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राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ को देसी भाया गोबर की राखी का प्रोजेक्ट
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नगीना में देसी गाय के गोबर से बनाई गई राखी।
- फोटो : BIJNOR
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आरएसएस को भाया गोबर की राखी का प्रोजेक्ट
बिजनौर। जिले में बनने वाली गोबर की राखियों की राष्ट्रीय स्वंये सेवक संघ में बहुत मांग हो रही है। कोरोना के चलते राखी का उत्पादन बंद होने के बाद भी मेरठ प्रांत के पदाधिकारियों ने श्रीकृष्णायन गौशाला से राखी बनवाई हैं। इन राखी को बड़े पदाधिकारियों को बांधा जाएगा। अगले साल बड़े पैमाने पर राखी बनाई जाएंगी।
नगीना में श्रीकृष्णायन गौशाला बनी है। यहां पर देसी प्रजाति की लाल सिंधी गायों का संवर्धन किया जा रहा हैै। गोशाला में गायों के रखरखाव व चारे में काफी पैसा खर्च होता है। गौशाला की संचालक अलका लाहोटी इस खर्च को गोशाला से ही पूरा करने की कोशिश कर रही है। पिछले साल गौशाला में देशी गाय के गोबर से राखी बनाई गई थी। एक राखी की कीमत 50 रुपये रखी गई थी। पिछले साल गोबर की राखी बनाने का काम किया गया था। रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले ही राखी बनाई गई थी। इस बार राखी बनाने पर कोरोना की मार पड़ गई। कोरोना के डर से गौशाला में बाहरी लोगों का प्रवेश बिल्कुल बंद है। राखी बनाने का काम नहीं किया जा रहा था। लेकिन मेरठ प्रांत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों को देसी गाय के गोबर की राखी को बहुत पसंद किया है। उन्होंने गौशाला में करीब 500 राखी बनवाई हैें। ये राखी पदाधिकारियों को बांधी जाएंगी। इसे देखते हुए गौशाला से जुड़े लोग भी गदगद हैं। वे अगले साल बड़े स्तर पर राखी बनवाने की योजना है।
गौशाला में की जा रही औषधीय की खेती
गौशाला में थोड़ी औषधीय खेती शुरू की गई है, तो गाय के गोबर व मूत्र से अनेक तरह के उत्पाद बनाकर बेचे जा रहे हैं। औषधि को गोशाला में काम करने वालों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के दिया जा रहा है। गौशाला में काम करने वालों को बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।
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गोबर की राखी ने रिझाया
गौशाला संचालक अलका लाहोटी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों को गोबर की राखी का प्रोजेक्ट पसंद आया है। वे इसे आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने ऑर्डर करके अपने लिए देसी गाय के गोबर की राखी बनवाई भी हैं।
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बिजनौर। जिले में बनने वाली गोबर की राखियों की राष्ट्रीय स्वंये सेवक संघ में बहुत मांग हो रही है। कोरोना के चलते राखी का उत्पादन बंद होने के बाद भी मेरठ प्रांत के पदाधिकारियों ने श्रीकृष्णायन गौशाला से राखी बनवाई हैं। इन राखी को बड़े पदाधिकारियों को बांधा जाएगा। अगले साल बड़े पैमाने पर राखी बनाई जाएंगी।
नगीना में श्रीकृष्णायन गौशाला बनी है। यहां पर देसी प्रजाति की लाल सिंधी गायों का संवर्धन किया जा रहा हैै। गोशाला में गायों के रखरखाव व चारे में काफी पैसा खर्च होता है। गौशाला की संचालक अलका लाहोटी इस खर्च को गोशाला से ही पूरा करने की कोशिश कर रही है। पिछले साल गौशाला में देशी गाय के गोबर से राखी बनाई गई थी। एक राखी की कीमत 50 रुपये रखी गई थी। पिछले साल गोबर की राखी बनाने का काम किया गया था। रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले ही राखी बनाई गई थी। इस बार राखी बनाने पर कोरोना की मार पड़ गई। कोरोना के डर से गौशाला में बाहरी लोगों का प्रवेश बिल्कुल बंद है। राखी बनाने का काम नहीं किया जा रहा था। लेकिन मेरठ प्रांत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों को देसी गाय के गोबर की राखी को बहुत पसंद किया है। उन्होंने गौशाला में करीब 500 राखी बनवाई हैें। ये राखी पदाधिकारियों को बांधी जाएंगी। इसे देखते हुए गौशाला से जुड़े लोग भी गदगद हैं। वे अगले साल बड़े स्तर पर राखी बनवाने की योजना है।
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गौशाला में की जा रही औषधीय की खेती
गौशाला में थोड़ी औषधीय खेती शुरू की गई है, तो गाय के गोबर व मूत्र से अनेक तरह के उत्पाद बनाकर बेचे जा रहे हैं। औषधि को गोशाला में काम करने वालों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के दिया जा रहा है। गौशाला में काम करने वालों को बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।
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गोबर की राखी ने रिझाया
गौशाला संचालक अलका लाहोटी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों को गोबर की राखी का प्रोजेक्ट पसंद आया है। वे इसे आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उन्होंने ऑर्डर करके अपने लिए देसी गाय के गोबर की राखी बनवाई भी हैं।