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मरीजों का उपचार कराना बना संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 14 Nov 2016 12:22 AM IST
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धामपुर/अफजलगढ़ में केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद पांच सौ और एक हजार के नोट कई सरकारी विभाग ही स्वीकार करने में आनाकानी कर रहे हैं। नए नोट नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के दौरान तीमारदारों को काफी संकटों से जूझना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने सरकार से नोट स्वीकार किए जाने की सीमा अवधि बढ़ाए जाने की मांग की है।
नागरिक दिनेश भारद्वाज, फैसल, फईम, शादिका, निकिता आदि ने कहा कि केंद्र सरकार ने 14 नवंबर की रात तक पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, मेडिकल, अस्पताल और विद्युत विभाग, परिवहन विभाग को आदि में नोट स्वीकार किए जाने के लिए अधिकृत किया है। हालांकि अब इन संस्थाओं ने भी नोट को स्वीकार करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दिन और रात खपाने के बावजूद बैंकों में नई करेंसी हाथ नहीं लग रही है। वह नोट चलाने को लेकर परेशान हैं। प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की भी हालत इससे जुदा नहीं है। मरीजों को अस्पतालों में दवाईयां तक नहीं मिल रही हैं, जिससे मरीजों व उनके तीमारदारों के सामने समस्या खड़ी हो रही है। पैसों के अभाव में मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। दवाईयां देने तक के लिए मेडिकल स्वामी छोटे नोट मांग रहे हैं। बैंकों पर रकम बदलने के लिए भीड़ लगी है। उपभोक्ताओं को दिनभर भूखे प्यासे कतार में लगना पड़ रहा है। उधर, पीएनबी बैंक प्रबंधक रमेश सोन कुशले ने कहा कि ग्राहकों की समस्याओं के निस्तारण का बैंक कर्मियों की ओर से पूरा प्रयास किया जा रहा है। जल्द हर ग्राहक पर नई करेंसी पहुंच जाएगी। वहीं नींदडू़ में पिछले कई दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे आम आदमी के लिए दो हजार रुपये का नया नोट मकसद पूरा नहीं करने के कारण सिर दर्द बन गया है। छोटे नोट नहीं होने के कारण कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें शाम तक के लिए बंद करना ही मुनासिब समझा। बैंकों में भारी भीड़ के चलते घंटों धक्के खाने के बाद किसी तरह दो हजार रुपये मूल्य का नोट हासिल करने वाला श्रमिक छोटा ने बताया कि किसी भी दुकान परउसका फुटकर नहीं हुआ।
वहीं नजीबाबाद में स्टेट बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित विभिन्न बैंक शाखाओं में नोट बदलने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऑरियंटल बैंक सहित कई शाखाओं में धनराशि खत्म होने पर केवल नोट ही जमा किए गए। बैंकों की शाखाओं के साथ अब एटीएम बूथों पर भी भुगतान के लिए लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं हैं। स्टेट बैंक, पीएनबी सहित कई बैंकों ने अपने एटीएम चालू कर दिए हैं। उधर, स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर शाखा प्रबंधक एके बरकले ने बैंक के बाहर खड़े सभी ग्राहकों को अतिरिक्त समय में भुगतान कराया। पीएनबी की मुख्य शाखा पर प्रबंधक बलवीर कौशल ने बैंक के पास उपलब्ध धनराशि को देखते हुए नोट बदलने आए ग्राहकों को कुछ न कुछ भुगतान कराकर निराश नहीं लौटने दिया। बैंकों पर पुलिस भी तैनात रही।
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वहीं स्योहारा। बैंक में नई करेंसी न आने से बैंकों का खजाना खाली हो गया है। कैश लेने बैंक आने वाले उपभोक्ताओं को निराश लौटना पड़ रहा है। एसबीआई में रविवार को लगभग 20 लाख कैश का वितरण किया गया। केनरा बैंक के प्रबंधक नंद किशोर का कहना है कि उनके एटीएम में तीसरे दिन भी दो लाख की रकम को डाला गया और एटीएम दो घंटे चला। बैंक में उपभोक्ताओं को दो दो हजार का भुगतान किया गया। ओरिएंटल बैंक आफ कार्मस के प्रबंधक ने बताया कि बैंक में पिछले चार दिनों से कोई कैश नहीं आया है। केवल जमा करने का काम चल रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक एके वर्मा ने बताया कि उनके बैंक में भी रामपुर और हल्द्वानी केंद्रों से आना वाले कैश तीन दिनों से नही आ पाया है। इससे बैंक में भुगतान नहीं हो पा रहा है। अब तक बैंक में चार दिनों में चार करोड से अधिक की रकम जमा हो चुकी है। कैश न होने से उपभोक्ता परेशान है। पीएनबी, केनरा बैंक में भी रविवार को कैश नही मिलने से उपभोक्ता परेशान रहे।
