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200 लीटर डीजल के लिए कराया था नामांकन
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नींदडू/ बिजनौर। निर्वाचन आयोग ने 1980 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार करने के लिए 200 लीटर डीजल मुहैया कराने का आदेश जारी किया था। उस दौरान ट्रैक्टरों के जरिए प्रचार होता था। अतहर निशात (82) बताते हैं कि उन्हें लगा कि प्रचार के लिए जो डीजल मिलेगा, उससे खेत की सिंचाई हो जाएगी। इस पर उन्होंने विधानसभा चुनाव में नामांकन करा दिया। चुनाव चिह्न मशाल मिला।
डीजल का परमिट लेने जब वह एसडीएम कार्यालय धामपुर पहुंचे, तब मालूम पड़ा कि डीजल केवल पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के चुनाव में लगे वाहनों के लिए ही देय है। चूंकि उनकी मंशा चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि डीजल लेना था, इसलिए उन्होंने न तो चुनाव प्रचार किया और न ही स्वयं को अपना वोट दिया। दो जून 1980 को जब चुनाव परिणाम घोषित हुआ, तब वह अपने नाम के सामने 3600 मत अंकित देख कर चकित रह गए। चुनाव में लोकदल प्रत्याशी श्याम सिंह 20932 मत पाकर विजयी हुए थे तथा कांग्रेस के हरपाल शास्त्री को 6274 वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा था।
अतहर निशात का मानना है कि चुनाव चिह्न मशाल कांग्रेस के निशान हाथ का पंजा से मिलता जुलता होने के कारण मतदाताओं ने भ्रमवश मशाल निशान पर ठप्पा लगा दिया। उन्हें उपजिला निर्वाचन अधिकारी डीएस नाथ की ओर से एक जुलाई 1980 तक चुनाव खर्च का ब्यौरा जमा करने का नोटिस मिला था। तब लोकसभा चुनाव व्यय की सीमा एक लाख रुपये तथा विधानसभा की खर्च की सीमा 35 हजार रुपये थी।
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डीजल का परमिट लेने जब वह एसडीएम कार्यालय धामपुर पहुंचे, तब मालूम पड़ा कि डीजल केवल पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के चुनाव में लगे वाहनों के लिए ही देय है। चूंकि उनकी मंशा चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि डीजल लेना था, इसलिए उन्होंने न तो चुनाव प्रचार किया और न ही स्वयं को अपना वोट दिया। दो जून 1980 को जब चुनाव परिणाम घोषित हुआ, तब वह अपने नाम के सामने 3600 मत अंकित देख कर चकित रह गए। चुनाव में लोकदल प्रत्याशी श्याम सिंह 20932 मत पाकर विजयी हुए थे तथा कांग्रेस के हरपाल शास्त्री को 6274 वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा था।
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अतहर निशात का मानना है कि चुनाव चिह्न मशाल कांग्रेस के निशान हाथ का पंजा से मिलता जुलता होने के कारण मतदाताओं ने भ्रमवश मशाल निशान पर ठप्पा लगा दिया। उन्हें उपजिला निर्वाचन अधिकारी डीएस नाथ की ओर से एक जुलाई 1980 तक चुनाव खर्च का ब्यौरा जमा करने का नोटिस मिला था। तब लोकसभा चुनाव व्यय की सीमा एक लाख रुपये तथा विधानसभा की खर्च की सीमा 35 हजार रुपये थी।
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