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Bijnor News: कंडी मार्ग पर बसों के संचालन की फिर जगी आस
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केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने निजी बसों के संचालन की सिफारिश की थी
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय लोगों के बारे में भी सोचने के आदेश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार (कंडी) मार्ग पर बसों के संचालन को लेकर फिर से आस जाग उठी है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने निजी बसों के संचालन की सिफारिश की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सिर्फ जानवरों के बारे में ही नहीं इंसानों के बारे में भी सोचने की बात कही है।
उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल एवं कुमायूं मंडलों को जोड़ने वाला एकमात्र रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार मार्ग है, जो आजादी के पूर्व से चल रहा है। वर्तमान में इस मार्ग पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के कोर जोन का क्षेत्र बना दिया गया है। इसके चलते यहां वन अधिनियम लागू हैं।
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग पर निजी बस संचालन के खिलाफ अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी। इस पर न्यायमूर्ति बीआर गवई ने स्थानीय लोगों के बारे में भी सोचने को कहा है। न्यायालय की सुनवाई से लोगों में फिर से गढ़वाल एवं कुमाऊं को जोड़ने वाले मार्ग पर यातायात संचालित होने की आस जाग उठी है।
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नागरिकों योगेश कुमार सैनी, रईस अहमद, गजेंद्र सिंह, परशुराम आदि का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनता एवं उसके हितों के बारे में सोचा है। मांग की कि इस मार्ग पर पूर्व के समान यातायात संचालित कराया जाना चाहिए। इस मार्ग के चल जाने से जहां दोनों मंडलों के बीच की दूरी कम होगी, वहीं दूसरे राज्यों के राजमार्गों से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा कार्बेट टाइगर रिजर्व को वाहनों के गुजरने से राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय लोगों के बारे में भी सोचने के आदेश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार (कंडी) मार्ग पर बसों के संचालन को लेकर फिर से आस जाग उठी है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने निजी बसों के संचालन की सिफारिश की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सिर्फ जानवरों के बारे में ही नहीं इंसानों के बारे में भी सोचने की बात कही है।
उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल एवं कुमायूं मंडलों को जोड़ने वाला एकमात्र रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार मार्ग है, जो आजादी के पूर्व से चल रहा है। वर्तमान में इस मार्ग पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के कोर जोन का क्षेत्र बना दिया गया है। इसके चलते यहां वन अधिनियम लागू हैं।
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केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कोटद्वार-कालागढ़-रामनगर मोटर मार्ग पर निजी बस संचालन के खिलाफ अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी। इस पर न्यायमूर्ति बीआर गवई ने स्थानीय लोगों के बारे में भी सोचने को कहा है। न्यायालय की सुनवाई से लोगों में फिर से गढ़वाल एवं कुमाऊं को जोड़ने वाले मार्ग पर यातायात संचालित होने की आस जाग उठी है।
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नागरिकों योगेश कुमार सैनी, रईस अहमद, गजेंद्र सिंह, परशुराम आदि का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनता एवं उसके हितों के बारे में सोचा है। मांग की कि इस मार्ग पर पूर्व के समान यातायात संचालित कराया जाना चाहिए। इस मार्ग के चल जाने से जहां दोनों मंडलों के बीच की दूरी कम होगी, वहीं दूसरे राज्यों के राजमार्गों से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा कार्बेट टाइगर रिजर्व को वाहनों के गुजरने से राजस्व की प्राप्ति भी होगी।