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Bijnor News: धामपुर-रामगंगा बांध की भूकंप वेधशाला जल्द होगी हाईटेक, जीर्णोद्धार की तैयारी

Mon, 01 May 2023 11:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 01 May 2023 11:58 AM IST
सार

रामगंगा बांध परियोजना की भूकंप वेधशाला को हाईटेक बनाने लिए एक करोड़ की लागत से  जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर विश्व बैंक को भेजा गया है। यह भविष्य में भूकंप सुरक्षा की दृष्टि से लाभकारी साबित होगी।

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Ramganga dam's earthquake observatory will soon be hi-tech
कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की भूकंपवेधशाला

विस्तार

कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की भूकंप वेधशाला को हाईटेक बनाने का प्रस्ताव विश्व बैंक को भेजा गया है। एक करोड़ की लागत से भूकंप वेधशला का जीर्णोद्धार किए जाने की योजना है।

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रामगंगा बांध परियोजना उत्तर प्रदेश की एक बड़ी परियोजना है। परियोजना पर रामगंगा एवं सैडिल बांध बने हैं। बिजली उत्पादन के लिए रामगंगा जलविद्युत गृह बना हुआ है। परियोजना के तकनीकी विकास के लिए निर्माण के दौरान सिंचाई विभाग ने निरीक्षण एवं नियंत्रण मंडल की स्थापना की थी।
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बांध परियोजना के पूरा होने के बाद इसका नाम रामगंगा बांध मंडल कर दिया गया। इसके साथ ही बांध की तकनीकी प्रयोगशाला भी बंद हो गई। इसके साथ ही भूकंप वेधशाला भी जीर्ण शीर्ण हो गई। अब केवल यहां उसका भवन ही शेष है। वर्तमान में बांध परियोजना पर बनी इस वेधशाला के जीर्णोद्धार की तैयारी है।

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घने जंगलों के बीच बनी वेधशाला की सफाई आदि कार्य कराए जा चुके हैं। इसके हाईटेक किए जाने की तैयारी चल रही है। बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार त्यागी ने बताया कि बांध सुरक्षा अधिनियम के तहत ड्रिप परियोजना में इसका उद्धार किया जाएगा।

इस पर लगभग एक करोड़ की लागत आएगी। प्रस्ताव विभाग के उच्च अधिकारियों से होकर विश्व बैंक को भेजा जा चुका है। यहां हाईटेक उपकरण लगाए जाएंगे। भूकंप की सारी जानकारी कालागढ़ के परियोजना मुख्यालय को कंम्प्यूटर से ही मिल जाएगी।

क्या है उपयोगिता
कालागढ़ में शिवालिक पर्वतमालाओं के बीच बने रामगंगा बांध, सैडिल बांध एवं रामगंगा जलविद्युत गृह की भूकंप से सुरक्षा के लिए कंपन का नियमित अध्ययन आवश्यक है। 1998 से केवल मौसम विभाग के सेस्मोलॉजी विभाग से मिली जानकारी पर ही विभाग निर्भर है।

नियमित भूकंपन की जानकारी नहीं मिल पाने से भूकंप से निपटने के प्रयास काफी नहीं हैं। दोनों बांधों के विशाल जलाशय में कंपन के दौरान उठने वाली लहरों, पर्वतों की टूट फूट आदि से परियोजना की सुरक्षा एक बड़ा प्रश्न है।

यह है वर्तमान स्थिति
भूकंप वेधशाला के घने जंगलों के बीच स्थित होने व भवन के खाली पड़े होने पर अब यहां बाघ, गुलदार व हाथियों का बसेरा हो गया है। दिन में भी यहां आने जाने पर दहशत होती है। इसलिए इसे कंम्प्यूटीकृत उपकरणों से सुसज्जित करने की तैयारी है। जिससे बांध परियोजना के कार्य भी हो सकें व कर्मचारियों की सुरक्षा भी बनी रहे।

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