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‘कमजोर नहीं, सहनशील होती हैं महिलाएं’
Fri, 17 May 2019 11:56 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Fri, 17 May 2019 11:56 PM IST
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नूरपुर में अपराजिता कार्यक्रम के तहत एमजीडीएसडी पब्लिक स्कूल में शपथ लेतीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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नूरपुर में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे मिशन अपराजिता कार्यक्रम के अंतर्गत एमजीएसडी पब्लिक स्कूल गोहावर में सशक्त समाज के निर्माण में नारी की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं को नारी की गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए गए।
शुक्रवार को विद्यालय प्रांगण में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक देवेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य सुशील कवि और प्रशासक कल्पना नरुका ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रबंधक देवेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाएं हमेशा से ही अपराजिता रही हैं। प्राचीन काल हो या वर्तमान समाज महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने छात्राओं से उच्च शिक्षा लेकर स्वावलंबी बनने और अत्याचार और शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज उठाने को कहा। विद्यालय प्रशासक कल्पना नरुका ने कहा कि आज सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। काम के सिलसिले में उन्हें रात में भी घर से बाहर रहना पड़ता है। महिलाओं की स्वतंत्रता के साथ उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों में भी वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने छात्राओं से किसी भी परिस्थिति में न घबराने और छेड़छाड़ अथवा महिलाओं के प्रति होने वाली अन्य घटनाओं का कड़ा विरोध दर्ज करते हुए उसका डटकर मुकाबला करने को कहा। प्रधानाचार्य सुशील कवि ने अपराजिता शब्द की व्याख्या करते हुए नारी शक्ति का वर्णन किया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों को नारी का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विभूति त्यागी, अनम जहां, पायल, आंचल, आस्था राजपूत, तनुजा पंवार, अवंतिका, संस्कृति, खुशी चौहान, काशवी नरुका आदि छात्राओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में नारी सुरक्षा और उसका सम्मान विषय छात्राओं ने सवाल किए। प्रधानाचार्य सुशील कवि और उप प्रधानाचार्य विशाल शर्मा ने छात्राओं के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। अंत में छात्र-छात्राओं को नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के आयोजन में समस्त विद्यालय स्टाफ का योगदान रहा।
लड़की होने से खुद को न समझें हीन
छात्रा विभूति त्यागी का कहना है कि आप लड़की हैं, इसे लेकर कभी भी हीन भावना अपने अंदर न आने दें। डरें केवल गलती करने से लड़की होने की वजह से नहीं। गलती से सीख लें और दोबारा से गलती न करने की शपथ लें।
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उच्च शिक्षा लेकर आत्मनिर्भर बनें छात्राएं।
छात्रा अनम जहां का कहना है कि सबसे पहले खुद को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है और इसके लिए शिक्षित होना आवश्यक है। शिक्षित होकर आप धन शौर्य और आत्मविश्वास कमा सकती हैं।
सहनशीलता को कमजोरी न बनने दें।
छात्रा पायल का कहना है कि नारी कमजोर नहीं, बल्कि सहनशील होती है। अपनी सहनशीलता को अपनी कमजोरी न बनने दें और अन्याय व अत्याचार का डटकर मुकाबला करें।
अभियान से स्वावलंबी बनने की मिलती है प्रेरणा
छात्रा संस्कृति का कहना है अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से उसे स्वावलंबी बनने की प्रेरणा मिली है। अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं पर विश्वास रखने की सीख कार्यक्रम से मिली है।
समाज को बदलनी चाहिए अपनी सोच
छात्रा आस्था राजपूत का कहना है कि नारी के प्रति अभी भी कुछ लोगों की सोच छोटी है। ऐसे लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। इसके लिए अमर उजाला द्वारा चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम काफी सराहनीय है।
नारी का सम्मान करें
शिक्षिका रूपा रानी का कहना है कि नारी में वह शक्ति है जो अत्याचार सहकर भी पुरुष के मान सम्मान की रक्षा करती है। पुरुषों का भी कर्तव्य है कि वह नारी का सम्मान करें।
अपने गुणों को अपनी शक्ति बनाएं
शिक्षिका गुंजल शर्मा का कहना है कि नारी को अपनी पहचान बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। नारी को अपने गुणों को अपनी शक्ति बनाना चाहिए।
अपनी सोच को व्यापक करें महिलाएं
शीतल चौधरी का कहना है कि नारी अपनी दशा के लिए स्वयं जिम्मेदार है। आज के समाज में नारी ही नारी की दुश्मन है। नारी को अपनी संकीर्ण विचारधारा को त्यागकर अपनी सोच को व्यापक करना होगा।
महिलाओं को दें स्वयं से जुड़े फैसले लेने का अधिकार
श्वेता वशिष्ठ का कहना है कि महिलाओं को स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने का अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। महिला सशक्तिकरण की बातें करने के बजाये इसे धरातल पर लाना होगा तभी सही मायनों में महिला अपराजिता बनेगी।
