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वाकयाते करबला सुन शिया सोगवार जार-जार रोए
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Thu, 26 May 2016 11:56 PM IST
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नजीबाबाद के जोगीरम्पुरी दरगाह पर खिताब करते उलेमा।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में मौला अली की बारगाह में नजराना-ए-अकीदत पेश करने के लिए हजारों जायरीन जोगीरम्पुरी दरगाह पहुंच चुके हैं। बृहस्पतिवार तड़के शमशुल हसन हॉल से मातमी मजलिसों को खिताब करने का शुरू हुआ सिलसिला शाम तक जारी रहा। वाकयाते करबला सुनकर शिया सोगवार जार-जार रोए और सींनाजनी की। उधर, मौला अली की दरगाह पर मन्नतें मांगने का सिलसिला जारी है।
दरगाह ए ऑलिया नजफे-हिंद जोगीरम्पुरी की चार रोजा मातमी मजलिसों का आगाज मौलाना आबिद मेहंदी के खिताब से हुआ। उन्होंने अल्लाह और उसके बंदों के बारे में फरमाया कि अल्लाह ने हर शह उसके अफजल के लिए पैदा की। उन्होंने कहा कि इंसान की पैदाइश की गरज इबादत ए खुदा है। उन्होंने कहा कि इंसान अशरफुल मखलूक है, उसे इस दुनिया में आने की अहमियत को समझना होगा। उन्होंने वाकयाते करबला का जिक्र करते हुए इस्लाम और दीन के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके जांबाज साथियों द्वारा दी गई कुर्बानी से सबक लेने की सलाह दी।
मौलाना अलकमी जैदी के संचालन में पहले दिन हुई मजलिसों को मौलाना डॉ.हुसैन अफजल, नदीम असगर, तंजीर हुसैन, मोहसिन तकवी आदि उलेमा ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी और वाकयाते करबला का जिक्र किया, तो सोगवार सींनाजनी जैसे मातम के लिए मजबूर हो गए।
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दरगाह ए ऑलिया नजफे-हिंद जोगीरम्पुरी की चार रोजा मातमी मजलिसों का आगाज मौलाना आबिद मेहंदी के खिताब से हुआ। उन्होंने अल्लाह और उसके बंदों के बारे में फरमाया कि अल्लाह ने हर शह उसके अफजल के लिए पैदा की। उन्होंने कहा कि इंसान की पैदाइश की गरज इबादत ए खुदा है। उन्होंने कहा कि इंसान अशरफुल मखलूक है, उसे इस दुनिया में आने की अहमियत को समझना होगा। उन्होंने वाकयाते करबला का जिक्र करते हुए इस्लाम और दीन के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके जांबाज साथियों द्वारा दी गई कुर्बानी से सबक लेने की सलाह दी।
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मौलाना अलकमी जैदी के संचालन में पहले दिन हुई मजलिसों को मौलाना डॉ.हुसैन अफजल, नदीम असगर, तंजीर हुसैन, मोहसिन तकवी आदि उलेमा ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी और वाकयाते करबला का जिक्र किया, तो सोगवार सींनाजनी जैसे मातम के लिए मजबूर हो गए।
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