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आम के पेड़ों पर बौर देख बागवान उत्साहित
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बिजनौर में बौर से लदा आम का पेड़।
- फोटो : BIJNOR
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आम के पेड़ों पर बौर देख बागवान उत्साहित
बिजनौर। इस बार आम के पेड़ों पर बौर बहुत अच्छा आया है। बौर की अधिकता होने से पेड़ की टहनियां झुक रही हैं। पेड़ों पर आए आम के बौर को देखते हुए इस बार आम की पैदावार बहुत होने की उम्मीद है। उद्यान विभाग के अधिकारी आम की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए बौर को सुरक्षित रखने की सलाह दे रहे हैं।
जनपद में गन्ना मुख्य फसल है, लेकिन यहां आम के बहुत बाग हैं। करीब 154 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले बागों के आम खाड़ी देश तक पहुंचते हैं। जिले में मंडावर, किरतपुर, नांगलसोती आदि क्षेत्र में आम के ज्यादा बाग हैं। अभी तक आम के बाग बौर से भरे पड़े हैं। फसल को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए उचित समय पर प्रबंधन किया जाता है। आम के बौर में लगने वाले मिज कीट मंजरियों, तुरंत बने फूलों एवं फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अंडे देते हैं। जिसकी सूड़ी अंदर ही अंदर खाकर क्षति पहुंचाती है।
मिज कीट की रोकथाम को करें छिड़काव
उद्यान विभाग के अनुसार मिज कीट के नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है कि बागों की जुताई, गुड़ाई की जाए। इसके लिए फेनिट्रोथियान 50 ईसी, 1.0 मिली अथवा डायमेथोएट 30 ईसी, 2.0 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर बौर निकलने की अवस्था पर एक छिड़काव एवं आवश्यकतानुसार 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करना चाहिए। उद्यान विभाग के अधिकारी के अनुसार वर्तमान में काफी बाग में बौर से छोटा-छोटा आम बनने लगा है। इस समय फलों को गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स 4.4 मिली प्रति 10 लीटर के अनुपात से छिड़काव तथा फंगल इंफेक्शन के प्रभाव को कम करने के लिए हेक्सागोन 1.5 मिली प्रति उक्त मात्रा में ही छिड़काव हुआ।
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इस बार आम के बागों में अच्छा बौर आया है। इसे विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर विभाग की ओर से सलाह व दवाइयां तथा किस मात्रा में छिड़काव करना है आदि के बारे में बताया जाता है। साथ ही यहां के आम को अच्छा बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है - जितेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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बिजनौर। इस बार आम के पेड़ों पर बौर बहुत अच्छा आया है। बौर की अधिकता होने से पेड़ की टहनियां झुक रही हैं। पेड़ों पर आए आम के बौर को देखते हुए इस बार आम की पैदावार बहुत होने की उम्मीद है। उद्यान विभाग के अधिकारी आम की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए बौर को सुरक्षित रखने की सलाह दे रहे हैं।
जनपद में गन्ना मुख्य फसल है, लेकिन यहां आम के बहुत बाग हैं। करीब 154 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले बागों के आम खाड़ी देश तक पहुंचते हैं। जिले में मंडावर, किरतपुर, नांगलसोती आदि क्षेत्र में आम के ज्यादा बाग हैं। अभी तक आम के बाग बौर से भरे पड़े हैं। फसल को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए उचित समय पर प्रबंधन किया जाता है। आम के बौर में लगने वाले मिज कीट मंजरियों, तुरंत बने फूलों एवं फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अंडे देते हैं। जिसकी सूड़ी अंदर ही अंदर खाकर क्षति पहुंचाती है।
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मिज कीट की रोकथाम को करें छिड़काव
उद्यान विभाग के अनुसार मिज कीट के नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है कि बागों की जुताई, गुड़ाई की जाए। इसके लिए फेनिट्रोथियान 50 ईसी, 1.0 मिली अथवा डायमेथोएट 30 ईसी, 2.0 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर बौर निकलने की अवस्था पर एक छिड़काव एवं आवश्यकतानुसार 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करना चाहिए। उद्यान विभाग के अधिकारी के अनुसार वर्तमान में काफी बाग में बौर से छोटा-छोटा आम बनने लगा है। इस समय फलों को गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स 4.4 मिली प्रति 10 लीटर के अनुपात से छिड़काव तथा फंगल इंफेक्शन के प्रभाव को कम करने के लिए हेक्सागोन 1.5 मिली प्रति उक्त मात्रा में ही छिड़काव हुआ।
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इस बार आम के बागों में अच्छा बौर आया है। इसे विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर विभाग की ओर से सलाह व दवाइयां तथा किस मात्रा में छिड़काव करना है आदि के बारे में बताया जाता है। साथ ही यहां के आम को अच्छा बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है - जितेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी