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Bijnor News: साइकिल देने की उम्र में लाड़लों को बाइक थमाना बड़ी भूल
Thu, 04 Jan 2024 11:56 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 04 Jan 2024 11:56 PM IST
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बिजनौर। लाडलों को साइकिल देने की उम्र में बाइक या स्कूटी थमा देना बड़ी भूल है, यह अभिभावकों ने भी माना है। दरअसल शासन ने मोटर व्हीकल एक्ट को सख्ती से लागू करते हुए नाबालिगों के बाइक या चार पहिया वाहन चलाने पर रोक लगा दी है। अगर नाबालिगों ने वाहन चलाया तो अभिभावकों को जेल भी जाना पड़ जाएगा। जुर्माने का भी प्रावधान है। ऐसे में सख्ती से निपटने के साथ स्कूलों और अभिभावकों से तालमेल बनाकर जागरुकता अभियान चलेगा।
शहर में स्कूल या ट्यूशन आते-जाते ही नहीं बल्कि मौज मस्ती के लिए नाबालिगों को बाइक चलाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इनके चालान भी किए जाते हैं। मगर हेलमेट या ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर। अब शासन ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वाहन चलाने पर पूरी तरह से रोक ली दी है। एआरटीओ के अनुसार अगर नाबालिग बाइक या स्कूटी चलाते हुए पाया जाता है तो 12 महीने के लिए उक्त वाहन का पंजीकरण निलंबित कर दिया जाएगा। साथ ही उक्त नाबालिग का 25 की उम्र होने तक ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं बन सकेगा। यानि 25 साल का होने पर ही लाइसेंस बनेगा जबकि 18 साल की उम्र में लाइसेंस बन जाता है। इसके साथ ही जिसका वाहन होगा, उसे तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
- यह बोले अभिभावक
- लोगों ने नाबालिगों को वाहन नहीं बल्कि मौत के हथियार दे रखे हैं। जिसकी वजह से हादसों में नाबालिगों की मौत ज्यादा होती है। क्योंकि किशोर ही स्टंटबाजी करते हैं। साइकिल की उम्र बाइक देना बड़ी सबसे बड़ी गलती है। नए कानून का सख्ती से पालन किया गया तो हादसों में कमी आएगी। -नृपेंद्र देशवाल, संरक्षक अभिभावक संघ
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- नाबालिग बच्चों के हाथ में वाहन देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उनको न तो वाहनों की स्पीड पर कंट्रोल होता है और न ही रोड सेंस होती है। इसलिए बच्चों को वाहन नहीं दिया जाए। हम चाहते हैं कि सरकार नए कानून का सख्ती से पालन कराए। -जया अग्रवाल
- यह कानून बच्चों ही नहीं माता-पिता के लिए भी राहत भरा है। बशर्ते इस कानून का पालन सरकार बहुत सख्ती से कराए। क्योंकि अभिभावक आधुनिकता की चकाचौंध में नाबालिगों को वाहन थमा रहे हैं, जिससे उसके परिणाम बहुत सुखद नहीं है। - प्रेमा श्रीवास्तव
- आज माता पिता इस कानून का डर दिखा कर अपने नाबालिग बच्चों को वाहन से दूर कर सकते हैं, क्योंकि आज तक इस पर बहुत सख्त कानून नहीं था। अब ये आम परिवारों के लिए राहत देने वाला कानून होगा। - संगीता कटार
वर्जन: सभी अभिभावकों से अनुरोध है बच्चों को दुपहिया वाहन नहीं चलाने दें। स्कूलोंं और अभिभावकों के संग मिलकर इसके लिए जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा। अगर नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो संबंधित वाहन का एक वर्ष के लिए पंजीकरण निलंबित किया। वाहन स्वामी को तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है। - शिव शंकर सिंह एआरटीओ प्रशासन
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शहर में स्कूल या ट्यूशन आते-जाते ही नहीं बल्कि मौज मस्ती के लिए नाबालिगों को बाइक चलाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इनके चालान भी किए जाते हैं। मगर हेलमेट या ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर। अब शासन ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वाहन चलाने पर पूरी तरह से रोक ली दी है। एआरटीओ के अनुसार अगर नाबालिग बाइक या स्कूटी चलाते हुए पाया जाता है तो 12 महीने के लिए उक्त वाहन का पंजीकरण निलंबित कर दिया जाएगा। साथ ही उक्त नाबालिग का 25 की उम्र होने तक ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं बन सकेगा। यानि 25 साल का होने पर ही लाइसेंस बनेगा जबकि 18 साल की उम्र में लाइसेंस बन जाता है। इसके साथ ही जिसका वाहन होगा, उसे तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
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- यह बोले अभिभावक
- लोगों ने नाबालिगों को वाहन नहीं बल्कि मौत के हथियार दे रखे हैं। जिसकी वजह से हादसों में नाबालिगों की मौत ज्यादा होती है। क्योंकि किशोर ही स्टंटबाजी करते हैं। साइकिल की उम्र बाइक देना बड़ी सबसे बड़ी गलती है। नए कानून का सख्ती से पालन किया गया तो हादसों में कमी आएगी। -नृपेंद्र देशवाल, संरक्षक अभिभावक संघ
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- नाबालिग बच्चों के हाथ में वाहन देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उनको न तो वाहनों की स्पीड पर कंट्रोल होता है और न ही रोड सेंस होती है। इसलिए बच्चों को वाहन नहीं दिया जाए। हम चाहते हैं कि सरकार नए कानून का सख्ती से पालन कराए। -जया अग्रवाल
- यह कानून बच्चों ही नहीं माता-पिता के लिए भी राहत भरा है। बशर्ते इस कानून का पालन सरकार बहुत सख्ती से कराए। क्योंकि अभिभावक आधुनिकता की चकाचौंध में नाबालिगों को वाहन थमा रहे हैं, जिससे उसके परिणाम बहुत सुखद नहीं है। - प्रेमा श्रीवास्तव
- आज माता पिता इस कानून का डर दिखा कर अपने नाबालिग बच्चों को वाहन से दूर कर सकते हैं, क्योंकि आज तक इस पर बहुत सख्त कानून नहीं था। अब ये आम परिवारों के लिए राहत देने वाला कानून होगा। - संगीता कटार
वर्जन: सभी अभिभावकों से अनुरोध है बच्चों को दुपहिया वाहन नहीं चलाने दें। स्कूलोंं और अभिभावकों के संग मिलकर इसके लिए जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा। अगर नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो संबंधित वाहन का एक वर्ष के लिए पंजीकरण निलंबित किया। वाहन स्वामी को तीन साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है। - शिव शंकर सिंह एआरटीओ प्रशासन