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प्रथम विश्वयुद्ध लड़ने पर फीना के बिंदा सिंह को मिला था मेडल
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बिजनौर के ग्राम फीना में मेडल दिखाते बिंदा सिंह के पौत्र रामस्वरूप सिंह।
- फोटो : BIJNOR
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प्रथम विश्वयुद्ध लड़ने पर फीना के बिंदा सिंह को मिला था मेडल
बिजनौर। प्रथम विश्वयुद्ध 28 जुलाई 1914 से शुरू होकर 11 नवंबर 1918 तक चला था। इस युद्ध में बिजनौर के भी कई सैनिक भी शामिल हुए थे। बिजनौर के ग्राम फीना निवासी बिंदा सिंह को उस युद्ध में भाग लेने पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा मेडल प्रदान किया गया था। इनके कुटुंब के रामस्वरूप सिंह ने मेडल को आज भी सहेज कर रखा हुआ है।
प्रथम विश्व युद्ध में पूरा विश्व दो सेनाओं के रूप में बंट गया था। उस समय भारत में अंग्रेजी हुकूमत थी और अंग्रेजी हुकूमत द्वारा भारत के सैनिक इंग्लैंड की ओर से लड़ने के लिए भेजे गए थे। इस युद्ध में थाना नूरपुर क्षेत्र के ग्राम फीना निवासी बिंदा सिंह ने भी लड़ाई लड़ी थी। बिंदा सिंह को उनके शौर्य के लिए अंग्रेजी हुकूमत द्वारा मेडल प्रदान किया गया था। बिजनौर के इतिहास के जानकार फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि बिंदा सिंह ने इंग्लैंड की ओर से लड़ाई लड़ी थी। जिस पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उन्हें मेडल प्रदान किया गया था। मेडल पर अंग्रेजी में एमटीसीओ 9087 गोदा हुआ है। मेडल के एक ओर अंग्रेजी में दी ग्रेट वार ऑफ सिविलाइजेशन 1914-1918 लिखा है। दूसरी ओर एक परी का चित्र बना है। इस मेडल के मोटाई वाले हिस्से में बिंदा सिंह का नाम खुदा है।
बिंदा सिंह के अतिरिक्त ग्राम फीना के बिहारी सिंह भी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सेना में भर्ती हुए थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अंग्रेजी सेना की ओर से लड़ने से मना कर दिया था और सेना से लौट आए थे। अंग्रेज पुलिस उन्हें ढूंढती-ढूंढती कई बार घर आई, पर वे सफलतापूर्वक अज्ञातवास में बने रहे।
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बिंदा सिंह का कोई पुत्र नहीं था। इनका मेडल सहेज कर रखने वाले रामस्वरूप सिंह के पिता रामपाल सिंह, जो बिंदा सिंह के भतीजे थे, 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा लगाने के लिए फीना वाले दल के साथ गए थे। ये गांव के सबसे वृद्ध व्यक्तियों में से एक हैं। रामस्वरूप सिंह के पुत्र मणिकांत सिंह आइटीबीपी में निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अपार जन धन की हानि हुई थी। प्रथम विश्वयुद्ध में लगभग पांच करोड़ लोग प्रभावित हुए थे।
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बिजनौर। प्रथम विश्वयुद्ध 28 जुलाई 1914 से शुरू होकर 11 नवंबर 1918 तक चला था। इस युद्ध में बिजनौर के भी कई सैनिक भी शामिल हुए थे। बिजनौर के ग्राम फीना निवासी बिंदा सिंह को उस युद्ध में भाग लेने पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा मेडल प्रदान किया गया था। इनके कुटुंब के रामस्वरूप सिंह ने मेडल को आज भी सहेज कर रखा हुआ है।
प्रथम विश्व युद्ध में पूरा विश्व दो सेनाओं के रूप में बंट गया था। उस समय भारत में अंग्रेजी हुकूमत थी और अंग्रेजी हुकूमत द्वारा भारत के सैनिक इंग्लैंड की ओर से लड़ने के लिए भेजे गए थे। इस युद्ध में थाना नूरपुर क्षेत्र के ग्राम फीना निवासी बिंदा सिंह ने भी लड़ाई लड़ी थी। बिंदा सिंह को उनके शौर्य के लिए अंग्रेजी हुकूमत द्वारा मेडल प्रदान किया गया था। बिजनौर के इतिहास के जानकार फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि बिंदा सिंह ने इंग्लैंड की ओर से लड़ाई लड़ी थी। जिस पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उन्हें मेडल प्रदान किया गया था। मेडल पर अंग्रेजी में एमटीसीओ 9087 गोदा हुआ है। मेडल के एक ओर अंग्रेजी में दी ग्रेट वार ऑफ सिविलाइजेशन 1914-1918 लिखा है। दूसरी ओर एक परी का चित्र बना है। इस मेडल के मोटाई वाले हिस्से में बिंदा सिंह का नाम खुदा है।
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बिंदा सिंह के अतिरिक्त ग्राम फीना के बिहारी सिंह भी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सेना में भर्ती हुए थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अंग्रेजी सेना की ओर से लड़ने से मना कर दिया था और सेना से लौट आए थे। अंग्रेज पुलिस उन्हें ढूंढती-ढूंढती कई बार घर आई, पर वे सफलतापूर्वक अज्ञातवास में बने रहे।
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बिंदा सिंह का कोई पुत्र नहीं था। इनका मेडल सहेज कर रखने वाले रामस्वरूप सिंह के पिता रामपाल सिंह, जो बिंदा सिंह के भतीजे थे, 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा लगाने के लिए फीना वाले दल के साथ गए थे। ये गांव के सबसे वृद्ध व्यक्तियों में से एक हैं। रामस्वरूप सिंह के पुत्र मणिकांत सिंह आइटीबीपी में निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अपार जन धन की हानि हुई थी। प्रथम विश्वयुद्ध में लगभग पांच करोड़ लोग प्रभावित हुए थे।

बिजनौर के ग्राम फीना के बिंदा सिंह को प्रथम विश्वयुद्ध के बाद मिला मेडल।- फोटो : BIJNOR