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Bijnor News: रेहड़ - गुलदार का खौफ, किसान नहीं ला पा रहे पशुओं का चारा
Fri, 04 Aug 2023 12:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 04 Aug 2023 12:29 AM IST
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रेहड़ में गुलदार से बचाव के लिए भाला लेकर जंगल जाता किसान।
- हाथाें में हथियार लेकर समूह में खेतों पर जा रहे किसान
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
रेहड़ (बिजनौर)। किसान गुलदार के हमलों से इतना भयभीत है कि कृषि कार्य के लिए खेतों पर जाते समय अपने बचाव के लिए बरछी, लाठी व डंडे आदि लेकर जाने को मजबूर हैं। किसान गुलदार के आतंक के साए में खेतों पर काम करने को मजबूर है।
क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती घटनाओं का असर सबसे ज्यादा किसान व मजदूरों पर पड़ा है। लेकिन काम की अनिवार्यता को देखते हुए किसान मजदूर अब अपने साथ बचाव के लिए भाले, बरछी, कुल्हाड़ी, लाठी, डंडे आदि लेकर खेतों पर जा रहे हैं। मुस्सेपुर निवासी कुंवरपाल, डोली तथा उदयपुर निवासी अशोक, जितेंद्र आदि ने बताया कि जान हथेली पर रखकर जैसे तैसे फसलों की देखभाल व पशुओं के लिए चारा आदि लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बृहस्पतिवार को भी मुस्सेपर, उदयपुर आदि के जंगल में गन्ने के खेतों में गुलदार देखा गया। वन विभाग की ओर से इंसान की जान के दुश्मन बने गुलदारों के आतंक से निजात दिलाने को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष पनप रहा है।
वन विभाग लोगों को कर रहा जागरूक
फोटो समाचार
रेहड़। एसडीओ अंशुमान मित्तल ने बताया कि जनपद में गुलदार के हमले बढ़ रहे हैं। वन विभाग निरंतर लोगों को गुलदार से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है। इसके लिए गांवों के धार्मिक स्थलों से गुलदार के बचाव को लेकर प्रचार प्रसार कराया जा रहा है। साथ ही गांवों में दीवारों पर पोस्टर लगाकर व पैम्फलेट बांटकर लोगो को सचेत किया जा रहा है।
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रेहड़ (बिजनौर)। किसान गुलदार के हमलों से इतना भयभीत है कि कृषि कार्य के लिए खेतों पर जाते समय अपने बचाव के लिए बरछी, लाठी व डंडे आदि लेकर जाने को मजबूर हैं। किसान गुलदार के आतंक के साए में खेतों पर काम करने को मजबूर है।
क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती घटनाओं का असर सबसे ज्यादा किसान व मजदूरों पर पड़ा है। लेकिन काम की अनिवार्यता को देखते हुए किसान मजदूर अब अपने साथ बचाव के लिए भाले, बरछी, कुल्हाड़ी, लाठी, डंडे आदि लेकर खेतों पर जा रहे हैं। मुस्सेपुर निवासी कुंवरपाल, डोली तथा उदयपुर निवासी अशोक, जितेंद्र आदि ने बताया कि जान हथेली पर रखकर जैसे तैसे फसलों की देखभाल व पशुओं के लिए चारा आदि लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बृहस्पतिवार को भी मुस्सेपर, उदयपुर आदि के जंगल में गन्ने के खेतों में गुलदार देखा गया। वन विभाग की ओर से इंसान की जान के दुश्मन बने गुलदारों के आतंक से निजात दिलाने को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा रही है इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष पनप रहा है।
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वन विभाग लोगों को कर रहा जागरूक
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रेहड़। एसडीओ अंशुमान मित्तल ने बताया कि जनपद में गुलदार के हमले बढ़ रहे हैं। वन विभाग निरंतर लोगों को गुलदार से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है। इसके लिए गांवों के धार्मिक स्थलों से गुलदार के बचाव को लेकर प्रचार प्रसार कराया जा रहा है। साथ ही गांवों में दीवारों पर पोस्टर लगाकर व पैम्फलेट बांटकर लोगो को सचेत किया जा रहा है।
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