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बिजनौर: धामपुर - सांसद ने दलितों के लिए निजी कंपनियों में भी मांगा आरक्षण
Fri, 10 Feb 2023 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 10 Feb 2023 12:35 AM IST
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गिरीशचंद सांसद बसपा, नगीना लोकसभा क्षेत्र
- नगीना लोकसभा के सांसद गिरीशचंद ने संसद में उठाया मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीशचंद ने सदन में देश के गरीबों, दलितों, पिछड़ा व अन्य वर्गों के लोगों, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे को दमदार तरीके से उठाया। निजी क्षेत्रों में गरीबों को लाभ नहीं मिल रहा है। जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग को संविधान के तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण है, वैसे ही उन्हें निजी कंपनियों में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति और समग्र विकास बगैर शिक्षा के संभव नहीं है। एक तरफ सरकार राष्ट्र के विकास का दंभ भर रही है, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन गिरावट आ रही है। राष्ट्रीय, राजकीय विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन हेतु बड़ी संख्या में रिक्तियां पड़ी हैं। केंद्र की ओर से 100 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से त्रस्त जनता के लिए नगण्य है। उन्होंने कहा कि बसपा हमेशा से मजदूरों, गरीबों की बात करती रही है। कहा कि आयुष्मान भारत योजना अच्छी है, लेकिन इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है। जिससे वे अपना इलाज आसानी से करा सके।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के केवल सरकार का महज नारा है। देश में दलित महिलाओं में शैक्षणिक स्थिति बदहाल है। ज्यादातर दलित छात्रा लोअर प्राइमरी स्तर से शिक्षा जारी नहीं रखती। इसलिए सरकार को नारों से नहीं। धरालत पर काम करना होगा, जिससे देेश की सही से प्रगति करें। दलित, मजदूर जनता सिर उठाकर देश की रफ्तार में योगदान द सकें।
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धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीशचंद ने सदन में देश के गरीबों, दलितों, पिछड़ा व अन्य वर्गों के लोगों, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे को दमदार तरीके से उठाया। निजी क्षेत्रों में गरीबों को लाभ नहीं मिल रहा है। जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग को संविधान के तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण है, वैसे ही उन्हें निजी कंपनियों में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति और समग्र विकास बगैर शिक्षा के संभव नहीं है। एक तरफ सरकार राष्ट्र के विकास का दंभ भर रही है, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन गिरावट आ रही है। राष्ट्रीय, राजकीय विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन हेतु बड़ी संख्या में रिक्तियां पड़ी हैं। केंद्र की ओर से 100 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से त्रस्त जनता के लिए नगण्य है। उन्होंने कहा कि बसपा हमेशा से मजदूरों, गरीबों की बात करती रही है। कहा कि आयुष्मान भारत योजना अच्छी है, लेकिन इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है। जिससे वे अपना इलाज आसानी से करा सके।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के केवल सरकार का महज नारा है। देश में दलित महिलाओं में शैक्षणिक स्थिति बदहाल है। ज्यादातर दलित छात्रा लोअर प्राइमरी स्तर से शिक्षा जारी नहीं रखती। इसलिए सरकार को नारों से नहीं। धरालत पर काम करना होगा, जिससे देेश की सही से प्रगति करें। दलित, मजदूर जनता सिर उठाकर देश की रफ्तार में योगदान द सकें।
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