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अब आधार से मिलेगी किसान सम्मान निधि
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अब आधार से मिलेगी किसान सम्मान निधि
बिजनौर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के भुगतान को बैंक खाते की बजाय अब आधार नंबर से जोड़ दिया गया है। अगर किसान की ओर से पंजीकरण में दिए गए बैंक खाते के विवरण में गलती है तो भी किसान के दूसरे ऐसे खाते में पैैसा भेज दिया जाएगा, जिसमें आधार नंबर लिंक हो। इसके बारे में किसानों को पता नहीं है। वे अपने उसी खाते में किस्त के बारे में पता कर रहे हैं, जिसमें पंजीकरण कराया है जबकि किस्त दूसरे खाते में जा चुकी होती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की छठी किस्त किसानों के खातों में भेजी जा रही है। किसानों को किस्त पंजीकरण के हिसाब से मिलती है। किसान का पंजीकरण जब कृषि विभाग के पोर्टल पर हो जाता है तो किसानों को इसके बाद किस्त मिलने लगती है। अगर किसी वजह से अभिलेखों में कमी होने की वजह से पंजीकरण के तुरंत बाद जारी होने वाली किस्त नहीं मिलती तो उसे बाद में इसका भुगतान कर दिया जाता है। यदि किसानों को किस्त नहीं मिलती तो वह कृषि विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। लॉकडाउन में किसानों की इस समस्या को खत्म करने के लिए किस्त के भुगतान को बैंक खाते के बजाए आधार नंबर से जोड़ा गया है। किसानों के अक्सर दो बैंक खाते होते हैं। गन्ना भुगतान लेने से अलग किसानों का क्रेडिट कार्ड का बैंक खाता भी होता है। शासन ने किसानों को भुगतान करने के लिए अब आधार नंबर को जरिया बनाया है। किसान का आधार नंबर किसी और बैंक खाते से लिंक होगा तो भुगतान उस खाते में भेजा जा रहा है। किसानों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। वे किस्त की जानकारी के लिए परेशान घूमते हैं जबकि उनकी किस्त दूसरे खातों में आ चुकी होती है।
यह भी है वजह
कई बार किसान बैंकों में आधार नंबर तो अपडेट करा देते हैं लेकिन बैंक द्वारा एनपीसीआई में पंजीकरण नहीं कराया जाता है। एनपीसीआई वह संस्था है जो भारत सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का भुगतान आधार से लिंक खाते में करती है। काफी किसानों का योजना पर स्टेटस बताता है कि उनका आधार नंबर एनपीसीआई पर पंजीकृत नहीं है। ऐसे किसानों को बैंक कर्मचारियों से मिलकर एनपीसीआई पर आधार नंबर पंजीकृत कराना चाहिए।
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1.76 लाख किसानों को छठी किस्त मिली
अब तक चार लाख 58 हजार 438 किसानों का डाटा कृषि विभाग के पोर्टल पर लॉक किया जा चुका है। इनमें अब तक तीन लाख 81 हजार 218 पात्र जा चुके हैं। तीन लाख लाख 49 हजार 991 किसानों को पहली, तीन लाख 35 हजार 591 किसानों को दूसरी, तीन लाख 24 हजार 205 किसानों को तीसरी, दो लाख 93 हजार 551 किसानों को चौथी, दो लाख 38 हजार 858 किसानों को पांचवीं व एक लाख 76 हजार 542 किसानों को छठी किस्त जारी हो चुकी है।
अंगूठा लगाकर निकालें पैसे
किसान बैंक में आधार नंबर लिंक कराने के लिए जाते हैं। कई बार बैंक में केवाईसी जमा करने के बाद भी किसी कारण से खाता लिंक नहीं हो पाता है। इसके लिए किसान को बैंक में पोस मशीन पर अपना अंगूठा लगाकर रुपये निकालकर देखने चाहिए। ऐसा होता है तो इसका मतलब होता है कि खाता लिंक हो चुका है।
सभी को दे रहे लाभ
प्रभारी उपकृषि निदेशक अवधेश मिश्र के अनुसार किसान अपने सभी बैंक खातों को चेक करें। किसान का विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण है तो आधार नंबर के जरिए उसका खाता किसी भी बैंक में भेजा जा सकता है। सभी पात्रों को योजना का लाभ दिया जा रहा है।
