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बिना द्रोण कैसे बनेंगे एकलव्य
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बिना द्रोण कैसे बनेंगे एकलव्य
बिजनौर। मैदान हैं, खिलाड़ी हैं, संसाधनों की भी कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों की प्रतिभाआें को निखारने के लिए कोच ही नहीं हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में द्रोणाचार्यों की कमी के चलते खिलाड़ी एकलव्य की तरह स्वयं ही अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए दन रात पसीना बहा रहे हैं।
नेहरु स्पोर्ट्स स्टेडियम में एथलेटिक्स, हॉकी, वालीबॉल, कबड्डी, फुटबाल, खो-खो, क्रिकेट, बैडमिंटन, शूटिंग, तैराकी, बास्केट बाल सहित कुल दस खेलों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इनमें लगभग 495 खिलाड़ी प्रतिदिन स्टेडियम में सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। इनमें जूनियर वर्ग के 159 और सीनियर वर्ग में 336 खिलाड़ी शामिल हैं। खिलाड़ियों की प्रतिभा तराशने के लिए हर साल खेल विभाग की ओर से अनुबंध के आधार पर अनुभवी कोच की नियुक्ति होती रही है, लेकिन मार्च 2020 में सभी कोच का अनुबंध समाप्त हो गया था। हैरत की बात है कि डेढ़ साल बीतने के बाद भी खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को निखाने के लिए कोच की नियुक्ति की ओर से किसी का ध्यान नहीं है।
स्टेडियत में सिर्फ एथलेटिक्स के जयवीर सिंह ही एकमात्र प्रशिक्षक हैं। शासन से उनकी नियुक्ति उप जिला क्रीड़ा अधिकारी पद पर है, उन्हीं के पास प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी का भी चार्ज है। नियमानुसार हर खेल का प्रशिक्षण देने के लिए कोच नियुक्त होना जरूरी है। यहां पर कुश्ती में धर्मदेव सिंह भाटी, हॉकी में चित्रा चौहान, शूटिंग में सैयद सादिक अनीस, कबड्डी में अंशु चौधरी आदि अंशकालिक प्रशिक्षक खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों के गुर सिखाते थे।
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प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह ने बताया कि वह नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोचों की नियुक्ति कराने के लिए कई बार खेल निदेशालय से पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन डेढ़ साल बाद भी यहां के लिए कोच नसीब नहीं हो पाए।
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बिजनौर। मैदान हैं, खिलाड़ी हैं, संसाधनों की भी कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों की प्रतिभाआें को निखारने के लिए कोच ही नहीं हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में द्रोणाचार्यों की कमी के चलते खिलाड़ी एकलव्य की तरह स्वयं ही अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए दन रात पसीना बहा रहे हैं।
नेहरु स्पोर्ट्स स्टेडियम में एथलेटिक्स, हॉकी, वालीबॉल, कबड्डी, फुटबाल, खो-खो, क्रिकेट, बैडमिंटन, शूटिंग, तैराकी, बास्केट बाल सहित कुल दस खेलों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इनमें लगभग 495 खिलाड़ी प्रतिदिन स्टेडियम में सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। इनमें जूनियर वर्ग के 159 और सीनियर वर्ग में 336 खिलाड़ी शामिल हैं। खिलाड़ियों की प्रतिभा तराशने के लिए हर साल खेल विभाग की ओर से अनुबंध के आधार पर अनुभवी कोच की नियुक्ति होती रही है, लेकिन मार्च 2020 में सभी कोच का अनुबंध समाप्त हो गया था। हैरत की बात है कि डेढ़ साल बीतने के बाद भी खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को निखाने के लिए कोच की नियुक्ति की ओर से किसी का ध्यान नहीं है।
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स्टेडियत में सिर्फ एथलेटिक्स के जयवीर सिंह ही एकमात्र प्रशिक्षक हैं। शासन से उनकी नियुक्ति उप जिला क्रीड़ा अधिकारी पद पर है, उन्हीं के पास प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी का भी चार्ज है। नियमानुसार हर खेल का प्रशिक्षण देने के लिए कोच नियुक्त होना जरूरी है। यहां पर कुश्ती में धर्मदेव सिंह भाटी, हॉकी में चित्रा चौहान, शूटिंग में सैयद सादिक अनीस, कबड्डी में अंशु चौधरी आदि अंशकालिक प्रशिक्षक खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों के गुर सिखाते थे।
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प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर सिंह ने बताया कि वह नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोचों की नियुक्ति कराने के लिए कई बार खेल निदेशालय से पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन डेढ़ साल बाद भी यहां के लिए कोच नसीब नहीं हो पाए।