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Bijnor News: महाभारतकालीन गलखा देवी मंदिर पर मंडराया खतरा

Fri, 14 Jul 2023 12:49 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 14 Jul 2023 12:49 AM IST
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Mahabharata period Galkha Devi temple in danger
मंडावर क्षेत्र में कटान करते हुए गलखा देवी मंदिर के नजदीक पहुंची गंगा और कटान करते को राेकने का
- मंदिर को गंगा के कटान से बचाने की जद्दोजहद, पुलिस प्रशासन ने डाला डेरा
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- मौके पर पहुंच रही आस पास के लोगों की भीड़ को हटाने के लिए लगानी पड़ी पुलिस
फोटो....
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडावर/बिजनौर। महाभारत कालीन मां गलखा देवी का मंदिर इन दिनों गंगा की धारा के मुहाने पर आ चुका है। मंदिर पर खतरा मंडराया हुआ है। ऐसे में कटान को रोकने के लिए दिनभर जद़्दोजहद चलती रही। उधर मंदिर पर आसपास के लोगों की भीड़ पहुंचने लगी, जिसे हटाने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ गई।
बृहस्पतिवार को गलखा देवी मंदिर की तरफ गंगा की धारा कटान करते हुए तेजी से बढ़ने लगी। मंदिर परिसर से धारा महज कुछ ही मीटर दूर रह गई। ऐसे में तहसीलदार अनुराग और मंडावर थाना प्रभारी संजय कुमार मंदिर पहुंच गए। मौके पर सिंचाई विभाग के अफसरों को भी बुलाया गया। आनन फानन में जगह जगह से पेड़ काटकर गंगा की धारा के मुहाने पर डाले गए। गंगा में डाले जा रहे पेड़ों का एक सिरा तार से बांध दिया गया, जिससे पानी में पेड़ बहने ना पाए और मिट्टी की ढाल बनकर मुकाबला करें। लोगों का कहना था कि एक महीना पहले तक गंगा की धारा करीब पांच सौ मीटर दूर हुआ करती थी, अब तेजी से कटान करते हुए गंगा की धारा मंदिर के बेहद करीब तक पहुंच गई है।
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गंगा की धारा में किसानों की जमीन भी समा चुकी है, लेकिन इस बात की क्षेत्र को चिंता नहीं है। चिंता है तो बस मंदिर के अस्तित्व की। इसी के चलते आस पास के महिलाओं, पुरुषों और बालकों ने मंदिर की तरफ कूच कर दिया। लोग पैदल ही मंदिर की तरफ जाते दिखाई दिए। मां गलखा देवी के प्रति आस्था के चलते भीड़ गंगा के तट पर पहुंची, जिन्होंने कटान का मुआयना किया। ऐसा लगा कि ये लोग यह कामना कर रहे हों कि हे गंगा मैया, मां गलखा तक मत आना। इतना ही नहीं इस भीड़ को गंगा के तट से हटाने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी।
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खुद ही फसल उजाड़ रहे किसान
खेतों के गंगा में समाने का किसानों को डर सता रहा है। अब तक सैकड़ों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। ऐसे में गलखा देवी मंदिर के पास एक किसान अपनी चारे की फसल को खुद ही उजाड़ता दिखाई दिया। ऐसा लगा कि खेत को गंगा में समाने की चिंता के साथ ही वह उसमें बोई फसल को काट लेना चाहता है।



कुंडीनपुर गढ़ का हिस्सा रहा है मंदिर
मां गलखा देवी मंदिर के पुजारी मनोज शर्मा ने बताया कि अब कुंदनपुर टीप महाभारत काल में कुंडीनपुर कहलाता था। जो इस मंदिर से छह किलोमीटर दूर हुआ करता था। इसी कुंडीनपुर गढ़ का एक महल जो अब गंगा में समा चुका है, उसके अवशेष कुछ सालोें पहले तक देखने को मिलते रहे हैं। इस मंदिर से महल तक एक गुफा और पक्का रास्ता जाता था। अब खोदाई में उक्त रास्ते के अवशेष मिल जाते हैं। यह सभ्यता महाभारतकालीन रही है। इसी मंदिर से भगवान कृष्ण रुक्मिणी को अपने साथ ले गए थे।
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