{"_id":"6640fa418a5ee9aa0b011ebb","slug":"life-in-villages-unsafe-due-to-wildlife-migration-bijnor-news-c-32-1-smrt1025-111454-2024-05-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: वन्यजीवों के विचरण से गांवों में जीवन असुरक्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: वन्यजीवों के विचरण से गांवों में जीवन असुरक्षित
विज्ञापन
कार्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा पर विचरण करते हाथी। स्रोत संवाद।
-फसलें वन्यजीवों के निशाने पर, लोगों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
कालागढ़। नेशनल पार्क व संरक्षित वनों की सीमा पर बसे गांवों में वन्यजीवों के विचरण से जीवन असुरक्षित हो गया है। वहीं फसलें जीवों के निशाने पर हैं। बाघ, गुलदार, हाथी, भालू जैसे हिंसक जानवर बिजनौर की उत्तरी सीमा पर सक्रिय हैं। इससे लोगों में दहशत है।
जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा पर कार्बेट नेशनल पार्क, कार्बेट टाइगर रिजर्व, सोनानदी अभ्यारण, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व व साहूवाला आदि वनक्षेत्र स्थित हैं। 1973 में कार्बेट टाइगर रिजर्व के बनने के साथ ही यहां राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण के दिशा निर्देश लागू हो गए हैं। इसके चलते यहां वन्यजीवों को सरकारी संरक्षण मिलना शुरू हुआ। 50 वर्ष बीतने के साथ ही यहां अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, सोनानदी वन्यजीव विहार विकसित हो गया। रामगंगा नदी के खादर इलाके में वन्यजीवों का विचरण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते खेतों में बोई जाने वाली दहलन व तिलहन की फसलों का उत्पादन घटने लगा है। किसानों ने अरहर, मसूर, मूंग, तिल आदि की खेती करना लगभग बंद कर दिया है। अब यहां केवल गन्ना, धान व गेहूं की फसल ही गुजर बसर के लिए उगा रहे हैं। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष मदन सिंह राणा, अतुल शर्मा, वसीम गुजर आदि का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ किसानों की खेती की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पर्याप्त गश्ती दल व वन चौकियां बिजनौर के वन विभाग को स्थापित करनी चाहिएं। क्षेत्र में वन्यजीवों की समस्या के लिए नगीना व अमानगढ़ संपर्क करना होता है। यह से कार्यालय काफी दूर है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा पर कालागढ़ में वन विभाग को अपनी चौकी खोलकर वहां गश्ती दलों की तैनाती की जानी चाहिए।
विज्ञापन
कालागढ़। नेशनल पार्क व संरक्षित वनों की सीमा पर बसे गांवों में वन्यजीवों के विचरण से जीवन असुरक्षित हो गया है। वहीं फसलें जीवों के निशाने पर हैं। बाघ, गुलदार, हाथी, भालू जैसे हिंसक जानवर बिजनौर की उत्तरी सीमा पर सक्रिय हैं। इससे लोगों में दहशत है।
जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा पर कार्बेट नेशनल पार्क, कार्बेट टाइगर रिजर्व, सोनानदी अभ्यारण, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व व साहूवाला आदि वनक्षेत्र स्थित हैं। 1973 में कार्बेट टाइगर रिजर्व के बनने के साथ ही यहां राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण के दिशा निर्देश लागू हो गए हैं। इसके चलते यहां वन्यजीवों को सरकारी संरक्षण मिलना शुरू हुआ। 50 वर्ष बीतने के साथ ही यहां अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, सोनानदी वन्यजीव विहार विकसित हो गया। रामगंगा नदी के खादर इलाके में वन्यजीवों का विचरण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते खेतों में बोई जाने वाली दहलन व तिलहन की फसलों का उत्पादन घटने लगा है। किसानों ने अरहर, मसूर, मूंग, तिल आदि की खेती करना लगभग बंद कर दिया है। अब यहां केवल गन्ना, धान व गेहूं की फसल ही गुजर बसर के लिए उगा रहे हैं। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष मदन सिंह राणा, अतुल शर्मा, वसीम गुजर आदि का कहना है कि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ किसानों की खेती की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पर्याप्त गश्ती दल व वन चौकियां बिजनौर के वन विभाग को स्थापित करनी चाहिएं। क्षेत्र में वन्यजीवों की समस्या के लिए नगीना व अमानगढ़ संपर्क करना होता है। यह से कार्यालय काफी दूर है। कार्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा पर कालागढ़ में वन विभाग को अपनी चौकी खोलकर वहां गश्ती दलों की तैनाती की जानी चाहिए।
विज्ञापन