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अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का है इंतजार!
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 02 Jul 2016 12:09 AM IST
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रेल लाइन पुल के नीचे सूकरो नदी से एक सप्ताह पूर्व हुआ कटान।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में रेलवे अधिकारियों को शायद किसी हादसे का इंतजार है। दरअसल अमर उजाला द्वारा झकझोरने के बावजूद रेलवे निर्माण खंड ने सूकरो नदी के रेल पुल क्षेत्र में क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत कराना गंवारा नहीं किया। उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं के बाद सरकार ने अलर्ट घोषित कर दिया है। उत्तराखंड से सटी नजीबाबाद क्षेत्र की बरसाती नदियों में किसी भी क्षण उफान आने की आशंका है।
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र उत्तराखंड सीमा से सटा है। उत्तराखंड की बरसाती नदियां सूकरो, मालन, रतनाल, लकड़हान, कोटावाली नजीबाबाद क्षेत्र से होकर बालावाली क्षेत्र में गंगा में समा जाती हैं। नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच रेलवे ब्रांच लाइन सूकरो नदी को क्रॉस करती है। गत दिनों सूकरो नदी में पानी आने पर रेल पुल के दोनों ओर बनी ठोकरें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। अमर उजाला ने 26 जून के अंक में खतरे में पड़ा रेलवे पुल, पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी नदी में आने से ठोकरें हुईं क्षतिग्रस्त... शीर्षक से सचित्र खबर प्रकाशित की थी।
रेलवे के एडीईएन सीताराम ने ठोकरें क्षतिग्रस्त होने की जानकारी न होने की बात कहते हुए शीघ्र सर्वे कराकर बचाव कार्य कराने की बात कही थी। करीब एक सप्ताह बाद भी अधिकारी स्तर पर बचाव कार्य शुरू कराने की कोशिश नहीं की गई। कटान पहले से ज्यादा हो चुका है। इस बाबत पूछे जाने पर एडीईएन सीताराम ने बताया कि उन्हें सूकरो ब्रांच लाइन रेल पुल क्षेत्र का सर्वे करने का समय नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि ट्रैक पर ड्यूटी करने वाले की-मैन द्वारा किसी तरह के नुकसान की रिपोर्ट फिलहाल उन्हें नहीं दी गई है।
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उधर, उत्तराखंड में बादल फटने की घटना के बाद जगह-जगह तबाही मची हुई है। कई बरसाती नदियां उफन चुकी हैं। नजीबाबाद तहसील क्षेत्र से गुजरने वाली पांच बरसाती नदियों में किसी भी क्षण उफान आने की आशंका है। सूकरो नदी में उफान आया, तो बचाव कार्य कराना रेल अधिकारियों के लिए नामुमकिन होगा।
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नजीबाबाद तहसील क्षेत्र उत्तराखंड सीमा से सटा है। उत्तराखंड की बरसाती नदियां सूकरो, मालन, रतनाल, लकड़हान, कोटावाली नजीबाबाद क्षेत्र से होकर बालावाली क्षेत्र में गंगा में समा जाती हैं। नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच रेलवे ब्रांच लाइन सूकरो नदी को क्रॉस करती है। गत दिनों सूकरो नदी में पानी आने पर रेल पुल के दोनों ओर बनी ठोकरें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। अमर उजाला ने 26 जून के अंक में खतरे में पड़ा रेलवे पुल, पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी नदी में आने से ठोकरें हुईं क्षतिग्रस्त... शीर्षक से सचित्र खबर प्रकाशित की थी।
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रेलवे के एडीईएन सीताराम ने ठोकरें क्षतिग्रस्त होने की जानकारी न होने की बात कहते हुए शीघ्र सर्वे कराकर बचाव कार्य कराने की बात कही थी। करीब एक सप्ताह बाद भी अधिकारी स्तर पर बचाव कार्य शुरू कराने की कोशिश नहीं की गई। कटान पहले से ज्यादा हो चुका है। इस बाबत पूछे जाने पर एडीईएन सीताराम ने बताया कि उन्हें सूकरो ब्रांच लाइन रेल पुल क्षेत्र का सर्वे करने का समय नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि ट्रैक पर ड्यूटी करने वाले की-मैन द्वारा किसी तरह के नुकसान की रिपोर्ट फिलहाल उन्हें नहीं दी गई है।
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उधर, उत्तराखंड में बादल फटने की घटना के बाद जगह-जगह तबाही मची हुई है। कई बरसाती नदियां उफन चुकी हैं। नजीबाबाद तहसील क्षेत्र से गुजरने वाली पांच बरसाती नदियों में किसी भी क्षण उफान आने की आशंका है। सूकरो नदी में उफान आया, तो बचाव कार्य कराना रेल अधिकारियों के लिए नामुमकिन होगा।