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सार्थक सिंघलपढ़ाई को पसंदीदा खेल मानता है सार्थक सिंघल
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पढ़ाई को पसंदीदा खेल मानता है सार्थक सिंघल
बिजनौर। सीबीएसई में 12वीं में शानदार अंक पाने वाले सार्थक सिंघल ने पिता की मदद करते करते 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। एनडीए क्वालीफाई कर चुका सार्थक सिंघल पढ़ाई को बोझ की तरह नहीं बल्कि एक पसंदीदा खेल की तरह मानता है। उसका मानना है कि कम अगर अच्छे से समझकर पढ़ा जाए तो कम समय पढ़कर भी शानदार अंक लाए जा सकते हैं।
डीडीपीएस बिजनौर के पीसीएम के छात्र सार्थक सिंघल के पिता अनुराग सिंघल गृहणी व माता प्रियंका सिंघल गृहणी है। सार्थक एनडीए क्वालीफाई की चुका है और आईआईटी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर चुका है। वह आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता है। सार्थक का कहना है कि वह स्कूल के अलग केवल तीन से चार घंटे ही पढ़ता था लेकिन जो भी पढ़ता था उसे एक बार में समझ लेता था। रात को दस से 11 बजे तक सो जाता था। वह हर रोज दो से तीन घंटे पिता की दुकान पर हाथ भी बंटाता था। सार्थक का कहना है कि कुछ बच्चे पढ़ाई को बोझ मानने लगते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। पढ़ाई पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वह बताता है कि फिजिक्स के पेपर में उसने जल्दी में एक सवार का गलत उत्तर लिख दिया। उसे सही जवाब पता था लेकिन धोखे से गलत उत्तर लिख दिया। उसका एक अंक कट गया और फिजिक्स में 99 अंक मिले।
विषय अंक
गणित 100
भौतिक विज्ञान 99
रसायन विज्ञान 99
फाइन आर्ट 100
इंग्लिश 95
कंप्यूटर साइंस 98
नोट : प्रतिशत निकालने के लिए पांच विषयों के अंक जोड़े जाते हैं। इसमें इंग्लिश के अंक होना अनिवार्य होता है।
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बिजनौर। सीबीएसई में 12वीं में शानदार अंक पाने वाले सार्थक सिंघल ने पिता की मदद करते करते 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। एनडीए क्वालीफाई कर चुका सार्थक सिंघल पढ़ाई को बोझ की तरह नहीं बल्कि एक पसंदीदा खेल की तरह मानता है। उसका मानना है कि कम अगर अच्छे से समझकर पढ़ा जाए तो कम समय पढ़कर भी शानदार अंक लाए जा सकते हैं।
डीडीपीएस बिजनौर के पीसीएम के छात्र सार्थक सिंघल के पिता अनुराग सिंघल गृहणी व माता प्रियंका सिंघल गृहणी है। सार्थक एनडीए क्वालीफाई की चुका है और आईआईटी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर चुका है। वह आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता है। सार्थक का कहना है कि वह स्कूल के अलग केवल तीन से चार घंटे ही पढ़ता था लेकिन जो भी पढ़ता था उसे एक बार में समझ लेता था। रात को दस से 11 बजे तक सो जाता था। वह हर रोज दो से तीन घंटे पिता की दुकान पर हाथ भी बंटाता था। सार्थक का कहना है कि कुछ बच्चे पढ़ाई को बोझ मानने लगते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। पढ़ाई पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वह बताता है कि फिजिक्स के पेपर में उसने जल्दी में एक सवार का गलत उत्तर लिख दिया। उसे सही जवाब पता था लेकिन धोखे से गलत उत्तर लिख दिया। उसका एक अंक कट गया और फिजिक्स में 99 अंक मिले।
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विषय अंक
गणित 100
भौतिक विज्ञान 99
रसायन विज्ञान 99
फाइन आर्ट 100
इंग्लिश 95
कंप्यूटर साइंस 98
नोट : प्रतिशत निकालने के लिए पांच विषयों के अंक जोड़े जाते हैं। इसमें इंग्लिश के अंक होना अनिवार्य होता है।