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हाथीशाला में हथिनी गंगा की मौत
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कालागढ़ की हाथी शाला में मृत पड़ी हथिनी गंगा।
- फोटो : DHAMPUR
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हाथीशाला में हथिनी गंगा की मौत
कालागढ़ (बिजनौर)। कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी की मौत हो गई। गंगा का उपचार वन विभाग के पशु चिकित्सक कर रहे थे। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट में संक्रमण से मौत होना सामने आया है। उसका बिसरा फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
कालागढ़ स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी का उपचार चल रहा था। वह पेट की बीमारी से ग्रसित थी। उसकी उम्र करीब 8 वर्ष थी। बुधवार की रात में अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। हाथीशाला में चिकित्सक आयुष कुमार पहुंच गए। बाद में रामनगर से डॉ. राजीव कुमार भी पहुंच गए। पशु चिकित्साधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों व एनजीओ के सदस्यों की उपस्थिति में गंगा के शव की जांच की। उसे मृत घोषित करने के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम किया गया। बाद में विभागीय नियमों के अनुसार उसका भीगीं पलकों से अंतिम संस्कार किया गया। गंगा की मौत से वन विभाग में उदासी का माहौल है।
पेट की बीमारी बनी मौत का कारण
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि गंगा पेट की बीमारी से पीड़ित थी। उसका उपचार किया जा रहा था। बुधवार की रात्रि में उसके पेट में दर्द हुआ। चिकित्सकों के प्रयासों के बाद भी उसे बचाया न जा सका। चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के बाद बताया कि उसके पेट में संक्रमण बढ़ गया था। रक्तस्राव ने उसकी जान ले ली। उसकी मौत से कालागढ़ की हाथीशाला के अलावा समूचे कार्बेट में दु:ख का माहौल है।
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कालागढ़ (बिजनौर)। कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी की मौत हो गई। गंगा का उपचार वन विभाग के पशु चिकित्सक कर रहे थे। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट में संक्रमण से मौत होना सामने आया है। उसका बिसरा फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
कालागढ़ स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला में गंगा हथिनी का उपचार चल रहा था। वह पेट की बीमारी से ग्रसित थी। उसकी उम्र करीब 8 वर्ष थी। बुधवार की रात में अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। हाथीशाला में चिकित्सक आयुष कुमार पहुंच गए। बाद में रामनगर से डॉ. राजीव कुमार भी पहुंच गए। पशु चिकित्साधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों व एनजीओ के सदस्यों की उपस्थिति में गंगा के शव की जांच की। उसे मृत घोषित करने के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम किया गया। बाद में विभागीय नियमों के अनुसार उसका भीगीं पलकों से अंतिम संस्कार किया गया। गंगा की मौत से वन विभाग में उदासी का माहौल है।
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पेट की बीमारी बनी मौत का कारण
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि गंगा पेट की बीमारी से पीड़ित थी। उसका उपचार किया जा रहा था। बुधवार की रात्रि में उसके पेट में दर्द हुआ। चिकित्सकों के प्रयासों के बाद भी उसे बचाया न जा सका। चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के बाद बताया कि उसके पेट में संक्रमण बढ़ गया था। रक्तस्राव ने उसकी जान ले ली। उसकी मौत से कालागढ़ की हाथीशाला के अलावा समूचे कार्बेट में दु:ख का माहौल है।
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