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Bijnor News: विकास के पथ पर चला, परंपरागत उद्योग हुआ धूमिल
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-उम्मीद : जनपद को ट्रांसपोटर्स, महानगरों से रेल कनेक्टिविटी जोड़ी जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मैं बिजनौर हूं। मेरे 200 साल पूरे होने पर बिजनौर महोत्सव मनाया जा रहा है। इस 200 साल के सफर में बहुत कुछ पाया और कुछ खोया भी। विकास के पथ पर अग्रिम हूं। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हायर शिक्षा की सुविधा यहां मिलने लगी है। चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल का उपहार मिला, जिसका मेरे आंगन में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। 200 साल के सफर पर कुछ बुद्धिजीवी, वरिष्ठ लोगों की नजर से जनपद की बदलती तस्वीर पर चर्चा के अंश प्रस्तुत है।
व्यापारी मुनीष त्यागी ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में बिजनौर कई क्षेत्रों में बढ़ा। परंतु इस सफल में पारंपरिक उद्योगों को खोता गया। नहटौर के कपड़े, नगीना का काष्टकला, शेरकोट का ब्रुश कारोबार धीमा पड़ा है। इनके उत्पादकों की विदेशों में मांग है और अपनी पहचान है। एक नए बिजनौर की और आवश्यकता है। पुराना शहर में भीड़ बहुत हो गई।
समाजसेवी तेगबहादुर सिंह ने बताया कि उनके युवा अवस्था से अब के जनपद में बहुत कुछ बदलाव आया है। गांवों से तहसील, मुख्यालय व आसपास के जिलों में मार्गों का विकास हुआ। महानगरों से बिजनौर जनपद के लिए नई रेल गाड़ियों का संचालन होना चाहिए। जनपद गन्ना बाहुल्य है और यहां दस चीनी मिल स्थापित हो गई है।
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चौधरी शूरवीर सिंह का कहना है कि उनके किशोर अवस्था के समय बिजनौर शहर छोटा था और ग्रामीण परिवेश में ही था। अब शहर में मॉल, सड़कों का निर्माण, शिक्षा आदि क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ा है। ग्रामीण अंचल में भी विकास हुआ। ट्रांसपोर्ट्स के क्षेत्र में बिजनौर को ओर कार्य कराने की जरूरत है।
चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दो साल के अपने सफर में बिजनौर जनपद विकसित हुआ है। गंगा के तट और पहाडों की तलहटी में बसे बिजनौर जनपद पर्यावरण में बहुत अच्छा है। यहां की अर्थ व्यवस्था में गन्ना बहुत महत्वपूर्ण है। जिले में उत्पादन बढ़ा, चीनी मिलों की संख्या बढ़ी। मुख्यालय पर मंडी होनी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मैं बिजनौर हूं। मेरे 200 साल पूरे होने पर बिजनौर महोत्सव मनाया जा रहा है। इस 200 साल के सफर में बहुत कुछ पाया और कुछ खोया भी। विकास के पथ पर अग्रिम हूं। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हायर शिक्षा की सुविधा यहां मिलने लगी है। चिकित्सा के क्षेत्र में मेडिकल का उपहार मिला, जिसका मेरे आंगन में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। 200 साल के सफर पर कुछ बुद्धिजीवी, वरिष्ठ लोगों की नजर से जनपद की बदलती तस्वीर पर चर्चा के अंश प्रस्तुत है।
व्यापारी मुनीष त्यागी ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में बिजनौर कई क्षेत्रों में बढ़ा। परंतु इस सफल में पारंपरिक उद्योगों को खोता गया। नहटौर के कपड़े, नगीना का काष्टकला, शेरकोट का ब्रुश कारोबार धीमा पड़ा है। इनके उत्पादकों की विदेशों में मांग है और अपनी पहचान है। एक नए बिजनौर की और आवश्यकता है। पुराना शहर में भीड़ बहुत हो गई।
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समाजसेवी तेगबहादुर सिंह ने बताया कि उनके युवा अवस्था से अब के जनपद में बहुत कुछ बदलाव आया है। गांवों से तहसील, मुख्यालय व आसपास के जिलों में मार्गों का विकास हुआ। महानगरों से बिजनौर जनपद के लिए नई रेल गाड़ियों का संचालन होना चाहिए। जनपद गन्ना बाहुल्य है और यहां दस चीनी मिल स्थापित हो गई है।
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चौधरी शूरवीर सिंह का कहना है कि उनके किशोर अवस्था के समय बिजनौर शहर छोटा था और ग्रामीण परिवेश में ही था। अब शहर में मॉल, सड़कों का निर्माण, शिक्षा आदि क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ा है। ग्रामीण अंचल में भी विकास हुआ। ट्रांसपोर्ट्स के क्षेत्र में बिजनौर को ओर कार्य कराने की जरूरत है।
चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दो साल के अपने सफर में बिजनौर जनपद विकसित हुआ है। गंगा के तट और पहाडों की तलहटी में बसे बिजनौर जनपद पर्यावरण में बहुत अच्छा है। यहां की अर्थ व्यवस्था में गन्ना बहुत महत्वपूर्ण है। जिले में उत्पादन बढ़ा, चीनी मिलों की संख्या बढ़ी। मुख्यालय पर मंडी होनी चाहिए।