सहसपुर में पीएनबी ब्रांच में एक व्यक्ति 500 व एक हजार के नोट बदलने आया तो भीड़ की वजह से बैंककर्मी ने गेट बंद कर दिया। गुस्साए युवक ने बैंक कर्मी से गेट खुलवाने को लेकर गाली गलौच शुरु कर दी। युवक और बैंककर्मी के बीच तनातनी का माहौल बन गया। एसआई रमेश बाबू भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच कर मामला शांत कराया। शाखा प्रबंधक मुकेश पटेल ने बताया की सुबह से बैंक में करेंसी बदलने के लिये उपभोक्ताओ की काफ़ी भीड़ जमा है।
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नागरिक दिनेश भारद्वाज, फैसल, फईम, शादिका, निकिता आदि ने कहा कि केंद्र सरकार ने 14 नवंबर की रात तक पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, मेडिकल, अस्पताल और विद्युत विभाग, परिवहन विभाग को आदि में नोट स्वीकार किए जाने के लिए अधिकृत किया है। हालांकि अब इन संस्थाओं ने भी नोट को स्वीकार करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दिन और रात खपाने के बावजूद बैंकों में नई करेंसी हाथ नहीं लग रही है। वह नोट चलाने को लेकर परेशान हैं। प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की भी हालत इससे जुदा नहीं है। मरीजों को अस्पतालों में दवाईयां तक नहीं मिल रही हैं, जिससे मरीजों व उनके तीमारदारों के सामने समस्या खड़ी हो रही है। पैसों के अभाव में मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। दवाईयां देने तक के लिए मेडिकल स्वामी छोटे नोट मांग रहे हैं। बैंकों पर रकम बदलने के लिए भीड़ लगी है। उपभोक्ताओं को दिनभर भूखे प्यासे कतार में लगना पड़ रहा है। उधर, पीएनबी बैंक प्रबंधक रमेश सोन कुशले ने कहा कि ग्राहकों की समस्याओं के निस्तारण का बैंक कर्मियों की ओर से पूरा प्रयास किया जा रहा है। जल्द हर ग्राहक पर नई करेंसी पहुंच जाएगी। वहीं नींदडू़ में पिछले कई दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे आम आदमी के लिए दो हजार रुपये का नया नोट मकसद पूरा नहीं करने के कारण सिर दर्द बन गया है। छोटे नोट नहीं होने के कारण कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें शाम तक के लिए बंद करना ही मुनासिब समझा। बैंकों में भारी भीड़ के चलते घंटों धक्के खाने के बाद किसी तरह दो हजार रुपये मूल्य का नोट हासिल करने वाला श्रमिक छोटा ने बताया कि किसी भी दुकान परउसका फुटकर नहीं हुआ।
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वहीं नजीबाबाद में स्टेट बैंक, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित विभिन्न बैंक शाखाओं में नोट बदलने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऑरियंटल बैंक सहित कई शाखाओं में धनराशि खत्म होने पर केवल नोट ही जमा किए गए। बैंकों की शाखाओं के साथ अब एटीएम बूथों पर भी भुगतान के लिए लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं हैं। स्टेट बैंक, पीएनबी सहित कई बैंकों ने अपने एटीएम चालू कर दिए हैं। उधर, स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर शाखा प्रबंधक एके बरकले ने बैंक के बाहर खड़े सभी ग्राहकों को अतिरिक्त समय में भुगतान कराया। पीएनबी की मुख्य शाखा पर प्रबंधक बलवीर कौशल ने बैंक के पास उपलब्ध धनराशि को देखते हुए नोट बदलने आए ग्राहकों को कुछ न कुछ भुगतान कराकर निराश नहीं लौटने दिया। बैंकों पर पुलिस भी तैनात रही।
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वहीं स्योहारा। बैंक में नई करेंसी न आने से बैंकों का खजाना खाली हो गया है। कैश लेने बैंक आने वाले उपभोक्ताओं को निराश लौटना पड़ रहा है। एसबीआई में रविवार को लगभग 20 लाख कैश का वितरण किया गया। केनरा बैंक के प्रबंधक नंद किशोर का कहना है कि उनके एटीएम में तीसरे दिन भी दो लाख की रकम को डाला गया और एटीएम दो घंटे चला। बैंक में उपभोक्ताओं को दो दो हजार का भुगतान किया गया। ओरिएंटल बैंक आफ कार्मस के प्रबंधक ने बताया कि बैंक में पिछले चार दिनों से कोई कैश नहीं आया है। केवल जमा करने का काम चल रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक एके वर्मा ने बताया कि उनके बैंक में भी रामपुर और हल्द्वानी केंद्रों से आना वाले कैश तीन दिनों से नही आ पाया है। इससे बैंक में भुगतान नहीं हो पा रहा है। अब तक बैंक में चार दिनों में चार करोड से अधिक की रकम जमा हो चुकी है। कैश न होने से उपभोक्ता परेशान है। पीएनबी, केनरा बैंक में भी रविवार को कैश नही मिलने से उपभोक्ता परेशान रहे।
सहसपुर में पीएनबी ब्रांच में एक व्यक्ति 500 व एक हजार के नोट बदलने आया तो भीड़ की वजह से बैंककर्मी ने गेट बंद कर दिया। गुस्साए युवक ने बैंक कर्मी से गेट खुलवाने को लेकर गाली गलौच शुरु कर दी। युवक और बैंककर्मी के बीच तनातनी का माहौल बन गया। एसआई रमेश बाबू भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच कर मामला शांत कराया। शाखा प्रबंधक मुकेश पटेल ने बताया की सुबह से बैंक में करेंसी बदलने के लिये उपभोक्ताओ की काफ़ी भीड़ जमा है।