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सभी में हो देशभक्ति की भावना
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 18 Mar 2017 11:54 PM IST
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बिजनौर में स्वागत समारोह में पहुंचे स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में सिद्धपीठ भूमा निकेतन हरिद्वार से आए द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि देश की रक्षा करते हुए सैनिक 40-40 दिन तक अपनी बूट के फीते तक नहीं खोलते हैं।
आनंद गोप समिति की ओर से आयोजित स्वागत समारोह कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। घरों में संस्कार खत्म होते जा रहे हैं। पहले पत्नी अपने पति को आर्य(वीर) कहकर पुकारती थी, लेकिन अब एजी, मिस्टर या नाम लेकर बुलाती हैं। सावन, भादों के महीनों को जानते तक नहीं हैं। सोचते हैं कि भारतीय त्योहार अंग्रेजी महीनों में ही आते हैं। सभी को मिलकर भारतीय संस्कृति के संस्कार के अनुसार पर्व-त्योहार मनाएं। कहा कि लखनऊ में कुछ दिनों पहले एक उग्रवादी मारा गया तो उसके पिता ने उसे गद्दार बताते हुए शव लेने से मना कर दिया, लेकिन कुछ लोग उस गद्दार का शव लेने पहुंच गए। स्वामी विवेकानंद शिकागो की धर्मसभा से लौटकर लखनऊ के हनुमान मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। तब एक छात्र ने स्वामी जी से कहा कि उनका भाषण तो अच्छा है, लेकिन उनके पैर में अमेरिकी चप्पल है। तब स्वामी जी ने कहा कि भले ही मेरे पैर में अमेरिकी चप्पल है, लेकिन सिर पर हिंदुस्तानी पगड़ी है। हम सबको भी अपने सिर पर भारत की हिंदुस्तानी पगड़ी धारण करनी चाहिए। विवेकानंद महाराज, स्वामी महेश्वारांद, स्वामी माधवानंद, स्वामी विनोद जी महाराज, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी प्रबोधानंद, राजेंद्र शर्मा, जेपी पठोनी, प्रमोद गिरि आदि मौजूद रहे। संस्थापक विजय बाबा ने स्वामी जी का शॉल व पीतल की गौमाता देकर सम्मानित किया। संजय शर्मा, बिजनौर शंकरलाल, राकेश शर्मा, एसके बबली, राजीव चौहान, नीरज शर्मा, सीताराम राणा, सुधीर पाराशर, पंकज भारद्वाज, सूर्यमणि रघुवंशी, दीपक बंसल आदि मौजूद रहे।
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आनंद गोप समिति की ओर से आयोजित स्वागत समारोह कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। घरों में संस्कार खत्म होते जा रहे हैं। पहले पत्नी अपने पति को आर्य(वीर) कहकर पुकारती थी, लेकिन अब एजी, मिस्टर या नाम लेकर बुलाती हैं। सावन, भादों के महीनों को जानते तक नहीं हैं। सोचते हैं कि भारतीय त्योहार अंग्रेजी महीनों में ही आते हैं। सभी को मिलकर भारतीय संस्कृति के संस्कार के अनुसार पर्व-त्योहार मनाएं। कहा कि लखनऊ में कुछ दिनों पहले एक उग्रवादी मारा गया तो उसके पिता ने उसे गद्दार बताते हुए शव लेने से मना कर दिया, लेकिन कुछ लोग उस गद्दार का शव लेने पहुंच गए। स्वामी विवेकानंद शिकागो की धर्मसभा से लौटकर लखनऊ के हनुमान मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। तब एक छात्र ने स्वामी जी से कहा कि उनका भाषण तो अच्छा है, लेकिन उनके पैर में अमेरिकी चप्पल है। तब स्वामी जी ने कहा कि भले ही मेरे पैर में अमेरिकी चप्पल है, लेकिन सिर पर हिंदुस्तानी पगड़ी है। हम सबको भी अपने सिर पर भारत की हिंदुस्तानी पगड़ी धारण करनी चाहिए। विवेकानंद महाराज, स्वामी महेश्वारांद, स्वामी माधवानंद, स्वामी विनोद जी महाराज, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी प्रबोधानंद, राजेंद्र शर्मा, जेपी पठोनी, प्रमोद गिरि आदि मौजूद रहे। संस्थापक विजय बाबा ने स्वामी जी का शॉल व पीतल की गौमाता देकर सम्मानित किया। संजय शर्मा, बिजनौर शंकरलाल, राकेश शर्मा, एसके बबली, राजीव चौहान, नीरज शर्मा, सीताराम राणा, सुधीर पाराशर, पंकज भारद्वाज, सूर्यमणि रघुवंशी, दीपक बंसल आदि मौजूद रहे।
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