फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Five years ago, gangsters had infiltrated the sugarcane fields.

Bijnor News: पांच साल पहले गन्ने के खेतों में घुसपैठ कर गए थे गुलदार

Mon, 27 Nov 2023 11:11 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Nov 2023 11:11 PM IST
विज्ञापन
Five years ago, gangsters had infiltrated the sugarcane fields.
बढ़ापुर के ग्राम धर्मूवाला में पिंजरे में कैद हुआ गुलदार।
- वर्ष 2019 में चंदक-किरतपुर क्षेत्र में पांच लोगों को गुलदार ने मारा था
विज्ञापन

- पिछले तीन साल से लगातार पकड़े जा रहे हैं गुलदार





रजनीश त्यागी

बिजनौर। इस साल गुलदार जिले के लिए किसी आपदा से कम नहीं रहा। जहां 17 लोगों की जान गुलदार के हमलों में चली, वहीं 42 गुलदार वन विभाग को मिले। वन विभाग से लेकर वन विशेषज्ञ इस बात से परेशान हैं कि अचानक जिले में गुलदार कहां से आ गए। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह एक या दो साल में नहीं हुआ, बल्कि पिछले पांच साल से गुलदार गन्ने के खेतों को ठिकाना बनाने में लगे हुए थे। वर्ष 2019 में किरतपुर-चंदक क्षेत्र में गुलदार के हमलों में पांच लोगों की जान चली गई थी। पिछले तीन साल से लगातार गुलदार पकड़े जा रहे हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। पांच साल पहले जंगल से आबादी की ओर आए गुलदारों के बच्चों से गन्ने के खेतों में नई पीढ़ी तैयार हो गई। इस नई पीढ़ी ने इस साल खूब तबाही मचाई। वर्ष 2021 में तीन गुलदार अगल-अलग जगहों से पकड़े गए। साल 2022 में यहां पकड़े गए गुलदारों की संख्या तक तक पहुंच गई।

बदले व्यवहार में उलझ रहे वन विशेषज्ञ
ऐसा पहली बार ही हुआ है कि वन विभाग और वन विशेषज्ञों का सामना गन्ने के खेतों में पले-बढ़े हुए गुलदारों से हो रहा है। अब तक गुलदार के व्यवहार का आंकलन जंगल के आधार पर होता था। जब इस साल गुलदार नरभक्षी हुए तो विशेषज्ञ भी खूब परेशान नजर आए। जहां जाल बिछाया जाता, गुलदार उससे दो कदम आगे ही रहता। लगातार योजनाएं बनाने के बावजूद इस साल एक के बाद एक 17 इंसानों की जान चली गई। अब वन विशेषज्ञों ने दोबारा से गन्ने के खेतों के गुलदार के व्यवहार पर शोध शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा अब गुलदार आसान शिकार करना पसंद करने लगे हैं। खेतों में उनके लिए आसान शिकार भी भरपूर है। इस कारण उनका वजन भी औसत से ज्यादा बढ़ने लगा है। इस साल जो गुलदार पकड़े गए, उनमें 90 किलोग्राम वजन तक के गुलदार शामिल हैं। जबकि इनका औसत वजन 60 किलोग्राम तक ही माना जाता रहा है।
विज्ञापन


अब झुंड में दिखने लगे हैं गुलदार
आमतौर पर अभी तक माना जाता था कि गुलदार झुंड में नहीं रहते। मादा गुलदार अकेले ही अपने बच्चों को पालती है। इस साल ऐसे कई बार सामने आया, जब लोगों ने एक नीलगाय और निराश्रित गोवंश के पीछे एक से ज्यादा गुलदार दौड़ते देखे। गन्ने के खेतों में रह रहे गुलदार झुंड में मिलकर शिकार करने लगे हैं। ट्रैप कैमरों में इसकी तस्वीरे भी कैद हुई, जिसमें दो गुलदार एक साथ दिख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गन्ने के जंगल का राजा बन बैठा गुलदार
जिले की भोगोलिक स्थिति की बात करें तो 70 किलोमीटर से ज्यादा सीमा उत्तराखंड के रिजर्व फॉरेस्ट से लगी हुई है। जिले में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना हो रहा है। ऐसे में गुलदार जंगल से निकले तो उन्हें छिपने, रहने के लिए गन्ने के खेत मिल गए। रिजर्व फॉरेस्ट में गुलदार को सबसे ज्यादा डर बाघ का होता है। आमना-सामना होने पर बाघ गुलदार को मार डालता है। ऐसे में जब गुलदार गन्ने के खेतों में आए तो यहां उनका किसी से संघर्ष नहीं था। वह गन्ने के खेतों का राजा बन गया। जो भी अन्य जीव यहां मौजूद थे, वह उसके लिए आसान शिकार थे।

अब विशेष सीजन में नहीं, पूरे साल मिल रहे बच्चे
आंकड़े देखें तो एक और बड़ा बदलाव डरावना है। पहले माना जाता था कि गर्मी और बरसात के समय इनका मैटिंग सीजन शुरू होता था। मगर, अब ऐसा नहीं है। अब पूरे साल गन्ने के खेतों में बच्चे मिल रहे हैं। मादा गुलदार एक बार में दो से तीन शावकों को जन्म दे रही है। आंकड़े देखें तो इस साल जो गुलदार जंगलों में मिले, उनमें
दस से ज्यादा ऐसे गुलदार थे, जिनकी उम्र तीन साल से कम थी। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो करीब डेढ़ साल की उम्र में मादा गुलदार शावक को अपने से अलग कर देती है और वह शिकार करने लायक हो जाता है।जिले में बच्चों के लिए गुलदार की यह नई पीढ़ी बड़ा खतरा बनने जा रही है।



अमानगढ़ में गुलदार छोड़ने पर लगा दी रोक
इस साल की शुरुआत में गन्ने के खेतों से पकड़े जा रहे गुलदार अमानगढ़ में छोड़े जा रहे थे। इसके अलावा अमरोहा, बरेली, मुरादाबाद जिलों से भी अमानगढ़ में गुलदार भेजे गए। जब इंसानों पर हमले शुरू हुए तो माना गया कि अमानगढ़ में जो गुलदार छोड़े गए, वे आबादी की ओर आ गए है। इस कारण गुलदारों के अमानगढ़ में छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। पिछले छह माह से गुलदार कानपुर, इटावा लायन सफारी, गोरखपुर, लखनऊ चिड़ियाघर भेजे जा रहे हैं।


आंकड़ों में गुलदार
-03 गुलदार वर्ष 2021 में पकड़े गए



-07 गुलदार वर्ष 2022 में पकड़े गए



- 42 गुलदार वर्ष 2023 में कुल मिले



- 17 लोगों की जान इस साल गुलदार के हमलों में गई



- 50 से ज्यादा लोग इस साल गुलदार के हमलों में घायल हुए



- 06 गुलदार की दुर्घटना या अन्य कारण से मौत हुई



-400 से ज्यादा गुलदार गन्ने के खेतों में होने की संभावना




लोगों को कर रहे जागरूक
यह बात सही है कि गन्ने के खेतों में रहने वाले गुलदार का व्यवहार बदला हुआ है। इनकी संख्या भी बढ़ गई है। आंकड़े बताते हैं कि यह काफी समय से गन्ने के खेतों की ओर रुख कर रहे थे। ग्रामीणों को गुलदार से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं। ताकि इंसान और वन्य जीवों के बीच होने वाले संघर्ष को कम किया जा सके। - ज्ञान सिंह, एसडीओ, वन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed