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मानवाधिकार अधिकारी बन रुपये ऐंठने वाले चार आरोपी दबोचे

Thu, 15 Aug 2019 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Aug 2019 12:00 AM IST
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Four accused arrested for extorting money to become human rights officers
बिजनौर में पकड़े गए राष्ट्रीय मानवाधिकार नियंत्रण के अधिकारी बन रुपये ऐंठने वाले आरोपियों के बा - फोटो : BIJNOR
बिजनौर। राष्ट्रीय मानवाधिकार नियंत्रण एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के फर्जी अध्यक्ष व अधिकारी बनकर मेडिकल स्टोर व दुकानदारों से रुपये ऐंठने वाले चार लोगों को दबोचा है। आरोपियों के पास से कई आईडी व वॉकी टॉकी तक मिली है।
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एसपी संजीव त्यागी ने बताया कि सूत्रों से पता चला था कि एक गिरोह के सदस्य राष्ट्रीय मानवाधिकार नियंत्रण एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के फर्जी अधिकारी बनकर मेडिकल स्टोर व दुकानों की चेकिंग के नाम पर धन की उगाही कर रहे हैं। इस गैंग में कुछ लोग जिले के व कुछ लोग बाहर के हैं। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को इस फर्जी टीम को पकड़ने के निर्देश दिए। 14 अगस्त को शहर कोतवाल रमेशचंद्र शर्मा रेंडम चेकिंग के दौरान सूचना पर सिविल लाइन स्थित होटल रोहित रेजिडेंस पहुंचे। वहां एक बोलेरो गाड़ी में चार व्यक्ति बैठे हुए थे। गाड़ी के आगे व पीछे के शीशे पर चेयरमैन राष्ट्रीय मानवाधिकार नियंत्रण ब्यूरो व अपराध नियंत्रण ब्यूरो लिखा था तथा हूटर व सायरन लगे थे। पुलिस ने चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उनमें से मोहित रोनियार ने खुद को राष्ट्रीय मानवाधिकार नियंत्रण ब्यूरो एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बताया। यह पद पीसीएस रैंक के अधिकारी के पास रहता है।
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मोहित रोनियार गोरखपुर के शाहपुर थानाक्षेत्र का रहने वाला है। किशन कुमार निवासी कुशीनगर ने अपने को जिला कार्यकारी अधिकारी, बिजनौर के गांव बवनपुरा निवासी राधेश्याम ने खुद को दोनों का सुरक्षा गार्ड व बिजनौर के गांव जमालपुर पठानी निवासी यशपाल ने खुद को गाड़ी चालक बताया। पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की तो वे अपने पद के विभाग के बारे में ठीक से जवाब नहीं दे सके। तलाशी में उनके पास से नौ विरोधाभासी आईडी मिलीं। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी बेरोजगार थे। इसलिए वे अपने क्षेत्र को छोड़कर ब्यूरो के अध्यक्ष व कार्यकारी अधिकारी बनकर फर्जी परिचय पत्र से कानून व अपने पद का प्रभाव दिखाकर मेडिकल स्टोर व दुकानदारों से धन ऐंठते थे। उन्होंने यशपाल व राधेश्याम को लोकल होने के कारण अपने साथ मिलाया था। आरोपियों को पकड़ने वाली टीम में शहर कोतवाल रमेशचंद्र शर्मा, एसआई संजीव कुमार व दीपा त्यागी, कांस्टेबल बहुरन, भूदेव, प्रवेश कुमारी, उर्मिला आदि शामिल रहे।
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पूरी तैयारी से करते थे छापेमारी
आरोपी पूरी तैयारी से छापेमारी करते थे। राधेश्याम पीआरडी की वर्दी में गार्ड के रूप में साथ रहता था। इसके अलावा आरोपियों ने वॉकी टॉकी भी ले रखा था। इससे बात करके दुकानदारों पर रौब जमाते थे। राधेश्याम को प्रतिदिन एक हजार रुपये तथा गाड़ी चालक यशपाल सिंह को तीन हजार रुपये देते थे।
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