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किसानों को इस बार मिलेगी बासमती की रोग प्रतिरोधक क्षमता वालीं प्रजातियां
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किसानों को मिलेंगी बासमती की दो नई प्रजातियां
बिजनौर। बासमती का उत्पादन बढ़ाने के लिए जिले के किसानों को इस बार बासमती की दो नई प्रजाति मिलेंगी। यह दोनों प्रजातियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो अधिक हैं ही इनकी उपज भी अधिक है। कृषि विभाग के सभी बीज भंडारों पर किसानों को इन प्रजाति का बीज उपलब्ध रहेगा।
जिले के किसान 55 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में बासमती की खेती करते हैं। बासमती की खेती मुख्य रूप से बढ़ापुर, नजीबाबाद, अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में की जाती है। जिले के किसान धान के कुल 60 प्रतिशत रकबे में बासमती की खेती करते हैं। जिले का बासमती धान खाड़ी देशों में निर्यात होता है और किसानों को इस धान की अच्छी कीमत मिलती है। इस बार किसानों को दो नई प्रजाति पूसा बासमती-1718 और पूसा बासमती 1637 के बीज कृषि विभाग के बीज भंडारों पर मिलेंगे। पिछले साल इन दोनों प्रजाति के बीज नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल के तौर पर बोए गए थे। वहां दोनों प्रजातियों की अच्छी पैदावार हुई है। इस बार किसानों के लिए पहली बार ये बीज उपलब्ध रहेंगे।
ये हैं खासियत
पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1121 का सुधरा रूप है। इसका औसत उत्पादन पूसा बासमती 1121 से अधिक 52.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह झुलसा रोग प्रतिरोधी है। पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती-3 का सुधरा रूप है। इसका औसत उत्पादन 55.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसका अधिकतम उत्पादन 67.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह झोंका रोग प्रतिरोधी है।
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मिलेगी बंपर पैदावार
कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार किसानों के लिए दो नई प्रजातियों के बीज बाजार में उपलब्ध रहेंगे। किसान नई प्रजाति बोएं। रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से किसानों को फसल की बंपर पैदावार मिलेगी।
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बिजनौर। बासमती का उत्पादन बढ़ाने के लिए जिले के किसानों को इस बार बासमती की दो नई प्रजाति मिलेंगी। यह दोनों प्रजातियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो अधिक हैं ही इनकी उपज भी अधिक है। कृषि विभाग के सभी बीज भंडारों पर किसानों को इन प्रजाति का बीज उपलब्ध रहेगा।
जिले के किसान 55 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में बासमती की खेती करते हैं। बासमती की खेती मुख्य रूप से बढ़ापुर, नजीबाबाद, अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में की जाती है। जिले के किसान धान के कुल 60 प्रतिशत रकबे में बासमती की खेती करते हैं। जिले का बासमती धान खाड़ी देशों में निर्यात होता है और किसानों को इस धान की अच्छी कीमत मिलती है। इस बार किसानों को दो नई प्रजाति पूसा बासमती-1718 और पूसा बासमती 1637 के बीज कृषि विभाग के बीज भंडारों पर मिलेंगे। पिछले साल इन दोनों प्रजाति के बीज नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल के तौर पर बोए गए थे। वहां दोनों प्रजातियों की अच्छी पैदावार हुई है। इस बार किसानों के लिए पहली बार ये बीज उपलब्ध रहेंगे।
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ये हैं खासियत
पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1121 का सुधरा रूप है। इसका औसत उत्पादन पूसा बासमती 1121 से अधिक 52.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह झुलसा रोग प्रतिरोधी है। पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती-3 का सुधरा रूप है। इसका औसत उत्पादन 55.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसका अधिकतम उत्पादन 67.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह झोंका रोग प्रतिरोधी है।
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मिलेगी बंपर पैदावार
कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार किसानों के लिए दो नई प्रजातियों के बीज बाजार में उपलब्ध रहेंगे। किसान नई प्रजाति बोएं। रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से किसानों को फसल की बंपर पैदावार मिलेगी।