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बिजनौर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के भुगतान को बैंक खाते की बजाय अब आधार नंबर से जोड़ दिया गया है। अगर किसान की ओर से पंजीकरण में दिए गए बैंक खाते के विवरण में गलती है तो भी किसान के दूसरे ऐसे खाते में पैैसा भेज दिया जाएगा, जिसमें आधार नंबर लिंक हो। इसके बारे में किसानों को पता नहीं है। वे अपने उसी खाते में किस्त के बारे में पता कर रहे हैं, जिसमें पंजीकरण कराया है जबकि किस्त दूसरे खाते में जा चुकी होती है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की छठी किस्त किसानों के खातों में भेजी जा रही है। किसानों को किस्त पंजीकरण के हिसाब से मिलती है। किसान का पंजीकरण जब कृषि विभाग के पोर्टल पर हो जाता है तो किसानों को इसके बाद किस्त मिलने लगती है। अगर किसी वजह से अभिलेखों में कमी होने की वजह से पंजीकरण के तुरंत बाद जारी होने वाली किस्त नहीं मिलती तो उसे बाद में इसका भुगतान कर दिया जाता है। यदि किसानों को किस्त नहीं मिलती तो वह कृषि विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करते हैं। लॉकडाउन में किसानों की इस समस्या को खत्म करने के लिए किस्त के भुगतान को बैंक खाते के बजाए आधार नंबर से जोड़ा गया है। किसानों के अक्सर दो बैंक खाते होते हैं। गन्ना भुगतान लेने से अलग किसानों का क्रेडिट कार्ड का बैंक खाता भी होता है। शासन ने किसानों को भुगतान करने के लिए अब आधार नंबर को जरिया बनाया है। किसान का आधार नंबर किसी और बैंक खाते से लिंक होगा तो भुगतान उस खाते में भेजा जा रहा है। किसानों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। वे किस्त की जानकारी के लिए परेशान घूमते हैं जबकि उनकी किस्त दूसरे खातों में आ चुकी होती है।
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यह भी है वजह
कई बार किसान बैंकों में आधार नंबर तो अपडेट करा देते हैं लेकिन बैंक द्वारा एनपीसीआई में पंजीकरण नहीं कराया जाता है। एनपीसीआई वह संस्था है जो भारत सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का भुगतान आधार से लिंक खाते में करती है। काफी किसानों का योजना पर स्टेटस बताता है कि उनका आधार नंबर एनपीसीआई पर पंजीकृत नहीं है। ऐसे किसानों को बैंक कर्मचारियों से मिलकर एनपीसीआई पर आधार नंबर पंजीकृत कराना चाहिए।
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1.76 लाख किसानों को छठी किस्त मिली
अब तक चार लाख 58 हजार 438 किसानों का डाटा कृषि विभाग के पोर्टल पर लॉक किया जा चुका है। इनमें अब तक तीन लाख 81 हजार 218 पात्र जा चुके हैं। तीन लाख लाख 49 हजार 991 किसानों को पहली, तीन लाख 35 हजार 591 किसानों को दूसरी, तीन लाख 24 हजार 205 किसानों को तीसरी, दो लाख 93 हजार 551 किसानों को चौथी, दो लाख 38 हजार 858 किसानों को पांचवीं व एक लाख 76 हजार 542 किसानों को छठी किस्त जारी हो चुकी है।
अंगूठा लगाकर निकालें पैसे
किसान बैंक में आधार नंबर लिंक कराने के लिए जाते हैं। कई बार बैंक में केवाईसी जमा करने के बाद भी किसी कारण से खाता लिंक नहीं हो पाता है। इसके लिए किसान को बैंक में पोस मशीन पर अपना अंगूठा लगाकर रुपये निकालकर देखने चाहिए। ऐसा होता है तो इसका मतलब होता है कि खाता लिंक हो चुका है।
सभी को दे रहे लाभ
प्रभारी उपकृषि निदेशक अवधेश मिश्र के अनुसार किसान अपने सभी बैंक खातों को चेक करें। किसान का विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण है तो आधार नंबर के जरिए उसका खाता किसी भी बैंक में भेजा जा सकता है। सभी पात्रों को योजना का लाभ दिया जा रहा है।