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Bijnor News: माध्यमिक विद्यालयों के नये शिक्षा सत्र में नैतिक शिक्षा पर रहेगा जोर

Fri, 19 Apr 2024 01:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 19 Apr 2024 01:43 AM IST
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Emphasis on moral education in the new academic session
बिजनौर। माध्यमिक विद्यालयों में नैतिक शिक्षा की पढ़ाई की व्यवस्था है। शिक्षा सत्र 2024-25 में विद्यार्थियों को नैतिकता की पढ़ाई को गति दी जाएगी। प्रार्थना सभा में विद्यार्थी प्रतिदिन सुविचार प्रस्तुत करेंगे। सर्वश्रेष्ठ सुविचार को सम्मानित किया जाएगा।
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आरोप है कि कुछ विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं माने जाते हैं। इसकी वजह विद्यालयों में नैतिक शिक्षा का अभाव है। जिस कारण विद्यार्थी भारतीय संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। शासन ने विद्यार्थियों में नैतिकता को बढ़ावा देने के लिए आज का सुविचार कार्यक्रम शुरू किया है।
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शासन से शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया गया है। कैलेंडर में विद्यार्थियों की पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था का खाका खींचा गया है। विद्यालयों की महीनेवार जिम्मेदारी फिक्स की गई है। साथ ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सह क्रियाकलापों जैसे खेल कूद, विज्ञान से जुड़ी गतिविधियां, नैतिक शिक्षा आदि के क्रियान्वयन पर भी जोर रहेगा।
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- सुविचार के विषय



प्रार्थना में शिक्षकों व विद्यार्थियों द्वारा आज का सुविचार प्रस्तुत किया जाएगा। आज के सुविचार की एक पंजिका बनाई जाएगी। माह के अंत में सर्वश्रेष्ठ सुविचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थी को सम्मानित किया जाएगा। विद्यार्थियों द्वारा प्रतिदिन किसी नैतिक व प्रासंगिक विषय जैसे जीवन में मूल्यों का महत्व व मूल्यपरक शिक्षा, विभिन्न मानव मूल्य जैसे चरित्र निर्माण, राष्ट्र भक्ति, समाजसेवा, कर्तव्य परायणता, सत्यनिष्ठा आदि, महापुरुषों का जीवन चरित्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, यातायात व सड़क सुरक्षा, इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग आदि पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे।






- नैतिक शिक्षा की पढ़ाई खानापूर्ति



माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से बारह तक के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा एक विषय के रूप में पढ़ाने की व्यवस्था है। आरोप है कि नैतिक शिक्षा की पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति होती है। माना जा रहा है कि शासन के फैसले से विद्यार्थियों को नैतिकता का ज्ञान सामूहिक रूप से मिल सकेगा। साथ ही कालांशों में नैतिक शिक्षा की पढ़ाई प्रभावी रूप ले सकेगी।
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