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खुद की शुद्धता में गंगा को कर दिया प्रदूषित
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 26 Nov 2015 11:45 PM IST
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विदुरकुटी/बिजनौर। एक ओर जहां नमामि गंगे के तहत गंगा को उसकी शुद्धता फिर से प्रदान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में स्नान कर आत्मा शुद्ध करने आए लाखों श्रद्धालु ही गंगा घाट पर गंदगी का अंबार छोड़ गए। गंगा घाटों पर दूर-दूर तक गंदगी का अंबार लगा है। श्रद्धालु खुद को तो गंगा में स्नान कर पवित्र कर गए पर मां गंगा की गोद में समाने के लिए टनों कचरा छोड़ गए हैं।
जिले में कार्तिक पूर्णिमा पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। नांगल, बालावाली, बिजनौर बैराज, विदुरकुटी आदि घाटों पर लाखों श्रद्धालु हर गंगे गंगा का जयघोष करते हुए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। मगर स्नान के बाद श्रद्धालु गंगा के प्रति अपने कर्तव्यों को भूल गए।
गंगा में स्नान किया, खिचड़ी का प्रसाद खाया और घरों को रवाना हो गए। जिस मां गंगा में स्नान करके खुद को पवित्र करने आए थे, उसी के तट पर टनों कचरा छोड़ गए हैं। विदुर कुटी के पास गंगा के तट पर दूर दूर तक डेरे लगाने वाले श्रद्धालुओं व दुकानदारों द्वारा छोड़े गए पॉलीथिन, कूड़े करकट के ढेर लगे हैं।
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बैराज और अन्य तटों का भी यही हाल है। श्रद्धालु अगर अपने फैलाए गए कूड़े को खुद ही उठाते तो गंगा के तट पर गंदगी का नामों निशान भी नहीं होता।
सुधार की बातंे करने वाले भी नहीं दिखे
बिजनौर। समाज सुधार के अनेक मुद्दे उठाने वाले सामाजिक संगठन भी न तो गंगा घाट पर किसी को जागरूक करने गए और न ही कूड़ा करकट बीनने के लिए अभी तक कोई पहल की है।
अगर गंगा घाट पर सफाई अभियान नहीं चलाया गया तो जलस्तर बढ़ने पर ये कूड़ा गंगा की लहरों में समा जाएगा और उसको और प्रदूषित करेगा। मेले में ही श्रद्धालु मां गंगा को प्रदूषण का दंश दे गए हैं।
घाट पर शराब की बोतलों के ढेर लगे
बिजनौर। शराबियों ने गंगा घाट को भी नहीं बख्शा। यहां पर आकर भी शराब पीने से परहेज नहीं किया। मेले व पर्व की पवित्रता का भी ध्यान नहीं रखा। घाट खाली हुआ तो शराब की बोतलें हर जगह पड़ी मिलीं।
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वहीं, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में स्नान कर आत्मा शुद्ध करने आए लाखों श्रद्धालु ही गंगा घाट पर गंदगी का अंबार छोड़ गए। गंगा घाटों पर दूर-दूर तक गंदगी का अंबार लगा है। श्रद्धालु खुद को तो गंगा में स्नान कर पवित्र कर गए पर मां गंगा की गोद में समाने के लिए टनों कचरा छोड़ गए हैं।
जिले में कार्तिक पूर्णिमा पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। नांगल, बालावाली, बिजनौर बैराज, विदुरकुटी आदि घाटों पर लाखों श्रद्धालु हर गंगे गंगा का जयघोष करते हुए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। मगर स्नान के बाद श्रद्धालु गंगा के प्रति अपने कर्तव्यों को भूल गए।
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गंगा में स्नान किया, खिचड़ी का प्रसाद खाया और घरों को रवाना हो गए। जिस मां गंगा में स्नान करके खुद को पवित्र करने आए थे, उसी के तट पर टनों कचरा छोड़ गए हैं। विदुर कुटी के पास गंगा के तट पर दूर दूर तक डेरे लगाने वाले श्रद्धालुओं व दुकानदारों द्वारा छोड़े गए पॉलीथिन, कूड़े करकट के ढेर लगे हैं।
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बैराज और अन्य तटों का भी यही हाल है। श्रद्धालु अगर अपने फैलाए गए कूड़े को खुद ही उठाते तो गंगा के तट पर गंदगी का नामों निशान भी नहीं होता।
सुधार की बातंे करने वाले भी नहीं दिखे
बिजनौर। समाज सुधार के अनेक मुद्दे उठाने वाले सामाजिक संगठन भी न तो गंगा घाट पर किसी को जागरूक करने गए और न ही कूड़ा करकट बीनने के लिए अभी तक कोई पहल की है।
अगर गंगा घाट पर सफाई अभियान नहीं चलाया गया तो जलस्तर बढ़ने पर ये कूड़ा गंगा की लहरों में समा जाएगा और उसको और प्रदूषित करेगा। मेले में ही श्रद्धालु मां गंगा को प्रदूषण का दंश दे गए हैं।
घाट पर शराब की बोतलों के ढेर लगे
बिजनौर। शराबियों ने गंगा घाट को भी नहीं बख्शा। यहां पर आकर भी शराब पीने से परहेज नहीं किया। मेले व पर्व की पवित्रता का भी ध्यान नहीं रखा। घाट खाली हुआ तो शराब की बोतलें हर जगह पड़ी मिलीं।