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लॉक डाउन में आयोजित हुई ऑन लाइन काव्य गोष्ठी
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है बाहर कोरोना श्याम पैयां धरूं...
नजीबाबाद। मौलिक स्वर काव्य मंच ने लॉकडाउन के दौरान अखिल भारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से शामिल हुए रचनाकारों ने लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण पर आधारित काव्य रचनाएं प्रस्तुत की।
मौलिक स्वर काव्य मंच के संस्थापक/अध्यक्ष कवि कपिल जैन की ओर से आयोजित ऑनलाइन अखिल भारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में मुजफ्फरनगर की कवयित्री सविता वर्मा की गजल अभी बाहर न आओ श्याम पैयां धरूं/है बाहर कोरोना श्याम पैयां धरूं ..., देहरादून के कवि सत्येंद्र शर्मा रचना भयाक्रांत है जग सारा..., दिल्ली के शिवेंद्र कौशिक की रचना मन की पीड़ा रखकर मन को मैंने बताया.., अजय जैन की रचना जब भी दुश्मन ने सर उठाया है/ हौसलों से हमने उसे मर भगाया है.., रश्मि अग्रवाल की रचना कभी हंसती कभी रूलाती, कितने रूप दिखाती मां.. रचना से ऑन लाइन कवि गोष्ठी में प्रतिभाग किया। वीर रस के कवि कपिल जैन ने अपनी रचना में कहा केवल लहू बहाकर ही तो फर्ज नहीं निभ सकते/ घर के अंदर रहकर भी तो हम सैनिक नहीं बन सकते रचना ऑनलाइन प्रस्तुत की। काव्यगोष्ठी में नीमा शर्मा, दीपिका माहेश्वरी सुमन, रमेश राजहंस, रचना शास्त्री में भी अपनी काव्य रचनाएं मौलिक स्वय काव्य मंच का समक्ष रखीं।
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नजीबाबाद। मौलिक स्वर काव्य मंच ने लॉकडाउन के दौरान अखिल भारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से शामिल हुए रचनाकारों ने लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण पर आधारित काव्य रचनाएं प्रस्तुत की।
मौलिक स्वर काव्य मंच के संस्थापक/अध्यक्ष कवि कपिल जैन की ओर से आयोजित ऑनलाइन अखिल भारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में मुजफ्फरनगर की कवयित्री सविता वर्मा की गजल अभी बाहर न आओ श्याम पैयां धरूं/है बाहर कोरोना श्याम पैयां धरूं ..., देहरादून के कवि सत्येंद्र शर्मा रचना भयाक्रांत है जग सारा..., दिल्ली के शिवेंद्र कौशिक की रचना मन की पीड़ा रखकर मन को मैंने बताया.., अजय जैन की रचना जब भी दुश्मन ने सर उठाया है/ हौसलों से हमने उसे मर भगाया है.., रश्मि अग्रवाल की रचना कभी हंसती कभी रूलाती, कितने रूप दिखाती मां.. रचना से ऑन लाइन कवि गोष्ठी में प्रतिभाग किया। वीर रस के कवि कपिल जैन ने अपनी रचना में कहा केवल लहू बहाकर ही तो फर्ज नहीं निभ सकते/ घर के अंदर रहकर भी तो हम सैनिक नहीं बन सकते रचना ऑनलाइन प्रस्तुत की। काव्यगोष्ठी में नीमा शर्मा, दीपिका माहेश्वरी सुमन, रमेश राजहंस, रचना शास्त्री में भी अपनी काव्य रचनाएं मौलिक स्वय काव्य मंच का समक्ष रखीं।
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