगर कीर्तन का नगर में विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
गुरुद्वारा नानकशाही श्री गुरु सिंह सभा से मंगलवार दोपहर पंज प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन शुरू हुआ। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी उपकार सिंह ने श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित किया। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान नरेंद्र सिंह विक्की, सचिव हरेंद्र सिंह, हरभजन सिंह, सुरेंद्रपाल सिंह, जसवीर सिंह की देखरेख में आयोजित नगर कीर्तन में गुरुनानक मिशन इंटर कॉलेज के बच्चों ने जयघोष किया।
निहंग सिंह द्वारा नगाड़े की गूंज, बैंड पर भक्तिरस की फुहार और सिख संगत द्वारा मूलमंत्र, गुरुमंत्र उच्चारण व गुरुवाणी गायन से नगर कीर्तन की शोभा देखते ही बनी। गुरु गोबिंद सिंह साहिब की जय-जयकार करता हुआ नगर कीर्तन जहां कहीं से भी गुजरा भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को नमन कर प्रसाद ग्रहण किया। नगर के विभिन्न मार्गों से होकर नगर कीर्तन शाम गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर संपन्न हुआ।
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नगर कीर्तन में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सुभाष नगर द्वारा आयोजित नगर कीर्तन भी शामिल हुआ। इसके अलावा बड़िया, बीरूवाला, बिजौरी, जट्टीवाला, ताहरपुर, लालवाला, गुलालवाली, समीपुर, हीमपुर आदि क्षेत्रों से भक्तों ने नगरकीर्तन में शामिल होकर धर्मलाभ उठाया।
सेवा ः दशमेश सेवा सोसायटी के बैनरतले भक्तों ने रास्ते की सफाई कर गुरुओं द्वारा सिखों को दिए सेवाभाव के उपदेश को साकार किया। गुरुओं के प्रति सेवाभाव को सिख सेवादारों ने प्रदर्शित किया, तो राह चलते भक्तों ने झाड़ू लेकर मार्ग की सफाई शुरू कर दी।
सिमरन ःस्त्री सत्संग मंडल के नेतृत्व में बीबियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अमृतमयी बाणी का गायन किया, तो हर किसी का मन गुरु चरणों से जुड़ गया और मन कह उठा- चरण चलो, चरण चलो, चलो मारग गोबिंद...।
साहस ः साहिबजादा अजीत सिंह गतका दल सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए गतका दलों के नौजवानों ने शस्त्रों के हैरतअंगेज प्रदर्शन से सिखों के जज्बे को दर्शाया। साथ ही गुर हरगोबिंद साहिब द्वारा शुरू की गई संत-सिपाही की परंपरा को प्रदर्शित कर भावविभोर किया।
संस्कृति ःविश्व की सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्कृति में पंजाब के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कीर्तन में पंजाब की संस्कृति भी नजर आई। बच्चों ने सिख इतिहास के गीतांे पर नृत्य पेश किया।
गुरुद्वारा नानकशाही श्री गुरु सिंह सभा से मंगलवार दोपहर पंज प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन शुरू हुआ। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी उपकार सिंह ने श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित किया। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान नरेंद्र सिंह विक्की, सचिव हरेंद्र सिंह, हरभजन सिंह, सुरेंद्रपाल सिंह, जसवीर सिंह की देखरेख में आयोजित नगर कीर्तन में गुरुनानक मिशन इंटर कॉलेज के बच्चों ने जयघोष किया।
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निहंग सिंह द्वारा नगाड़े की गूंज, बैंड पर भक्तिरस की फुहार और सिख संगत द्वारा मूलमंत्र, गुरुमंत्र उच्चारण व गुरुवाणी गायन से नगर कीर्तन की शोभा देखते ही बनी। गुरु गोबिंद सिंह साहिब की जय-जयकार करता हुआ नगर कीर्तन जहां कहीं से भी गुजरा भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को नमन कर प्रसाद ग्रहण किया। नगर के विभिन्न मार्गों से होकर नगर कीर्तन शाम गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर संपन्न हुआ।
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नगर कीर्तन में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा सुभाष नगर द्वारा आयोजित नगर कीर्तन भी शामिल हुआ। इसके अलावा बड़िया, बीरूवाला, बिजौरी, जट्टीवाला, ताहरपुर, लालवाला, गुलालवाली, समीपुर, हीमपुर आदि क्षेत्रों से भक्तों ने नगरकीर्तन में शामिल होकर धर्मलाभ उठाया।
सेवा ः दशमेश सेवा सोसायटी के बैनरतले भक्तों ने रास्ते की सफाई कर गुरुओं द्वारा सिखों को दिए सेवाभाव के उपदेश को साकार किया। गुरुओं के प्रति सेवाभाव को सिख सेवादारों ने प्रदर्शित किया, तो राह चलते भक्तों ने झाड़ू लेकर मार्ग की सफाई शुरू कर दी।
सिमरन ःस्त्री सत्संग मंडल के नेतृत्व में बीबियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अमृतमयी बाणी का गायन किया, तो हर किसी का मन गुरु चरणों से जुड़ गया और मन कह उठा- चरण चलो, चरण चलो, चलो मारग गोबिंद...।
साहस ः साहिबजादा अजीत सिंह गतका दल सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए गतका दलों के नौजवानों ने शस्त्रों के हैरतअंगेज प्रदर्शन से सिखों के जज्बे को दर्शाया। साथ ही गुर हरगोबिंद साहिब द्वारा शुरू की गई संत-सिपाही की परंपरा को प्रदर्शित कर भावविभोर किया।
संस्कृति ःविश्व की सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्कृति में पंजाब के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कीर्तन में पंजाब की संस्कृति भी नजर आई। बच्चों ने सिख इतिहास के गीतांे पर नृत्य पेश किया।