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जिले में टीबी का बढ़ता जा रहा खतरा
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जिले में टीबी का बढ़ता जा रहा खतरा
बिजनौर। जिले में टीबी रोगियों की संख्या बढ़ते ही जा रही है। जिले भर में 17 से 29 फरवरी तक चलाए गए सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान में 153 नए मरीज मिले हैं। इनमें से 141 मरीजों का जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया गया है। शेष का भी जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार टीबी रोग को देश से समाप्त करने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक देश से टीबी रोग जड़ से खत्म हो जाए। धन के अभाव में किसी भी टीबी रोगी की जान न जाए इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने टीबी रोगियों को हर महीने 500 रुपये पोषण भत्ते के रूप में प्रति मरीज के हिसाब से देने शुरू किए थे। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी रोगियों का मुफ्त इलाज किया जाता है। साथ ही इनका शासन के निर्देश पर प्रत्येक तीन माह पर एक्टिव केस फाइडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जाता है। इसके अंतर्गत जिले भर में टीबी रोगियों को चयनित कर उनकी जांच कराई जाती है। इसके बाद उन्हें छह माह, एक साल का इलाज शुरू कर दिया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि फिलहाल जनपद मेें करीब 7900 मरीजों का उपचार चल रहा है, जबकि 17 से 29 फरवरी तक जनपद में चलाये गए सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान के दौरान टीबी के कुल 153 नए मरीज खोजे गए। इनमें से 141 का उपचार शुरू कर दिया गया है और शेष का भी जांच के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
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बिजनौर। जिले में टीबी रोगियों की संख्या बढ़ते ही जा रही है। जिले भर में 17 से 29 फरवरी तक चलाए गए सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान में 153 नए मरीज मिले हैं। इनमें से 141 मरीजों का जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया गया है। शेष का भी जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार टीबी रोग को देश से समाप्त करने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक देश से टीबी रोग जड़ से खत्म हो जाए। धन के अभाव में किसी भी टीबी रोगी की जान न जाए इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने टीबी रोगियों को हर महीने 500 रुपये पोषण भत्ते के रूप में प्रति मरीज के हिसाब से देने शुरू किए थे। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी रोगियों का मुफ्त इलाज किया जाता है। साथ ही इनका शासन के निर्देश पर प्रत्येक तीन माह पर एक्टिव केस फाइडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जाता है। इसके अंतर्गत जिले भर में टीबी रोगियों को चयनित कर उनकी जांच कराई जाती है। इसके बाद उन्हें छह माह, एक साल का इलाज शुरू कर दिया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि फिलहाल जनपद मेें करीब 7900 मरीजों का उपचार चल रहा है, जबकि 17 से 29 फरवरी तक जनपद में चलाये गए सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान के दौरान टीबी के कुल 153 नए मरीज खोजे गए। इनमें से 141 का उपचार शुरू कर दिया गया है और शेष का भी जांच के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
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