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कांवड़ में दादी की अस्थियों और दादा को ला रहा पवन
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:08 AM IST
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भागूवाला में श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति से प्रेरित सीतापुर का पवन कुमार कांवड़ लेकर धर्मस्थलों के दर्शन के लिए निकला है। उसकी कांवड़ में गंगाजल नहीं, बल्कि 103 वर्षीय दादा और 15 वर्ष पहले स्वर्ग सिधार चुकी दादी की अस्थियां हैं। पवन दादा को तीर्थनगरी हरिद्वार सहित विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कराने के अभियान पर निकला है।
कंधे पर कांवड़, कांवड़ में 103 वर्षीय दादा, दूसरी ओर दादी की अस्थियां लिये पवन कुमार शुक्रवार को भागूवाला पहुंचा तो उसका क्षेत्रवासियों ने स्वागत किया। पवन के साथ उसके पिता नरेश और एक सहयोगी बैथूला हैं। पवन ने बताया कि उसने अपने दादा को तीर्थनगरी हरिद्वार, गोला गोकर्णनाथ सहित चार धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराने का संकल्प लिया था।
पवन कहता है कि जब उसकी दादी का स्वर्गवास हुआ था, वह मात्र आठ वर्ष का था। पिता एवं दादा की इच्छा दादी की अस्थियों को हरिद्वार में प्रवाहित करने की थी। इस काम को वे पूरा नहीं कर पाए। परिवार ने कुछ वर्ष पहले दादा को कांवड़ के साथ तीर्थस्थलों का भ्रमण कराने और दादी की अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित कराने का संकल्प लिया था। दो अक्तूबर को वह सीतापुर के गांव चांदपुर से यात्रा पर निकला था। उसके साथ एक अन्य साथी है।
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कंधे पर कांवड़, कांवड़ में 103 वर्षीय दादा, दूसरी ओर दादी की अस्थियां लिये पवन कुमार शुक्रवार को भागूवाला पहुंचा तो उसका क्षेत्रवासियों ने स्वागत किया। पवन के साथ उसके पिता नरेश और एक सहयोगी बैथूला हैं। पवन ने बताया कि उसने अपने दादा को तीर्थनगरी हरिद्वार, गोला गोकर्णनाथ सहित चार धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराने का संकल्प लिया था।
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पवन कहता है कि जब उसकी दादी का स्वर्गवास हुआ था, वह मात्र आठ वर्ष का था। पिता एवं दादा की इच्छा दादी की अस्थियों को हरिद्वार में प्रवाहित करने की थी। इस काम को वे पूरा नहीं कर पाए। परिवार ने कुछ वर्ष पहले दादा को कांवड़ के साथ तीर्थस्थलों का भ्रमण कराने और दादी की अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित कराने का संकल्प लिया था। दो अक्तूबर को वह सीतापुर के गांव चांदपुर से यात्रा पर निकला था। उसके साथ एक अन्य साथी है।
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