{"_id":"5ec01d928ebc3e90701b88a8","slug":"government-ambulance-not-provided-to-laborers-bijnor-news-mrt4820663127","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजदूर को उपलब्ध नहीं कराई गई सरकारी एंबुलेंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूर को उपलब्ध नहीं कराई गई सरकारी एंबुलेंस
विज्ञापन
मजदूर को उपलब्ध नहीं कराई गई सरकारी एंबुलेंस
बिजनौर। लगभग एक सप्ताह पूर्व झारखंड की राजधानी रांची में ट्रक पलटने से गंभीर रूप से घायल हुए पांच मजदूरों और दो मृतक मजदूरों के परिवारों की स्वास्थ्य विभाग ने कोई सुध नहीं दी है। घायल मजदूरों के परिजन इलाज के लिए दर दर भटक रहे हैं। एक घायल मजदूर की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल से मेरठ ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों को चार हजार रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस से उसे मेरठ ले जाना पड़ा।
नजीबाबाद थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत जालबपुर गूदड़ के अंतर्गत गांव खुशहालपुर मड़का निवासी छह और कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के गांव बेगमपुर शादी का रहने वाला एक मजदूर झारखंड की राजधानी रांची में किसी ठेकेदार के साथ बिजली का काम करने गए थे। करीब एक सप्ताह पूर्व सभी सातों मजदूर ट्रक से वहां से लौट रहे थे। रांची में ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया था। दुर्घटना में खुशहालपुर मड़का निवासी रोहित, गांव बेगमपुर शादी निवासी पवन की मौत हो गई थी। खुशहालपुर मड़का निवासी चंद्रपाल, चमन, विक्की, प्रेम, शिवा घायल हो गए थे। 60 हजार रुपये में एंबुलेंस से मजदूर अपने घरों को पहुंचे। ग्राम प्रधान पति का आरोप है कि नजीबाबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सर्वेश निराला को इस बारे में अवगत कराया गया, लेकिन उन्होंने मजदूरों की सुध नहीं ली। बेबस पिता सुनील अपने गंभीर रूप से घायल पुत्र शिवा को बाइक से ही जिला अस्पताल ले गया। वहां से चिकित्सकों ने उसे मेरठ रेफर कर दिया, लेकिन जिला अस्पताल से सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई। आर्थिक रूप से टूटा सुनील चार हजार रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस करके मेरठ गया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उसे जॉलीग्रांट ले जाने की सलाह दी। सुनील ने बताया कि उसकी पत्नी ने 15 हजार रुपये का कर्ज लिया और पुत्र को जॉली ग्रांट लेकर पहुंचे। इस संबंध में सीएमएस ज्ञानचंद ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यह देखना पड़ेगा कि उस दिन किस चिकित्सक की ड्यूटी थी और किस कारण से मजदूर को सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली। इसमें जो भी चिकित्सक दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बिजनौर। लगभग एक सप्ताह पूर्व झारखंड की राजधानी रांची में ट्रक पलटने से गंभीर रूप से घायल हुए पांच मजदूरों और दो मृतक मजदूरों के परिवारों की स्वास्थ्य विभाग ने कोई सुध नहीं दी है। घायल मजदूरों के परिजन इलाज के लिए दर दर भटक रहे हैं। एक घायल मजदूर की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल से मेरठ ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों को चार हजार रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस से उसे मेरठ ले जाना पड़ा।
नजीबाबाद थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत जालबपुर गूदड़ के अंतर्गत गांव खुशहालपुर मड़का निवासी छह और कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के गांव बेगमपुर शादी का रहने वाला एक मजदूर झारखंड की राजधानी रांची में किसी ठेकेदार के साथ बिजली का काम करने गए थे। करीब एक सप्ताह पूर्व सभी सातों मजदूर ट्रक से वहां से लौट रहे थे। रांची में ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया था। दुर्घटना में खुशहालपुर मड़का निवासी रोहित, गांव बेगमपुर शादी निवासी पवन की मौत हो गई थी। खुशहालपुर मड़का निवासी चंद्रपाल, चमन, विक्की, प्रेम, शिवा घायल हो गए थे। 60 हजार रुपये में एंबुलेंस से मजदूर अपने घरों को पहुंचे। ग्राम प्रधान पति का आरोप है कि नजीबाबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सर्वेश निराला को इस बारे में अवगत कराया गया, लेकिन उन्होंने मजदूरों की सुध नहीं ली। बेबस पिता सुनील अपने गंभीर रूप से घायल पुत्र शिवा को बाइक से ही जिला अस्पताल ले गया। वहां से चिकित्सकों ने उसे मेरठ रेफर कर दिया, लेकिन जिला अस्पताल से सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई। आर्थिक रूप से टूटा सुनील चार हजार रुपये में प्राइवेट एंबुलेंस करके मेरठ गया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उसे जॉलीग्रांट ले जाने की सलाह दी। सुनील ने बताया कि उसकी पत्नी ने 15 हजार रुपये का कर्ज लिया और पुत्र को जॉली ग्रांट लेकर पहुंचे। इस संबंध में सीएमएस ज्ञानचंद ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यह देखना पड़ेगा कि उस दिन किस चिकित्सक की ड्यूटी थी और किस कारण से मजदूर को सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली। इसमें जो भी चिकित्सक दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन