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प्रकृति से हुई मोहब्बत, धरती को हरा भरा रखने का बना लिया मकसद
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बिजनौर में पौधरोपण करते पर्यावरण प्रहरी दल के सदस्य।
- फोटो : BIJNOR
प्रकृति से बढ़ा प्यार तो बन गए पर्यावरण प्रहरी
बिजनौर। विक्रांत शर्मा, पेशा जमीन का लेखा-जोखा रखना यानि लेखपाल, तैनाती बिजनौर कलक्ट्रेट। यूं तो सरकारी मुलाजिम हैं लेकिन मुहब्बत प्रकृति से हो गई है। जी हां, विक्रांत शर्मा हर रोज सरकारी ड्यूटी खत्म होने के बाद डेढ़ से दो घंटा पर्यावरण के लिए समय देते हैं। जिन्होंने धरती को हरा भरा रखने का मकसद बना लिया है। विक्रांत शर्मा और उनका ग्रुप सिर्फ पौधा लगाता ही नहीं है बल्कि परवरिश होने तक देखभाल भी करता है।
विक्रांत शर्मा बताते हैं कि उन्हें पौधे लगाने का शौक बचपन से ही रहा है, लेकिन कोरोना काल के वक्त उन्होंने पर्यावरण को सुरक्षित रखने का अपना अभियान और तेज कर दिया। पहले कभी कभार समय मिलने पर कहीं पौधा लगा आते थे, अब हर रोज डेढ़ से दो घंटा का समय पौधरोपण और पौधों की देखभाल में गुजारते हैं। शुरुआत में वे अकेले ही इस काम को अंजाम दिया करते थे अब उनके ग्रुप में पर्यावरण के लिए काम करने वालों की संख्या बढ़कर 20 से अधिक हो गई है। इनमें आठ से दस लोग ऐसे हैं जो हर रोज अपना वक्त प्रकृति के लिए देते हैं।
जब समझ लिया गया था सफाईकर्मी
विक्रांत शर्मा बताते हैं कि इस काम को करने में कई बार रोचक किस्से भी बने। बताते हैं कि प्रगति विहार में पौधों के सूख जाने की जानकारी मिली। वे कांधे पर फावड़ा रखकर सूखे हुए पौधे की जगह दूसरा लगाने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान प्रगति विहार कॉलोनी में एक सज्जन मिले और बोले, नाली साफ करते हुए जाना। नाली गंदी पड़ी है। हालांकि विक्रांत शर्मा नाली साफ करने के लिए पहुंच गए जो साफ पड़ी थी। विक्रांत शर्मा बताते हैं कि उन्हें सफाई कर्मचारी समझ लिया गया था।
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बना डाला पर्यावरण प्रहरी ग्रुप
शुरुआत में तो विक्रांत शर्मा अकेले ही इस राह पर निकले थे। बाद में कारवां बढ़ता गया। अब बाकायदा पर्यावरण प्रहरी ग्रुप काम कर रहा है, जिसमें अरविंद, हिमांशू सोती, श्याम अग्रवाल, राकेश, अंकित शर्मा, विकास, मंजू आर्या, शिवानी, कुसुमलता, राज नरेंद्र, धर्मेंद आदि काम कर रहे हैं। ट्रिपल सी यानि पानी, पन्नी और पेड़ पर काम कर रहा है।
हर साल होता है पौधरोपण, फिर क्यों घट रही हरियाली
बिजनौर। हर साल जिले में 50 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जाते हैं। इसके लिए हर विभाग को अलग-अलग लक्ष्य भी दिया जाता है। इस साल की बात करें तो इस बार वन विभाग समेत सभी विभागों ने 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। पिछले दो दशक पर नजर डालें तो पांच करोड़ से ज्यादा पौधे जिलेभर में लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद जंगल घट रहा है।
जिले में यूं तो हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। हाल ही में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जिले में पिछले दो साल में जंगल का रकबा करीब पांच प्रतिशत घटने की बात कही गई थी। उधर, पौधरोपण पर नजर डालें तो इस बार भी 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पिछले साल यह 65 लाख था। पिछले पांच साल में औसतन हर साल 50 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद घटते जंगल चिंता का विषय है।
दो साल में लगवा दिए 200 बरगद और पीपल
नजीबाबाद। नमो फाउंडेशन ने पर्यावरण मुहिम में बरगद और पीपल के पौधों को अधिक से अधिक रोपित करने का संकल्प लिया है। दो वर्ष के भीतर करीब 200 पौधे रोपित किए जा चुके हैं। नमो फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2018 में हुई। फाउंडेशन के अध्यक्ष सुंदर गोयल, सचिव सुशील राजपूत की पर्यावरण जागरुकता टीम में सम्मिलित पूर्व सैनिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी और पर्यावरण चिंतकों ने पौधों को संरक्षण और संवर्धन देने, अधिक से अधिक पौधे रोपने के लिए जन जागरुकता मिशन संगोष्ठी और पौधरोपण अभियान के माध्यम से शुरू किया। नमो फाउंडेशन ने चार वर्ष के भीतर करीब दो हजार से अधिक वृक्षों के पौधों को रोपित किया है। नजीबाबाद और बिजनौर में लगभग 125 बरगद और 50 से अधिक पीपल के पौधे दो वर्ष के भीतर रोपित किए हैं। फाउंडेशन के पूर्व सैनिक रविंद्र काकरान का कहना है कि बरगद और ऑक्सीजन सबसे अधिक आयु के पौधे हैं। एयर फोर्स से सेवानिवृत्त मनोज कुमार, नेवी से सेवानिवृत्त रविंद्र काकरान और आर्मी से सेवानिवृत्त पवन शर्मा के अतिरिक्त सेवानिवृत्त कर्मचारी पंकज धीमान और मगन सिंह नमो फाउंडेशन के पर्यावरण मिशन में सेतु की तरह काम कर रहे हैं।
