बड़ा सवाल: मेघना को बधाई देने नहीं पहुंचे अधिकारी-नेता, पदक जीतकर लौटी हैं घर, अमर उजाला से हुई खास बातचीत
पदक जीतकर घर लौटी मेघना सिंह से अमर उजाला टीम की खास बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने बताया कि कोई अधिकारी या नेता उन्हें बधाई देने नहीं पहुंचे हैं।
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मेघना सिंह बिजनौर के कोतवाली देहात में रहती हैं। मेघना सिंह के दादा प्रेमपाल सिंह ने बताया कि घर पर कोई भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया। परिजनों ने घर पहुंचने पर मेघना का स्वागत किया। मेघना के घर को सुंदर रोशनी से सजाया गया है। वहीं मेघना के आने पर मेघना की माता रीना देवी ने उसके पसंद के व्यंजन बनाए। गुरुवार को पूरा दिन मेघना घर पर ही रहीं। मेघना से बात करने मीडियाकर्मी तो पहुंचे लेकिन किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने मेघना को शुभकामनाएं देना गवारा नहीं समझा। शाम के समय मेघना धामपुर स्थित मंदिर में गई और वहां भगवान का आशीर्वाद लिया।
लड़कियों को मेहनत से मिलेगा मुकामः मेघना
राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर लौटी भारतीय टीम की सदस्य मेघना सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को और लड़कियों से मेहनत करने का आह्वान किया। मेघना से बातचीत के कुछ खास अंश...
सवालः राष्ट्रमंडल खेलों में टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
मेघनाः टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा। टीम फाइनल में पहुंची लेकिन स्वर्ण पदक न जीतने का मलाल पूरी टीम को रहा।
सवालः भारतीय टीम फाइनल में किसी दबाव में थी?
मेघनाः बिल्कुल नहीं। सभी खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। फाइनल मैच में काफी मेहनत की और जीत के लिए सभी ने अपना सौ प्रतिशत देने का प्रयास किया।
सवालः क्रिकेट को ओलंपिक में भी शामिल किया जाना चाहिए?
मेघनाः बिल्कुल... अब राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट आ गया है तो जल्द ही ओलंपिक में भी आना चाहिए।
सवालः अपने आप को भारतीय टीम में किस खिलाड़ी की जगह देखती है, जैसे कई खिलाड़ियों की उम्र बढ़ रही है?
मेघनाः मैं अपने खुद के बेहतर प्रदर्शन पर विश्वास रखती हूं। मेरा काम टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन ही हमें टीम में जगह दिलाता है।
सवालः आपके खेल जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग प्वाइंट क्या रहा ?
मेघनाः सन 2010 में उत्तर प्रदेश की टीम में चयन होना खेल जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा। इसके बाद आगे की राहत मेहनत के दम पर आसान होती गई।
सवालः अब तक के खेल जीवन को कैसे देखती हैं?
मेघनाः मैंने कड़ी मेहनत की है। मुझे यहां तक पहुंचने में 12 साल लग गए। प्रयास रहेगा कि आगे इससे भी ज्यादा मेहनत करूं और टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकूं।
सवालः ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिला खिलाड़ियों के लिए क्या संदेश देना चाहती है?
मेघनाः मेरा मानना है कि आपका जिस खेल में इंटरेस्ट हो उसी खेल में जाएं। खेल समय मांगता है। मुझे यहां तक पहुंचने में 12 साल लगे। हमेशा प्रॉपर डाइट लें। मीठे और तले भुने तथा ज्यादा मसाले वाले खाने से दूर रहें।