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गन्ने की 0238 प्रजाति में फैली लाइलाज ‘रेड रॉट’ बीमारी
Wed, 19 Dec 2018 12:29 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला/बिजनौर
अमर उजाला/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Wed, 19 Dec 2018 12:29 AM IST
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बीमारी से ग्रस्त गन्ना।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में किसानों को मालामाल करने वाली गन्ने की 0238 प्रजाति रेड रॉट रोग से ग्रस्त हो गई है। यह बीमारी गन्ने के कैंसर जैसी होती है। 0238 प्रजाति जिले के करीब 99 प्रतिशत गन्ना रकबे में बोई जाती है। गन्ने में इस बीमारी के आने से इसकी पैदावार और चीनी रिकवरी दोनों प्रभावित हो गई हैं। 0238 में रेड रॉट का पता चलने से गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर भी सतर्क हो गया है। गन्ना विभाग ने इस बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों में फसल को तुरंत काटकर मिलों के डालने के आदेश दिए हैं। किसानों से गन्ने के ऐसे खेतों की गहरी जुताई कर प्रभावित जड़ों को जलाने का आग्रह किया गया है।
जिले में गन्ने की 0238 प्रजाति ने गन्ने ने किसानों को बंपर पैदावार दी। जिन खेतों में पहले गन्ने की पैदावार 50 क्विंटल तक होती थी, उनमें 0238 प्रजाति की पैदावार 70 क्विंटल से भी अधिक हुई। किसानों ने ट्रैंच विधि से गन्ने की फसल बोकर उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए। जिले में गन्ने का उत्पादन 160 क्विंटल प्रति बीघा तक भी निकला था। करीब सात आठ साल से जिले के किसान 0238 प्रजाति से बहुत मुनाफा कमा रहे थे। लेकिन इस साल गन्ने की 0238 प्रजाति में रेड रॉट बीमारी आ गई है। रेड रॉट को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। रेड रॉट बीमारी आने से गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी दोनों प्रभावित होती हैं। गन्ने में इस भयंकर रोग के आने से गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर भी सतर्क हो गया है। जिन क्षेत्रों में रेड रॉट बीमारी 20 प्रतिशत तक है वहां गन्ने को तत्काल कटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित खेतों की गहरी जुताई कराकर उसकी जड़ों को जलाने के आदेश जारी किए गए हैं।
रेड रॉट बीमारी का कोई इलाज नहीं
रेड रॉट बीमारी में गन्ने की जड़ गलकर लाल होने लगती है। जड़ के साथ-साथ गन्ने का तना भी लाल होने लगता है। रेड रॉट प्रजाति के गन्ने को बीच से काटने पर उससे बदबू आती है। इस तरह के गन्ने का तना और अंगोला भी सूखने लगता है। रेड रॉट बीमारी एक गन्ने से दूसरे गन्ने में भी फैल सकती है। इसके अलावा रेड रॉट बीमारी से ग्रसित बीज बोने पर नई फसल में भी रेड रॉट होता है। इसका कोई इलाज नहीं होता है। 0238 गन्ना जिले ही नहीं बल्कि वेस्ट यूपी के किसानों की प्रमुख प्रजाति है। जिले में दो लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में गन्ने की फसल है। इसमें से एक लाख 99 हजार हेक्टेयर जमीन में 0238 प्रजाति का गन्ना है।
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इस बीमारी से खत्म हुईं दो प्रजातियां
रेड रॉट बीमारी से गन्ने की प्रजाति 0312, 767 खत्म हो चुकी हैं। उस समय किसानों में रेड रॉट बीमारी के प्रति जागरूकता नहीं थी। इसलिए रेड रॉट बीमारी से रोकथाम की कोशिश भी नहीं की गई। 767 प्रजाति किसानों को बहुत पसंद थी। 0238 जैसी प्रजाति को बचाने के लिए प्रयास तुरंत शुरू हो गए हैं। इसकी रोकथाम की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी किसानों पर है। किसान अपने खेत में रेड रॉट बीमारी से ग्रसित गन्ना न बोएं।
इंसानों के लिए भी है नुकसान : डॉ. शिरीश
