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Bijnor News: बाघिन की तलाश में वन अफसरों ने की कांबिंग
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- वन विभाग बाघिन के जंगल में लौटने की जता रहा संभावना
- आज कहीं नजर नहीं आए पगचिन्ह, कैमरे में भी नहीं दिखी तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी
अफजलगढ़/रेहड़। गांव हर्रावाला में बाघिन को लेकर वन विभाग लगातार कांबिंग कर रहा है। हालांकि विभाग का मानना है कि बाघिन यहां से कही दूर जा चुका है। उसके ताजे पगचिह्न कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि बाघिन खेतों में ही कहीं छिपी है।
गांव अमानगर हर्रावाला व भगतावाला में वन विभाग ने गन्ने के खेतों सहित आसपास के खेतों में बाघिन की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान चलाया। इसके बाद बाघिन को पकड़ने के लिए पिंजरा और ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। वहीं, वन विभाग की टीम ने कांबिंग अभियान चलाया और ड्रोन कैमरे से भी तलाशने का प्रयास किया, किंतु बाघिन का कहीं पता नहीं चला। पांच दिन बीतने के बाद भी बाघिन न तो पिंजरे की ओर आई ओर न ही उसकी कोई अन्य गतिविधि नजर आई। जबकि बाघिन के पगचिह्न बनैली नदी की ओर जाते मिले। जिसके बाद वन विभाग यह मानकर चल रहा है कि बाघिन जिस स्थान से आई थी। हो सकता है कि उसी ओर चली गई हो।
ग्रामीण अपनी सुरक्षा स्वयं करते हुए खेतों पर काम करने को मजबूर हैं। ग्रामीण धीरेंद्र शेखावत, विजेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, भीम सिंह, प्रवीन, बलबीर सिंह, पुखराज, अरविंद व कलवा आदि का कहना है कि वन विभाग का कोई भी कर्मचारी दिन में खेत की ओर नहीं जाता है।
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नगीना रेंजर नगीना प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि बाघ की मौजूदगी वाले एवं आसपास के खेत सहित क्षेत्र में वन कर्मी लगातार कांबिंग कर रहे हैं। हालांकि पिछले चार दिन से बाघ प्रभावित क्षेत्र में बाघ का कोई नया पगमार्क नहीं मिला है। लेकिन एहतियात के लिए निरंतर कांबिंग की जा रही है। दोनों पिंजरों में रोज शाम को बकरी बांधी जा रही है। कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं।
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- आज कहीं नजर नहीं आए पगचिन्ह, कैमरे में भी नहीं दिखी तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी
अफजलगढ़/रेहड़। गांव हर्रावाला में बाघिन को लेकर वन विभाग लगातार कांबिंग कर रहा है। हालांकि विभाग का मानना है कि बाघिन यहां से कही दूर जा चुका है। उसके ताजे पगचिह्न कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि बाघिन खेतों में ही कहीं छिपी है।
गांव अमानगर हर्रावाला व भगतावाला में वन विभाग ने गन्ने के खेतों सहित आसपास के खेतों में बाघिन की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान चलाया। इसके बाद बाघिन को पकड़ने के लिए पिंजरा और ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। वहीं, वन विभाग की टीम ने कांबिंग अभियान चलाया और ड्रोन कैमरे से भी तलाशने का प्रयास किया, किंतु बाघिन का कहीं पता नहीं चला। पांच दिन बीतने के बाद भी बाघिन न तो पिंजरे की ओर आई ओर न ही उसकी कोई अन्य गतिविधि नजर आई। जबकि बाघिन के पगचिह्न बनैली नदी की ओर जाते मिले। जिसके बाद वन विभाग यह मानकर चल रहा है कि बाघिन जिस स्थान से आई थी। हो सकता है कि उसी ओर चली गई हो।
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ग्रामीण अपनी सुरक्षा स्वयं करते हुए खेतों पर काम करने को मजबूर हैं। ग्रामीण धीरेंद्र शेखावत, विजेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, भीम सिंह, प्रवीन, बलबीर सिंह, पुखराज, अरविंद व कलवा आदि का कहना है कि वन विभाग का कोई भी कर्मचारी दिन में खेत की ओर नहीं जाता है।
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नगीना रेंजर नगीना प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि बाघ की मौजूदगी वाले एवं आसपास के खेत सहित क्षेत्र में वन कर्मी लगातार कांबिंग कर रहे हैं। हालांकि पिछले चार दिन से बाघ प्रभावित क्षेत्र में बाघ का कोई नया पगमार्क नहीं मिला है। लेकिन एहतियात के लिए निरंतर कांबिंग की जा रही है। दोनों पिंजरों में रोज शाम को बकरी बांधी जा रही है। कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं।