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Bijnor News: मोबाइल फोन खा गया बच्चों की जुबान, इशारों से चल रहा काम
Tue, 24 Jun 2025 11:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 24 Jun 2025 11:45 PM IST
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बिजनौर मेडिकल अस्पताल के मन कक्ष काउंसिलिंग करते मनोचिकित्सक डॉ नीतिन। फाइल फोटो
बिजनौर। दिन में नौकरी और शाम को थके-हारे घर पहुंचे। घर में छोटे बच्चे ने खेलने की जिद की तो मोबाइल फोन थमा दिया। परिणाम, यह फोन ही बच्चे की जुबान खा गया। एडमिशन की बारी आई तो पता चला कि बच्चा मां और पापा के अलावा कुछ बोल ही नहीं पाता। बस इशारों से काम चलाता है।
मेडिकल अस्पताल के मनकक्ष में हर सप्ताह ऐसे 30 बच्चे पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों में चिकित्सक ने बच्चे से ज्यादा मां-बाप की काउंसलिंग की। इन बच्चों की उम्र भी तीन से पांच साल है।
केस-1 : नूरपुर निवासी रोहिताश अपने चार वर्षीय बेटे को लेकर बाल रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचा। वहां जांच कराई तो पता चला जीभ और मुंह में कोई परेशानी नहीं। फिर मनकक्ष में दिखाया। वहां पता चला कि घर में कोई बच्चे से बात ही नहीं कर रहा। जैसे ही वह रोता तो उसे मोबाइल फोन दे दिया जाता। ऐसे में चिकित्सक ने सबसे पहले फोन दूर करने और दिन में कम से कम ढाई से तीन घंटे उससे बात करने की सलाह दी।
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केस-2 : स्योहारा निवासी रमेश की बेटी साढ़े चार साल की उम्र में ऐसे बोलती जैसे कि कार्टून चैनल के पात्र बोलते हैं। पानी या खाना मांगने के लिए वह इशारों में बात करती है। बालरोग विशेषज्ञ की सलाह पर मनकक्ष में बच्ची को दिखाया। वहां चिकित्सक ने बालिका को फोन से दूर करने की सलाह दी। साथ ही बच्चे को कहानी सुनाने और उससे बात करते हुए उसे ज्यादा से ज्यादा बुलवाने की सलाह दी।
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मेडिकल अस्पताल के मनकक्ष में हर सप्ताह ऐसे 30 बच्चे पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों में चिकित्सक ने बच्चे से ज्यादा मां-बाप की काउंसलिंग की। इन बच्चों की उम्र भी तीन से पांच साल है।
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केस-1 : नूरपुर निवासी रोहिताश अपने चार वर्षीय बेटे को लेकर बाल रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचा। वहां जांच कराई तो पता चला जीभ और मुंह में कोई परेशानी नहीं। फिर मनकक्ष में दिखाया। वहां पता चला कि घर में कोई बच्चे से बात ही नहीं कर रहा। जैसे ही वह रोता तो उसे मोबाइल फोन दे दिया जाता। ऐसे में चिकित्सक ने सबसे पहले फोन दूर करने और दिन में कम से कम ढाई से तीन घंटे उससे बात करने की सलाह दी।
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केस-2 : स्योहारा निवासी रमेश की बेटी साढ़े चार साल की उम्र में ऐसे बोलती जैसे कि कार्टून चैनल के पात्र बोलते हैं। पानी या खाना मांगने के लिए वह इशारों में बात करती है। बालरोग विशेषज्ञ की सलाह पर मनकक्ष में बच्ची को दिखाया। वहां चिकित्सक ने बालिका को फोन से दूर करने की सलाह दी। साथ ही बच्चे को कहानी सुनाने और उससे बात करते हुए उसे ज्यादा से ज्यादा बुलवाने की सलाह दी।