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिरीश कुमार का कहना है कि गंभीर प्रजाति से ग्रसित फसल के लगातार सेवन से लीवर और किडनी प्रभावित होने लगती हैं। लीवर और किडनी से संबंधित अनेक गंभीर बीमारी हो सकती हैं।
गन्ने का कैंसर है यह बीमारी : डीएन मिश्रा
नगीना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. डीएन मिश्रा के अनुसार ढ रेड रॉट बीमारी को गन्ने का कैंसर कहा जाता है। इसका कोई इलाज नहीं होता है। अगर किसी खेत में गन्ना रेड रॉट से प्रभावित है तो किसान उस खेत का बीज न बोएं।
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जिले में गन्ने की 0238 प्रजाति ने गन्ने ने किसानों को बंपर पैदावार दी। जिन खेतों में पहले गन्ने की पैदावार 50 क्विंटल तक होती थी, उनमें 0238 प्रजाति की पैदावार 70 क्विंटल से भी अधिक हुई। किसानों ने ट्रैंच विधि से गन्ने की फसल बोकर उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए। जिले में गन्ने का उत्पादन 160 क्विंटल प्रति बीघा तक भी निकला था। करीब सात आठ साल से जिले के किसान 0238 प्रजाति से बहुत मुनाफा कमा रहे थे। लेकिन इस साल गन्ने की 0238 प्रजाति में रेड रॉट बीमारी आ गई है। रेड रॉट को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। रेड रॉट बीमारी आने से गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी दोनों प्रभावित होती हैं। गन्ने में इस भयंकर रोग के आने से गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर भी सतर्क हो गया है। जिन क्षेत्रों में रेड रॉट बीमारी 20 प्रतिशत तक है वहां गन्ने को तत्काल कटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित खेतों की गहरी जुताई कराकर उसकी जड़ों को जलाने के आदेश जारी किए गए हैं।
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रेड रॉट बीमारी का कोई इलाज नहीं
रेड रॉट बीमारी में गन्ने की जड़ गलकर लाल होने लगती है। जड़ के साथ-साथ गन्ने का तना भी लाल होने लगता है। रेड रॉट प्रजाति के गन्ने को बीच से काटने पर उससे बदबू आती है। इस तरह के गन्ने का तना और अंगोला भी सूखने लगता है। रेड रॉट बीमारी एक गन्ने से दूसरे गन्ने में भी फैल सकती है। इसके अलावा रेड रॉट बीमारी से ग्रसित बीज बोने पर नई फसल में भी रेड रॉट होता है। इसका कोई इलाज नहीं होता है। 0238 गन्ना जिले ही नहीं बल्कि वेस्ट यूपी के किसानों की प्रमुख प्रजाति है। जिले में दो लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे में गन्ने की फसल है। इसमें से एक लाख 99 हजार हेक्टेयर जमीन में 0238 प्रजाति का गन्ना है।
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इस बीमारी से खत्म हुईं दो प्रजातियां
रेड रॉट बीमारी से गन्ने की प्रजाति 0312, 767 खत्म हो चुकी हैं। उस समय किसानों में रेड रॉट बीमारी के प्रति जागरूकता नहीं थी। इसलिए रेड रॉट बीमारी से रोकथाम की कोशिश भी नहीं की गई। 767 प्रजाति किसानों को बहुत पसंद थी। 0238 जैसी प्रजाति को बचाने के लिए प्रयास तुरंत शुरू हो गए हैं। इसकी रोकथाम की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी किसानों पर है। किसान अपने खेत में रेड रॉट बीमारी से ग्रसित गन्ना न बोएं।
इंसानों के लिए भी है नुकसान : डॉ. शिरीश
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिरीश कुमार का कहना है कि गंभीर प्रजाति से ग्रसित फसल के लगातार सेवन से लीवर और किडनी प्रभावित होने लगती हैं। लीवर और किडनी से संबंधित अनेक गंभीर बीमारी हो सकती हैं।
गन्ने का कैंसर है यह बीमारी : डीएन मिश्रा
नगीना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. डीएन मिश्रा के अनुसार ढ रेड रॉट बीमारी को गन्ने का कैंसर कहा जाता है। इसका कोई इलाज नहीं होता है। अगर किसी खेत में गन्ना रेड रॉट से प्रभावित है तो किसान उस खेत का बीज न बोएं।