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Bijnor News: अब कोयले का विकल्प बनेगा शहरों का कूड़ा, तैयारियां शुरू
Fri, 03 Mar 2023 09:48 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 03 Mar 2023 09:48 PM IST
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- जिले के कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर बनेगा आरडीएफ
- बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से अनुबंध की तैयारी
- छह शहरों में चालू हो चुके हैं कूड़ा निस्तारण केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शहरों से निकलने वाले कूड़े से बिजली भी बनेगी। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से अनुबंध किया जाना बाकी रह गया है। दरअसल, कूड़ा निस्तारण केंद्रों से निकलने वाला आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) बिजली उत्पादन कंपनियों को बेचा जाएगा जो उर्जा उत्पादन में कोयले का विकल्प बनेगा।
जिले के 12 निकायों में कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाए जाने थे, जिनमें छह प्लांट चालू हो गए हैं। जिनमें शहरों से निकलने वाले कूड़े से जैविक खाद और आरडीएफ बनाया जा रहा है। हालांकि जैविक खाद तो किसानों को बेच दिया जाएगा। अब एक और कदम बढ़ाते हुए आरडीएफ को बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को बेचने की तैयारी है। जिसके लिए कंपनियों से अनुबंध की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो कूड़े का निस्तारण नहीं होगा बल्कि निकायों की आमदनी बढ़ जाएगी, साथ ही उर्जा उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता भी घटेगी।
इन निकायों के प्लांट हुए चालू
निकाय क्षमता टन प्रति दिन में
नूरपुर 20
स्योहारा 20
अफजलगढ़ 20
शेरकोट 30
बिजनौर 50
क्या होता है आरडीएफ
कूड़ा दो तरह का होता हैं एक जैविक और एक अजैविक। जैविक कूड़े से खाद तैयार कर लिया गया है, वहीं प्लास्टिक आदि अजैविक कूड़ा जोकि जल सकता है, उसे आरडीएफ कहा जाता है। इसमें प्लास्टिक, गत्ता आदि होता है। यह ज्वलनशील होता है।
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कबाड़ियों से भी अनुबंध की तैयारी
जिसे कूड़े से खाद बनाया जा सकता है, उसे अलग कर लिया जाता है बल्कि धातु को अलग कर ली जाती है। धातु, जिसमें लोहा और कांच आदि शामिल होता है, उसे बेचने के लिए कबाड़ियों से भी अनुबंध की तैयारी है।
-- -- -- कोट
जिले में 12 कूड़ा निस्तारण प्लांटे बनाए गए हैं। छह सक्रिय हो गए हैं। बाकि छह में जो समस्याएं हैं, उन्हें दूर कर अन्य भी शुरू कराए जाएंगे। शहरों में अब कूड़े की समस्या नहीं रहेगी - विनय कुमार, एडीएम प्रशासन
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- बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से अनुबंध की तैयारी
- छह शहरों में चालू हो चुके हैं कूड़ा निस्तारण केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शहरों से निकलने वाले कूड़े से बिजली भी बनेगी। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों से अनुबंध किया जाना बाकी रह गया है। दरअसल, कूड़ा निस्तारण केंद्रों से निकलने वाला आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) बिजली उत्पादन कंपनियों को बेचा जाएगा जो उर्जा उत्पादन में कोयले का विकल्प बनेगा।
जिले के 12 निकायों में कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाए जाने थे, जिनमें छह प्लांट चालू हो गए हैं। जिनमें शहरों से निकलने वाले कूड़े से जैविक खाद और आरडीएफ बनाया जा रहा है। हालांकि जैविक खाद तो किसानों को बेच दिया जाएगा। अब एक और कदम बढ़ाते हुए आरडीएफ को बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को बेचने की तैयारी है। जिसके लिए कंपनियों से अनुबंध की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो कूड़े का निस्तारण नहीं होगा बल्कि निकायों की आमदनी बढ़ जाएगी, साथ ही उर्जा उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता भी घटेगी।
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इन निकायों के प्लांट हुए चालू
निकाय क्षमता टन प्रति दिन में
नूरपुर 20
स्योहारा 20
अफजलगढ़ 20
शेरकोट 30
बिजनौर 50
क्या होता है आरडीएफ
कूड़ा दो तरह का होता हैं एक जैविक और एक अजैविक। जैविक कूड़े से खाद तैयार कर लिया गया है, वहीं प्लास्टिक आदि अजैविक कूड़ा जोकि जल सकता है, उसे आरडीएफ कहा जाता है। इसमें प्लास्टिक, गत्ता आदि होता है। यह ज्वलनशील होता है।
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कबाड़ियों से भी अनुबंध की तैयारी
जिसे कूड़े से खाद बनाया जा सकता है, उसे अलग कर लिया जाता है बल्कि धातु को अलग कर ली जाती है। धातु, जिसमें लोहा और कांच आदि शामिल होता है, उसे बेचने के लिए कबाड़ियों से भी अनुबंध की तैयारी है।
जिले में 12 कूड़ा निस्तारण प्लांटे बनाए गए हैं। छह सक्रिय हो गए हैं। बाकि छह में जो समस्याएं हैं, उन्हें दूर कर अन्य भी शुरू कराए जाएंगे। शहरों में अब कूड़े की समस्या नहीं रहेगी - विनय कुमार, एडीएम प्रशासन