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Bijnor News: सरल भाषा में जन-जन की आवाज बने दुष्यंत कुमार

Thu, 31 Aug 2023 11:34 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:34 PM IST
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Dushyant Kumar became the voice of the people in simple language
कवि दुष्यंत कुमार जयंती की पूर्व संध्या पर कलक्ट्रेट में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कवि दुष्यंत कुमार जयंती की पूर्व संध्या पर कलक्ट्रेट में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। साहित्यकारों ने जनकवि दुष्यंत कुमार की कविताओं का काव्य पाठ कर श्रद्धाजंलि अर्पित की। साहित्यकारों ने कहा कि दुष्यंत कुमार की कविताएं सिर्फ कविता ही नहीं, बल्कि जनआंदोलन हैं। दुष्यंत कुमार की कविताएं सड़क से लेकर संसद तक आज भी पढ़ी जाती हैं। उनकी कविताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक प्रयोग कर एक-दूसरे पर कटाक्ष करते हैं। उनकी कविताएं आम आदमी की आवाज को आज भी बुलंद करती हैं। उन्होंने सरल भाषा में अपनी गजल कहीं। उन्हें हिंदी गजल का प्रणेता भी कहा जाता है।


लोगों की बुलंद आवाज बने दुष्यंत कुमार: उमेश मिश्रा
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि दुष्यंत कुमार ने जनकवि बनकर लोगों की आवाज को बुलंद किया। आज बिजनौर की पहचान दुष्यंत कुमार के नाम से होती है। जनपद मुख्यालय पर दुष्यंत कुमार के नाम पर ही पुस्तकालय का नाम रखा गया है। जिले में दुष्यंत कुमार के नाम पर 650 पुस्तकालयों की स्थापना की गई है। अब दुष्यंत कुमार साहित्यिक मंच बनाने की तैयारी चल रही है।
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काव्य क्षेत्र में अपार ख्याति प्राप्त की: रमेश राजहंस
कवि रमेश राजहंस का कहना है कि हिंदी गजलों से हुई थी जिनकी पहचान, जनपद बिजनौर के थे सिरमोर दुष्यंत महान। मात्र 44 वर्ष की आयु पाने वाले दुष्यंत कुमार ने काव्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए और अपार ख्याति प्राप्त की।
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हिंदी गजल को दिलाई नई पहचान: हुक्का बिजनौरी
कवि हुक्का बिजनौर ने कहा कि दुष्यंत कुमार की 50 साल पहले लिखी गई पंक्तियां आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने हिंदी गजल को नई पहचान दिलाई। उन्होंने पहली बार उर्दू से इतर हिंदी के शब्दों का प्रयोग कर हिंदी को मजबूत किया।

हिंदी गजलों को दिया नया स्वरूप: नीरज सुधांशु
कवि नीरज सुधांशु ने बताया कि दुष्यंत कुमार पूरे देश और दुनिया का गौरव हैं। उन्होंने हिंदी गजल को नया स्वरूप दिया। उन्होंने हिंदी गजल को आम जन से जोड़ने का कार्य किया। आज दुष्यंत की लेखनी का लोहा पूरा देश मानता है।

जिले में दुष्यंत कुमार का घर बने संग्रहालय: सुमन चौधरी
कवयत्री सुमन चौधरी का कहना है कि दुष्यंत कुमार के नाम पर उनकी कार्य स्थली रहे भोपाल में उनके नाम पर पुस्तकालय और संग्रहालय है। जनपद में भी दुष्यंत कुमार के घर को संग्रहालय बनाया जाना चाहिए।

दुष्यंत कुमार ने व्यवस्था के विरुद्ध उठाई आवाज: मेराज बिजनौरी
कवि मेराज बिजनौर ने कहा कि दुष्यंत कुमार बिजनौर की शान हैं। उनकी रचनाएं आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणाएं देती हैं। दुष्यंत कुमार ने अपनी कलम के माध्यम से व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाई। वह आज सर्वाधिक पढ़े जाने वाले कवियों में से एक हैं।

उनकी कविता कभी हार नहीं मानने की प्रेरणा देती है: अनिल चौधरी
कवि अनिल चौधरी ने कहा कि दुष्यंत कुमार ने इमरजेंसी के दौरान सत्ता के विरुद्ध जमकर लिखा। उनकी लिखी हुई पंक्तियां आज भी पूरी हिंदी पट्टी में मंचों पर पढ़ी जाती हैं। वह कभी हार न मानने की प्रेरणा देती हैं।

उनकी कलम वंचितों की आवाज बनी: अशोक शर्मा
कवि अशोक शर्मा का कहना है कि दुष्यंत कुमार ने अपनी कविताओं के माध्यम से अन्याय के प्रति विरोध जताया। उनकी कलम लगातार वंचित और दबे-कुचले लोगों की आवाज बनती रही। वे कभी भी सत्ता के आगे नहीं झुके।


आम बोलचाल की भाषा को लोगों के लिए सुलभ बनाया: दीप अंजुम
कवि दीप अंजुम ने बताया कि दुष्यंत कुमार ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी को मजबूत किया। उन्होंने आम बोलचाल की भाषा को गजल में प्रयोग करके आम लोगों के लिए सुलभ बनाया।
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