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Bijnor News: सनातन सत्संग ज्ञान यज्ञ का समापन हुआ
Sun, 19 Oct 2025 01:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 19 Oct 2025 01:18 AM IST
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हल्दौर के बिलाई चीनी मिल में स्थित देवालय मंदिर परिसर में सनातन सत्संग ज्ञान यज्ञ में प्रवचन कर
हल्दौर। बिलाई चीनी मिल में स्थित देवालय मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सनातन सत्संग ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन शनिवार को समापन हुआ।
आचार्य सुशील बलूनी जी ने समस्त मिल समूह का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने ऐसे आध्यात्मिक आयोजन का संचालन कर पुण्य का कार्य किया। आचार्य ने नवग्रहों, नौ अंकों और उनके जीवन पर प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ग्रह और अंक हमारे जीवन में संतुलन ला सकते हैं तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का चयन और जीवन की दिशा निर्धारित करने में सहायक हो सकते हैं।
विशेष व्याख्यान में उन्होंने बताया कि वास्तव में अंक केवल नौ नहीं, बल्कि ग्यारह हैं। एक से 9 मूल अंक हैं, इनके अतिरिक्त शून्य और अनंत भी अंक जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। शून्य आरंभ का और अनंत अंतिम ध्येय का प्रतीक है।
आचार्य ने कहा कि सांख्य और ज्योतिष का आध्यात्मिक निष्कर्ष यही है कि हमें स्वयं को शून्य से विभाजित कर अनंत बनना है। यही जीवन का परम लक्ष्य है, ज्ञान प्राप्ति, आत्मा का उत्थान और जीवन को संस्कारित दिशा में आगे बढ़ाना।
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समापन उद्बोधन में आचार्य जी ने पुनः यह संदेश दिया कि ज्ञान ही सभी सफलताओं का आधार है। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले बच्चों स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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आचार्य सुशील बलूनी जी ने समस्त मिल समूह का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने ऐसे आध्यात्मिक आयोजन का संचालन कर पुण्य का कार्य किया। आचार्य ने नवग्रहों, नौ अंकों और उनके जीवन पर प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ग्रह और अंक हमारे जीवन में संतुलन ला सकते हैं तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का चयन और जीवन की दिशा निर्धारित करने में सहायक हो सकते हैं।
विशेष व्याख्यान में उन्होंने बताया कि वास्तव में अंक केवल नौ नहीं, बल्कि ग्यारह हैं। एक से 9 मूल अंक हैं, इनके अतिरिक्त शून्य और अनंत भी अंक जगत में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। शून्य आरंभ का और अनंत अंतिम ध्येय का प्रतीक है।
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आचार्य ने कहा कि सांख्य और ज्योतिष का आध्यात्मिक निष्कर्ष यही है कि हमें स्वयं को शून्य से विभाजित कर अनंत बनना है। यही जीवन का परम लक्ष्य है, ज्ञान प्राप्ति, आत्मा का उत्थान और जीवन को संस्कारित दिशा में आगे बढ़ाना।
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समापन उद्बोधन में आचार्य जी ने पुनः यह संदेश दिया कि ज्ञान ही सभी सफलताओं का आधार है। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले बच्चों स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।