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बिजनौर। विक्रांत शर्मा, पेशा जमीन का लेखा-जोखा रखना यानि लेखपाल, तैनाती बिजनौर कलक्ट्रेट। यूं तो सरकारी मुलाजिम हैं लेकिन मुहब्बत प्रकृति से हो गई है। जी हां, विक्रांत शर्मा हर रोज सरकारी ड्यूटी खत्म होने के बाद डेढ़ से दो घंटा पर्यावरण के लिए समय देते हैं। जिन्होंने धरती को हरा भरा रखने का मकसद बना लिया है। विक्रांत शर्मा और उनका ग्रुप सिर्फ पौधा लगाता ही नहीं है बल्कि परवरिश होने तक देखभाल भी करता है।
विक्रांत शर्मा बताते हैं कि उन्हें पौधे लगाने का शौक बचपन से ही रहा है, लेकिन कोरोना काल के वक्त उन्होंने पर्यावरण को सुरक्षित रखने का अपना अभियान और तेज कर दिया। पहले कभी कभार समय मिलने पर कहीं पौधा लगा आते थे, अब हर रोज डेढ़ से दो घंटा का समय पौधरोपण और पौधों की देखभाल में गुजारते हैं। शुरुआत में वे अकेले ही इस काम को अंजाम दिया करते थे अब उनके ग्रुप में पर्यावरण के लिए काम करने वालों की संख्या बढ़कर 20 से अधिक हो गई है। इनमें आठ से दस लोग ऐसे हैं जो हर रोज अपना वक्त प्रकृति के लिए देते हैं।
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जब समझ लिया गया था सफाईकर्मी
विक्रांत शर्मा बताते हैं कि इस काम को करने में कई बार रोचक किस्से भी बने। बताते हैं कि प्रगति विहार में पौधों के सूख जाने की जानकारी मिली। वे कांधे पर फावड़ा रखकर सूखे हुए पौधे की जगह दूसरा लगाने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान प्रगति विहार कॉलोनी में एक सज्जन मिले और बोले, नाली साफ करते हुए जाना। नाली गंदी पड़ी है। हालांकि विक्रांत शर्मा नाली साफ करने के लिए पहुंच गए जो साफ पड़ी थी। विक्रांत शर्मा बताते हैं कि उन्हें सफाई कर्मचारी समझ लिया गया था।
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बना डाला पर्यावरण प्रहरी ग्रुप
शुरुआत में तो विक्रांत शर्मा अकेले ही इस राह पर निकले थे। बाद में कारवां बढ़ता गया। अब बाकायदा पर्यावरण प्रहरी ग्रुप काम कर रहा है, जिसमें अरविंद, हिमांशू सोती, श्याम अग्रवाल, राकेश, अंकित शर्मा, विकास, मंजू आर्या, शिवानी, कुसुमलता, राज नरेंद्र, धर्मेंद आदि काम कर रहे हैं। ट्रिपल सी यानि पानी, पन्नी और पेड़ पर काम कर रहा है।
हर साल होता है पौधरोपण, फिर क्यों घट रही हरियाली
बिजनौर। हर साल जिले में 50 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जाते हैं। इसके लिए हर विभाग को अलग-अलग लक्ष्य भी दिया जाता है। इस साल की बात करें तो इस बार वन विभाग समेत सभी विभागों ने 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। पिछले दो दशक पर नजर डालें तो पांच करोड़ से ज्यादा पौधे जिलेभर में लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद जंगल घट रहा है।
जिले में यूं तो हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। हाल ही में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जिले में पिछले दो साल में जंगल का रकबा करीब पांच प्रतिशत घटने की बात कही गई थी। उधर, पौधरोपण पर नजर डालें तो इस बार भी 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पिछले साल यह 65 लाख था। पिछले पांच साल में औसतन हर साल 50 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद घटते जंगल चिंता का विषय है।
दो साल में लगवा दिए 200 बरगद और पीपल
नजीबाबाद। नमो फाउंडेशन ने पर्यावरण मुहिम में बरगद और पीपल के पौधों को अधिक से अधिक रोपित करने का संकल्प लिया है। दो वर्ष के भीतर करीब 200 पौधे रोपित किए जा चुके हैं। नमो फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2018 में हुई। फाउंडेशन के अध्यक्ष सुंदर गोयल, सचिव सुशील राजपूत की पर्यावरण जागरुकता टीम में सम्मिलित पूर्व सैनिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी और पर्यावरण चिंतकों ने पौधों को संरक्षण और संवर्धन देने, अधिक से अधिक पौधे रोपने के लिए जन जागरुकता मिशन संगोष्ठी और पौधरोपण अभियान के माध्यम से शुरू किया। नमो फाउंडेशन ने चार वर्ष के भीतर करीब दो हजार से अधिक वृक्षों के पौधों को रोपित किया है। नजीबाबाद और बिजनौर में लगभग 125 बरगद और 50 से अधिक पीपल के पौधे दो वर्ष के भीतर रोपित किए हैं। फाउंडेशन के पूर्व सैनिक रविंद्र काकरान का कहना है कि बरगद और ऑक्सीजन सबसे अधिक आयु के पौधे हैं। एयर फोर्स से सेवानिवृत्त मनोज कुमार, नेवी से सेवानिवृत्त रविंद्र काकरान और आर्मी से सेवानिवृत्त पवन शर्मा के अतिरिक्त सेवानिवृत्त कर्मचारी पंकज धीमान और मगन सिंह नमो फाउंडेशन के पर्यावरण मिशन में सेतु की तरह काम कर रहे हैं।