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Bijnor News: आकार लेने लगा साहित्यकार दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय
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एजाज अहमद
नजीबाबाद/मंडावली। महान साहित्यकार एवं हिंदी गजल प्रणेता दुष्यंत कुमार की स्मृति में राजपुर नवादा में भव्य संग्रहालय और पुस्तकालय का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। साहित्यकार के पैतृक आवास और ग्राम समाज की भूमि पर भव्य संग्रहालय बनाया जा रहा है। संग्रहालय में आकर्षक फव्वारा लगाया जाएगा और संग्रहालय परिसर में ही दुष्यंत कुमार की पीतल की आदमकद प्रतिमा लगाने की योजना है।
एमएलसी अश्विनी त्यागी और दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी एवं करनाल अपूर्व त्यागी का साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में भव्य संग्रहालय निर्माण का स्वप्न जल्द पूरा होने जा रहा है। दुष्यंत कुमार के राजपुर नवादा स्थित पैतृक आवास पर संस्कृति विभाग की ओर से भव्य संग्रहालय और पुस्तकालय का निर्माण कराया जा रहा है। संस्कृति विभाग 668.89 लाख रुपये की लागत से दुष्यंत कुमार के पैतृक आवास राजपुर नवादा में संग्रहालय और पुस्तकालय निर्माण कर रहा है।
संग्रहालय निर्माण के लिए करीब 343.49 लाख रुपये की प्रथम किस्त काफी पहले जारी हो चुकी थी। संस्कृति विभाग की देखरेख में भव्य ऑडिटोरियम के निर्माण का कार्य करीब 45 प्रतिशत तक पूरा किया जा चुका है। संग्रहालय का भव्य ओपन कॉरिडोर का निर्माण तेजी से चल रहा है। करीब एक वर्ष के भीतर दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय साकार रूप ले लेगा।
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आमजन के कवि थे दुष्यंत कुमार
हिंदी गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार ने आम आदमी के जीवन से जुड़ीं काव्य रचना लिखीं, व्यवस्था पर करारे कटाक्ष किए किए। सामाजिक परिवेश से जुड़ी रचनाओं के जरिये देशवासियों के दिलों पर दुष्यंत कुमार ने राज किया। साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में संस्कृति विभाग द्वारा उनके पैतृक गांव में संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने के फैसले ने देशवासियों ध्यान नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा की ओर केंद्रित किया।
दुष्यंत का प्राचीन पुस्तकालय संरक्षित रखने की थी योजना
दुष्यंत कुमार की स्मृति में उनकी प्राचीन हवेली और पुस्तकालय को संरक्षित रखने की योजना बनी थी। संग्रहालय निर्माण के दौरान दुष्यंत के पुस्तकालय को पूर्ववत रखा जाना था। निर्माण इकाई को पुस्तकालय के आसपास खुदाई में पुस्तकालय कमरे की गली हुईं ईंटें मिलीं, जिससे उसे संरक्षित रख पाना संभव नहीं हो पाया। अब पुराने पुस्तकालय कमरे को नए रूप में बनाने का फैसला लिया गया है।
दुष्यंत के पुत्रों ने सरकार के नाम थी कीमती जमीन
साहित्यकार दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी और करनाल अपूर्व त्यागी ने राजपुर नवादा स्थित पैतृक जमीन पिता की स्मृति में संग्रहालय बनाने के लिए सरकार के नाम देने का फैसला लिया। उन्होंने दो हिस्सों में 275 वर्गमीटर और 890 वर्ग मीटर कीमती जमीन संग्रहालय निर्माण के लिए सरकार के नाम की।इसी जमीन पर ग्राम समाज की कुछ भूमि पर दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय भव्य रूप लेने जा रहा है।
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नजीबाबाद/मंडावली। महान साहित्यकार एवं हिंदी गजल प्रणेता दुष्यंत कुमार की स्मृति में राजपुर नवादा में भव्य संग्रहालय और पुस्तकालय का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। साहित्यकार के पैतृक आवास और ग्राम समाज की भूमि पर भव्य संग्रहालय बनाया जा रहा है। संग्रहालय में आकर्षक फव्वारा लगाया जाएगा और संग्रहालय परिसर में ही दुष्यंत कुमार की पीतल की आदमकद प्रतिमा लगाने की योजना है।
एमएलसी अश्विनी त्यागी और दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी एवं करनाल अपूर्व त्यागी का साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में भव्य संग्रहालय निर्माण का स्वप्न जल्द पूरा होने जा रहा है। दुष्यंत कुमार के राजपुर नवादा स्थित पैतृक आवास पर संस्कृति विभाग की ओर से भव्य संग्रहालय और पुस्तकालय का निर्माण कराया जा रहा है। संस्कृति विभाग 668.89 लाख रुपये की लागत से दुष्यंत कुमार के पैतृक आवास राजपुर नवादा में संग्रहालय और पुस्तकालय निर्माण कर रहा है।
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संग्रहालय निर्माण के लिए करीब 343.49 लाख रुपये की प्रथम किस्त काफी पहले जारी हो चुकी थी। संस्कृति विभाग की देखरेख में भव्य ऑडिटोरियम के निर्माण का कार्य करीब 45 प्रतिशत तक पूरा किया जा चुका है। संग्रहालय का भव्य ओपन कॉरिडोर का निर्माण तेजी से चल रहा है। करीब एक वर्ष के भीतर दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय साकार रूप ले लेगा।
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आमजन के कवि थे दुष्यंत कुमार
हिंदी गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार ने आम आदमी के जीवन से जुड़ीं काव्य रचना लिखीं, व्यवस्था पर करारे कटाक्ष किए किए। सामाजिक परिवेश से जुड़ी रचनाओं के जरिये देशवासियों के दिलों पर दुष्यंत कुमार ने राज किया। साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में संस्कृति विभाग द्वारा उनके पैतृक गांव में संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने के फैसले ने देशवासियों ध्यान नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा की ओर केंद्रित किया।
दुष्यंत का प्राचीन पुस्तकालय संरक्षित रखने की थी योजना
दुष्यंत कुमार की स्मृति में उनकी प्राचीन हवेली और पुस्तकालय को संरक्षित रखने की योजना बनी थी। संग्रहालय निर्माण के दौरान दुष्यंत के पुस्तकालय को पूर्ववत रखा जाना था। निर्माण इकाई को पुस्तकालय के आसपास खुदाई में पुस्तकालय कमरे की गली हुईं ईंटें मिलीं, जिससे उसे संरक्षित रख पाना संभव नहीं हो पाया। अब पुराने पुस्तकालय कमरे को नए रूप में बनाने का फैसला लिया गया है।
दुष्यंत के पुत्रों ने सरकार के नाम थी कीमती जमीन
साहित्यकार दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी और करनाल अपूर्व त्यागी ने राजपुर नवादा स्थित पैतृक जमीन पिता की स्मृति में संग्रहालय बनाने के लिए सरकार के नाम देने का फैसला लिया। उन्होंने दो हिस्सों में 275 वर्गमीटर और 890 वर्ग मीटर कीमती जमीन संग्रहालय निर्माण के लिए सरकार के नाम की।इसी जमीन पर ग्राम समाज की कुछ भूमि पर दुष्यंत कुमार स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय भव्य रूप लेने जा रहा है।