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मजरूबी चिट्ठी के बिना नहीं होगा मेडिकल
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मजरूबी चिट्ठी के बिना नहीं होगा मेडिकल
बिजनौर। फर्जी मेडिकल जांच पर अंकुश लगाने के लिए जिला अस्पताल एवं सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को अलर्ट किया गया है। अब पुलिस की मजरूबी चिट्ठी के बिना किसी का भी मेडिकल नहीं किया जाएगा। अभी तक कुछ लोग वकील से शपथ पत्र बनवाकर भी जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में मेडिकल प्रमाण पत्र बनवा लेते थे।
आमतौर पर मेडिकल जांच रिपोर्ट बनने को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल करते हैं। आए दिन चिकित्सकों पर भी गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाने के आरोप लगते रहते हैं। इन सब बातों से बचने के लिए सीएमओ की ओर से जिला अस्पताल और जनपद के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है। अभी तक वकील से शपथ पत्र बनवा कर दर्जनों डॉक्टरी परीक्षण रोज हो रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। डॉक्टरी परीक्षण कराने से पहले संबंधित थाने को सूचना अवश्य दी जाएगी। इसके बाद वहां से पुलिस की मजरूबी चिट्ठी संबंधित अस्पताल में आने पर मेडिकल जांच रिपोर्ट बनेगी।
सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव ने बताया कि जनपद में फर्जी मामलों और चिकित्सकीय परीक्षण को रोकने के लिए नई पहल शुरू की गई है। जिला अस्पताल या जनपद के किसी भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कुछ लोग शपथ पत्र बनवाकर भी मेडिकोलीगल करा लेते हैं, उससे कभी-कभी पीड़ित पक्ष के बजाए दूसरे हमलावर पक्ष को बढ़ावा मिल जाता है। इससे पीड़ित पर एक दबाव बन जाता है। न्याय मिलने में यह व्यवस्था बाधक बन जाती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद का कहना है कि शपथ पत्र से डॉक्टरी परीक्षण नहीं किया जाएगा। पुलिस की मजरूबी चिट्ठी मिलने पर ही सभी चिकित्सक मेडिकल रिपोर्ट बनाएंगे। हालांकि इससे पूर्व आवश्यकतानुसार संबंधित व्यक्ति का उपचार किया जाएगा।
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बिजनौर। फर्जी मेडिकल जांच पर अंकुश लगाने के लिए जिला अस्पताल एवं सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को अलर्ट किया गया है। अब पुलिस की मजरूबी चिट्ठी के बिना किसी का भी मेडिकल नहीं किया जाएगा। अभी तक कुछ लोग वकील से शपथ पत्र बनवाकर भी जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में मेडिकल प्रमाण पत्र बनवा लेते थे।
आमतौर पर मेडिकल जांच रिपोर्ट बनने को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल करते हैं। आए दिन चिकित्सकों पर भी गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाने के आरोप लगते रहते हैं। इन सब बातों से बचने के लिए सीएमओ की ओर से जिला अस्पताल और जनपद के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है। अभी तक वकील से शपथ पत्र बनवा कर दर्जनों डॉक्टरी परीक्षण रोज हो रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। डॉक्टरी परीक्षण कराने से पहले संबंधित थाने को सूचना अवश्य दी जाएगी। इसके बाद वहां से पुलिस की मजरूबी चिट्ठी संबंधित अस्पताल में आने पर मेडिकल जांच रिपोर्ट बनेगी।
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सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव ने बताया कि जनपद में फर्जी मामलों और चिकित्सकीय परीक्षण को रोकने के लिए नई पहल शुरू की गई है। जिला अस्पताल या जनपद के किसी भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कुछ लोग शपथ पत्र बनवाकर भी मेडिकोलीगल करा लेते हैं, उससे कभी-कभी पीड़ित पक्ष के बजाए दूसरे हमलावर पक्ष को बढ़ावा मिल जाता है। इससे पीड़ित पर एक दबाव बन जाता है। न्याय मिलने में यह व्यवस्था बाधक बन जाती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद का कहना है कि शपथ पत्र से डॉक्टरी परीक्षण नहीं किया जाएगा। पुलिस की मजरूबी चिट्ठी मिलने पर ही सभी चिकित्सक मेडिकल रिपोर्ट बनाएंगे। हालांकि इससे पूर्व आवश्यकतानुसार संबंधित व्यक्ति का उपचार किया जाएगा।
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