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Bijnor News: हेडिंग - गुलदार ने बदला स्वभाव, पर इरादा नहीं बदलेगा वन विभाग

Mon, 01 May 2023 12:49 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 01 May 2023 12:49 AM IST
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Guldar changed nature, but forest department will not change its intention
अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव शाहपुर जमाल में गुलदार के द्वारा मारी गई गाय का निरीक्षण करते वन अधिकार
- गुलदार ने गाय का शिकार कर खाया करीब पांच किलो मांस
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- शिकार के पास वन विभाग ने बनाई मचान, ट्रैंक्यूलाइज टीम तैनात
फोटो समाचार
रजनीश त्यागी
बिजनौर। रेहड़ में चार लोगों की जान लेने वाला गुलदार स्वभाविक शिकार पर लौट आया है। एक तरफ जहां वहां के लोगों के लिए राहतभरी खबर है, वहीं उसे पकड़ने में जुटी टीम के लिए उम्मीद जगी है। ट्रैंक्यूलाइज टीम और वन अफसरों ने मचान बनाकर गुलदार का इंतजार कर दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो गुलदार या तो आसपास ही है या फिर दो से तीन दिन में वापिस अपने शिकार को लेने पहुंचेगा।
पिछले पांच दिनों से वन अफसर और ट्रैंक्यूलाइज टीम के करीब 40 सदस्य चार लोगों की जान लेने वाले गुलदार की तलाश में जुटे हुए हैं। 20 ट्रैक कैमरे और छह पिंजरों की मदद से गुलदार को ट्रेस कर पकड़ने की तैयारी थी, लेकिन गुलदार इनसे कहीं आगे चल रहा है। हालांकि वन अफसर गुलदार द्वारा एक गलती का इंतजार कर रहे थे, जो रविवार को हो गई। गुलदार ने शाहपुर जमाल में एक गाय का शिकार किया। उसका करीब चार से पांच किलो मीट भी खा लिया। विशेषज्ञों ने पग मार्क की जांच तो पता चला कि यह वही गुलदार था, जो पहले इंसानों पर हमले कर रहा था। अब पूरी टीम उस शिकार के आसपास छिपकर गुलदार का इंतजार करने में जुट गई है।
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वहां एक मचान बनाकर ट्रैंक्यूलाइज टीम तैनात कर दी गई है। वहीं, पिंजरों को भी उसके आसपास लगा दिया गया। वन्य जीव विशेषज्ञों की मानना है कि गुलदार अपने शिकार पर दोबारा लौटकर आएगा, तभी उसके ट्रैंक्यूलाइज कर दिया जाएगा। इसमें अभी दो से तीन दिन का समय लग सकता है। वहीं गुलदार के स्वभाविक शिकार पर लौटने पर कुछ राहत भी महसूस की है।
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एक बार खाकर चार से पांच दिन बिता सकता है गुलदार : एसडीओ
एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि भले ही वन विभाग को गुलदार के शिकार पर लौटने की पूरी उम्मीद हो, लेकिन विशेषज्ञों का एक तर्क परेशान कर रहा है। माना जाता है गुलदार चार से पांच किलो मांस खाने के बाद चार से पांच दिन ही आराम से बिता लेता है। इसके बाद उसे दोबारा भूख लगती है। ऐसे में उसे वापिस आने में दो से तीन दिन तो लग ही सकते हैं। यदि ऐसे में गुलदार ने यदि वहां खतरा भांप लिया तो वह वहां नहीं आएगा। एक अंदेशा यह भी है कि मुंह में या दांत में जख्म होने के कारण वह शुरुआत में इंसानी शिकार पर आ गया तो, लेकिन अब वह ठीक हो रहे हैं।


पहले पिंजरे में फंस चुका है, इसलिए पिंजरे को पहचानता है गुलदार
रेहड़ में हमलावर हुए गुलदार को लेकर वन विशेषज्ञों का एक मत यह भी है कि अमानगढ़ में अकेले बिजनौर जिले से ही दस गुलदार छोड़े जा चुके हैं, वहीं अमरोहा, बरेली समेत दूसरी जगहों से लाकर भी यहां पांच गुलदार छोड़े गए। इसी साल में कुल 15 गुलदार अमानगढ़ के जंगल में छोडे़ गए। ये सभी पिंजरे में ही फंसे थे और निकलने को खूब छटपटाए भी थे। ऐसे में ये गुलदार पिंजरे को पहचान चुके हैं और इसी में उनके मुंह में भी चोट आने की आशंका है। अमानगढ़ में बाघों के डर से किसी गुलदार के जंगल से बाहर आने की आशंका भी है। एक बार पिंजरे में फंसने वाला गुलदार दोबारा पिंजरे में आसानी से नहीं जाता। इसलिए ही वह अभी तक किसी पिंजरे के पास तक नहीं गया।
---------- कोट
गुलदार ने जो गाय मारी है, उसके आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। मचान बनाकर गुलदार का इंतजार किया जा रहा है। हमारी सभी टीम उसकी तलाश में जुटी है। उसे शीघ्र पकड़ने के प्रयास हो रहे हैं - अरुण सिंह, डीएफओ बिजनौर

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गुलदार जब बड़ा शिकार करता है तो उसे उठाकर नहीं ले जा पाता। पशु चिकित्सकों के मुताबिक उसने करीब चार से पांच किलो गाय का मांस खा लिया है। ऐसे में वह दोबारा भूख लगने पर उसी जगह आएगा, ऐसी उम्मीद है। हमारी टीमें उसे ट्रैंक्यूलाइज करके पकड़ने के लिए तैयार हैं - अंशुमान मित्तल, एसडीओ बिजनौर
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