बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

किसान पर भारी बिचौलियों की हिस्सेदारी

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 12:09 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
किसान पर भारी बिचौलियों की हिस्सेदारी
विज्ञापन

बिजनौर। मंडियों में आढ़त पर किसानों से चार प्रतिशत बिक्री टैक्स लिया जा रहा है। बिजनौर में नियमों को ताक पर रखकर चार प्रतिशत टैक्स बिचौलिये ले रहे हैं। यह सब मंडी समिति के कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर हो रहा है। किसानों से खुलेआम लूट की जा रही है। सालों से यही प्रथा चल रही है। इतना सब होने के बाद भी जिले में किसी भी किसान संगठन, किसी अफसर या किसी नेता ने इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई है।
किसान की फसल बिकने के लिए मंडी को सबसे अहम जगह माना जाता है। पहले किसान अपनी फसल केवल मंडी में ही बेच सकता था। अगर किसान मंडी की आढ़त से बाहर फसल बेचता तो उससे फसल खरीदने वाले व्यापारी पर जुर्माना लग सकता है। अब सरकार ने किसान से कहीं भी फसल बेचने की छूट दे दी है। इससे व्यापारी और किसानों के बीच में आढ़ती यानि बिचौलिये को बाहर रखने की छूट दी गई है। हालांकि मंडी व्यवस्था को भी सरकार ने खत्म नहीं किया है। जो लोग मंडी और बिचौलियों की वकालत कर रहे हैं वे खुद अगर मंडी में जाकर देखेंगे तो किसान के बिचौलियों से लुटे जाने का पता चलेगा। मंडी में किसानों से उनकी फसल बिकवाने के बदले चार प्रतिशत टैक्स लिया जा रहा है। यह टैक्स किसानों से बिना किसी नियम के लिया जाता है। आढ़त पर जब बिचौलिये किसान की सब्जी बिकवाते हैं तो खरीदार से पैसा अपने हाथ में लेते हैं। इसके बाद चार प्रतिशत आढ़त काटकर किसान को पैसा दिया जा रहा है। सालों से यही हो रहा है। इस पर न तो आज तक किसानों की वकालत करने वाले किसान संगठनों ने आवाज उठाई और न ही किसी अधिकारी ने कार्रवाई करने की हिम्मत की।

यह है नियम
कोई भी बिचौलिया किसान से सब्जी बिकवाने के बदले एक रुपया भी नहीं ले सकता है। किसान से जो व्यापारी सब्जी खरीदेगा, आढ़ती उस व्यापारी से अपना साढ़े तीन प्रतिशत कमीशन व एक प्रतिशत ब्याज ले सकता है। किसान से किसी भी सूरत में एक रुपया भी नहीं ले सकता है। लेकिन मंडी समिति में बिचौलियों का राज चलता है। मंडियों में किसान की आढ़त काटने के बाद उसे रसीद में काटी गई आढ़त की पर्ची भी दी जाती है। उस पर आढ़त पर चार प्रतिशत टैक्स कटने के बारे में भी लिखा रहता है। बाकायदा रजिस्टर पर भी काटे गई आढ़त का विवरण रहता है। आढ़तियों का खौफ इतना है कि किसान उनके खिलाफ बोलना तो दूर छापने के लिए अपनी पर्ची तक नहीं देते हैं।
ऐसे काटा बिचौलिया टैक्स
अमर उजाला के रिपोर्टर ने किसान बनकर मंडी में एक आढ़त पर 14.5 किलो शलजम और पालक बेचा। 25 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर यह 362.5 रुपये का बिका। लेकिन आढ़ती ने इसमें से चार प्रतिशत के हिसाब से 14 रुपये की आढ़त काट ली। किसान को आढ़त काटकर 348 रुपये दिए गए। इस संबंध में पूछा गया तो बताया गया कि यह पैसा तो देना ही होगा, यह नियम है।
यह है हाल
कोविड 19 के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए मंडी समिति प्रदर्शनी मैदान में लगाई जा रही है। यह मंडी समिति से चंद कदम की दूरी पर है। डीएम व एसडीएम का आवास और कार्यालय भी यहां से थोड़ी ही दूर है। लेकिन इसके बाद भी किसानों से आढ़त वसूलने का काम धड़ल्ले से हो रहा है।
नेता, अफसरों को किसानों से नहीं मतलब
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत क कहना है कि अफसरों को किसानों के मूल्य से कोई मतलब नहीं है। किसानों को फसलों का दाम नहीं मिलने के लिए अफसर और नेता दोनों जिम्मेदार हैं। मंडियों के अंदर तो सरकारी व्यवस्था रहती है। इसका मतलब सब सरकारी मर्जी से हो रहा है।
साल भर के ब्याज के बराबर रुपये एक दिन में
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा का कहना है कि किसानों से बिचौलिये कोई रुपया नहीं ले सकते हैं। सब्सिडी पर किसान को केसीसी पर साल भर में चार प्रतिशत ब्याज देना होता है और मंडियों में बिचौलिये पांच से दस मिनट में कुल रकम का चार प्रतिशत किसानों से उड़ा रहे हैं।
मंडी में नहीं झांकते हैं अफसर
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि जिले की मंडियों में बुरा हाल है। कोई अफसर झांक कर नहीं देखता है कि किसान के साथ क्या हो रहा है। किसानों की ओर से सभी ने आंखें बंद कर रखी हैं। यदि अफसर चाहें तो यह कमीशनखोरी बंद हो सकती है।
मंडी समिति के नियंत्रण से बाहर है मंडी
मंडी समिति के प्रभारी सचिव सतेंद्र कुमार का कहना है कि किसान से कहीं पर फसल बिकवाने पर कमीशन नहीं लिया जा सकता है। यह नियम के खिलाफ है। बिजनौर की मंडी विभाग के नियंत्रण से बाहर है। मंडी समिति के अंदर ही अब विभाग दखल दे सकता है। इस पर प्रशासनिक अधिकारी ही कुछ कदम उठा सकते हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us