खुद पर विश्वास करें
विद्यालय की प्रशासक कल्पना नरुका ने कहा कि महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानकर अन्याय के विरुद्ध लड़ना होगा तभी उनके अधिकार मिलेंगे। अपनी सुरक्षा के लिए जुड़ों कराटे आदि के स्थान पर खुद पर आत्मविश्वास जरूरी है।
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शुक्रवार को विद्यालय प्रांगण में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक देवेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य सुशील कवि और प्रशासक कल्पना नरुका ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रबंधक देवेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाएं हमेशा से ही अपराजिता रही हैं। प्राचीन काल हो या वर्तमान समाज महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने छात्राओं से उच्च शिक्षा लेकर स्वावलंबी बनने और अत्याचार और शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज उठाने को कहा। विद्यालय प्रशासक कल्पना नरुका ने कहा कि आज सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। काम के सिलसिले में उन्हें रात में भी घर से बाहर रहना पड़ता है। महिलाओं की स्वतंत्रता के साथ उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों में भी वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने छात्राओं से किसी भी परिस्थिति में न घबराने और छेड़छाड़ अथवा महिलाओं के प्रति होने वाली अन्य घटनाओं का कड़ा विरोध दर्ज करते हुए उसका डटकर मुकाबला करने को कहा। प्रधानाचार्य सुशील कवि ने अपराजिता शब्द की व्याख्या करते हुए नारी शक्ति का वर्णन किया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों को नारी का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विभूति त्यागी, अनम जहां, पायल, आंचल, आस्था राजपूत, तनुजा पंवार, अवंतिका, संस्कृति, खुशी चौहान, काशवी नरुका आदि छात्राओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में नारी सुरक्षा और उसका सम्मान विषय छात्राओं ने सवाल किए। प्रधानाचार्य सुशील कवि और उप प्रधानाचार्य विशाल शर्मा ने छात्राओं के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। अंत में छात्र-छात्राओं को नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के आयोजन में समस्त विद्यालय स्टाफ का योगदान रहा।
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लड़की होने से खुद को न समझें हीन
छात्रा विभूति त्यागी का कहना है कि आप लड़की हैं, इसे लेकर कभी भी हीन भावना अपने अंदर न आने दें। डरें केवल गलती करने से लड़की होने की वजह से नहीं। गलती से सीख लें और दोबारा से गलती न करने की शपथ लें।
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उच्च शिक्षा लेकर आत्मनिर्भर बनें छात्राएं।
छात्रा अनम जहां का कहना है कि सबसे पहले खुद को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है और इसके लिए शिक्षित होना आवश्यक है। शिक्षित होकर आप धन शौर्य और आत्मविश्वास कमा सकती हैं।
सहनशीलता को कमजोरी न बनने दें।
छात्रा पायल का कहना है कि नारी कमजोर नहीं, बल्कि सहनशील होती है। अपनी सहनशीलता को अपनी कमजोरी न बनने दें और अन्याय व अत्याचार का डटकर मुकाबला करें।
अभियान से स्वावलंबी बनने की मिलती है प्रेरणा
छात्रा संस्कृति का कहना है अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से उसे स्वावलंबी बनने की प्रेरणा मिली है। अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं पर विश्वास रखने की सीख कार्यक्रम से मिली है।
समाज को बदलनी चाहिए अपनी सोच
छात्रा आस्था राजपूत का कहना है कि नारी के प्रति अभी भी कुछ लोगों की सोच छोटी है। ऐसे लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। इसके लिए अमर उजाला द्वारा चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम काफी सराहनीय है।
नारी का सम्मान करें
शिक्षिका रूपा रानी का कहना है कि नारी में वह शक्ति है जो अत्याचार सहकर भी पुरुष के मान सम्मान की रक्षा करती है। पुरुषों का भी कर्तव्य है कि वह नारी का सम्मान करें।
अपने गुणों को अपनी शक्ति बनाएं
शिक्षिका गुंजल शर्मा का कहना है कि नारी को अपनी पहचान बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। नारी को अपने गुणों को अपनी शक्ति बनाना चाहिए।
अपनी सोच को व्यापक करें महिलाएं
शीतल चौधरी का कहना है कि नारी अपनी दशा के लिए स्वयं जिम्मेदार है। आज के समाज में नारी ही नारी की दुश्मन है। नारी को अपनी संकीर्ण विचारधारा को त्यागकर अपनी सोच को व्यापक करना होगा।
महिलाओं को दें स्वयं से जुड़े फैसले लेने का अधिकार
श्वेता वशिष्ठ का कहना है कि महिलाओं को स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने का अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। महिला सशक्तिकरण की बातें करने के बजाये इसे धरातल पर लाना होगा तभी सही मायनों में महिला अपराजिता बनेगी।
खुद पर विश्वास करें
विद्यालय की प्रशासक कल्पना नरुका ने कहा कि महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानकर अन्याय के विरुद्ध लड़ना होगा तभी उनके अधिकार मिलेंगे। अपनी सुरक्षा के लिए जुड़ों कराटे आदि के स्थान पर खुद पर आत्मविश्वास जरूरी है।