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पुरुष नसबंदी में लक्ष्य से कोसों दूर है स्वास्थ्य विभाग

Sun, 02 Feb 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2020 11:30 PM IST
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Health department is far away from the goal in vasectomy
पुरुष नसबंदी में लक्ष्य से कोसों दूर है स्वास्थ्य विभाग
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बिजनौर। लाख कोशिशों के बाद भी जनपद का स्वास्थ्य महकमा नसंबदी के लक्ष्य से कोसों दूर है। सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि देने के बावजूद पुरुष नसबंदी में रुचि नहीं ले रहे हैं। अफसरों के अनुसार अप्रैल से दिसंबर तक शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य 67 के सापेक्ष मात्र 12 पुरुषों ने ही नसबंदी को अपनाया है, जबकि निर्धारित लक्ष्य 1690 की अपेक्षा 248 महिलाओं ने नसबंदी कराकर आबादी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

वर्तमान में जिले की सकल प्रजनन दर 3.2 प्रतिशत है। इसके हिसाब से हर साल जिले में करीब ढाई लाख बच्चे पैदा होते हैं, जो बेहद ही चिंता का विषय है। इसी सकल दर में बिजनौर समेत 57 जिले सम्मिलित हैं। शासन ने इसके लिए एक साल में सकल प्रजनन दर 2.3 प्रतिशत करने लक्ष्य दिया है। अफसरों के अनुसार वर्तमान में जिले की कुल आबादी करीब 40 लाख के आसपास है। जिले की सकल प्रजनन दर 3.2 प्रतिशत है। इसके अलावा प्रदेश के 57 अन्य जिलों की भी कमोबेश यही स्थिति है, जबकि 18 अन्य जनपदों की स्थिति सामान्य है। शासन द्वारा सकल प्रजनन दर 2.3 प्रतिशत निर्धारित है। देश की तरक्की में जनसंख्या वृद्धि सबसे बड़ी बाधक मानी जाती है। सरकार इसे कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। जिले की सकल प्रजनन दर 3.2 है। जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम के अपर शोध अधिकारी राजकुमार वर्मा के अनुसार वर्तमान में जिले की कुल जनसंख्या लगभग 39 लाख 62 हजार 892 है। इनमें छह लाख 26 हजार 262 दंपती शामिल हैं, जबकि 15 से 49 साल के लोगों का आंकड़ा करीब दस लाख के आसपास है। उन्होंने बताया कि जिले की सकल प्रजनन दर को नियंत्रित करने के लिए शासन द्वारा हर साल पुरुष और महिला नसबंदी के लिए लक्ष्य निर्धारित करती है, जिससे आबादी को नियंत्रित किया जा सके। नसबंदी कराने वाले पुरुष को तीन और महिला को दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अगर महिला प्रसव के एक सप्ताह के भीतर अपनी नसबंदी कराए तो उसे भी तीन हजार रुपये ही मिलते हैं। इसके बाद नसबंदी कराने वाली महिला को दो हजार रुपये दिए जाते हैं, जिससे शासन द्वारा निर्धारित प्रजनन दर को 2.3 पर लाया जा सके। बताया कि अप्रैल से दिसंबर तक शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य 67 के सापेक्ष मात्र 12 पुरुषों ने ही नसबंदी को अपनाया है, जबकि निर्धारित लक्ष्य 1690 की अपेक्षा 248 महिलाओं ने नसबंदी कराकर आबादी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है।
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