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स्विट्जरलैंड में हुआ डॉ. शंकर लाल शर्मा का सम्मान
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डा.शंकर लाल शर्मा।
- फोटो : DHAMPUR
धामपुर(बिजनौर)। संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को मान्य भाषा का दर्जा दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मिशन की ओर से भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कई यूरोपीय देशों का भ्रमण किया। इस प्रतिनिधिमंडल में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल धामपुर आरएसएम डिग्री कालेज के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. शंकरलाल शर्मा को स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास में सम्मानित किया गया।
शनिवार को धामपुर पहुंचे डा. शंकर लाल शर्मा ने बताया कि विश्व की तीन हजार भाषाओं में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिंदी अभी तक संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्य नहीं है। जबकि हिंदी से काफी नीचे मंदारिन (चीनी) भाषा को मान्यता है। फ्रेंच, अरबी, इटेलियन, जर्मन और अंग्रेजी को वहां मान्यता है। मिशन चाहता है कि हिंदी भी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बने। इसके लिए भारत की ओर से विधिवत प्रस्ताव, प्रवेश शुल्क आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने फ्रांस, इटली, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, रोम, वेटिकिन सिटी आदि का भ्रमण किया। यह भ्रमण 11 दिवसीय था। इस दौरान उन्होंने सभी देशों में हिंदी का जमकर प्रचार प्रसार किया और लोगों से हिंदी में बात की। उपलब्धि यह भी रही कि फ्रांस के एफिल टावर पर देवनागरी में ‘एफिल टावर आपका स्वागत करता है’ लिखा मिला। इसे देखकर सदस्यों से हर्ष जताया और वहां के लोगों की तारीफ की। उनसे अपेक्षा की कि वे हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थान दिलाने को सहयोग करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में कुल 26 सदस्य शामिल रहे। इनमें से धामपुर के डा. कंचन शर्मा व एसबीडी कॉलेज की प्राचार्य डा. पूनम चौहान भी शामिल रहीं। डा. पूनम चौहान को दुष्यंत कुमार सम्मान और डा. शंकर लाल शर्मा को जयशंकर प्रसाद सम्मान से स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास में सम्मानित किया गया।
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शनिवार को धामपुर पहुंचे डा. शंकर लाल शर्मा ने बताया कि विश्व की तीन हजार भाषाओं में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिंदी अभी तक संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्य नहीं है। जबकि हिंदी से काफी नीचे मंदारिन (चीनी) भाषा को मान्यता है। फ्रेंच, अरबी, इटेलियन, जर्मन और अंग्रेजी को वहां मान्यता है। मिशन चाहता है कि हिंदी भी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बने। इसके लिए भारत की ओर से विधिवत प्रस्ताव, प्रवेश शुल्क आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने फ्रांस, इटली, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, रोम, वेटिकिन सिटी आदि का भ्रमण किया। यह भ्रमण 11 दिवसीय था। इस दौरान उन्होंने सभी देशों में हिंदी का जमकर प्रचार प्रसार किया और लोगों से हिंदी में बात की। उपलब्धि यह भी रही कि फ्रांस के एफिल टावर पर देवनागरी में ‘एफिल टावर आपका स्वागत करता है’ लिखा मिला। इसे देखकर सदस्यों से हर्ष जताया और वहां के लोगों की तारीफ की। उनसे अपेक्षा की कि वे हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थान दिलाने को सहयोग करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में कुल 26 सदस्य शामिल रहे। इनमें से धामपुर के डा. कंचन शर्मा व एसबीडी कॉलेज की प्राचार्य डा. पूनम चौहान भी शामिल रहीं। डा. पूनम चौहान को दुष्यंत कुमार सम्मान और डा. शंकर लाल शर्मा को जयशंकर प्रसाद सम्मान से स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास में सम्मानित किया गया।
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