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दिव्यांगों ने मांगी पांच हजार पेंशन
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बिजनौर में कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे दिव्यांग।
- फोटो : BIJNOR
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दिव्यांगों ने मांगी पांच हजार पेंशन
बिजनौर। दिव्यांगों ने शासन-प्रशासन पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया। दिव्यांगों ने मासिक पेंशन को 500 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने की मांग की है। इसे लेकर दिव्यांगों ने कलक्ट्रेट में धरना दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
मंगलवार को दिव्यांग कलक्ट्रेट में एकत्र हुए और धरना दिया। जिलाधिकारी कार्यालय में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि हर साल शासन-प्रशासन की ओर से तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांगता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मगर, दिव्यांग कई वर्षों से इसे काला दिवस के रूप में मनाते हैं। कारण दिव्यांगों की परेशानियों को जान बूझकर अनदेखा किया जाता है। उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों को पेंशन के नाम पर महज 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। वह भी छह से नौ माह में मिल पाते हैं। जबकि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में दिव्यांगजनों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। कहना है कि जब केंद्र या प्रदेश सरकार के कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 30 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इतने में भी उनका गुजारा नहीं हो पाता तो फिर मात्र 500 रुपये प्रतिमाह में दिव्यांगों की गुजर बसर कैसे हो सकती है। इस दौरान दिव्यांगों की प्रतिमाह पेंशन 500 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने, शासन-प्रशासन की ओर से दिव्यांगों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन कराने, दिव्यांग आयोग का अध्यक्ष किसी दिव्यांग को ही बनाने, दिव्यांगों का शोषण करने वाले दलालों एवं सरकारी तंत्र के लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करने, रोडवेज की बसों में दिव्यांगों के साथ चालक-परिचालकों द्वारा अच्छा व्यवहार करने आदि की मांगें की गई। इस दौरान मोहित कुमार, सजाकत, इमरान झोझा, प्रदीप कुमार, ओमपाल, ललित, नुसरत, तेजपाल, बिजेंद्र सिंह, तेजपाल सिंह आदि शामिल रहे।
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बिजनौर। दिव्यांगों ने शासन-प्रशासन पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया। दिव्यांगों ने मासिक पेंशन को 500 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने की मांग की है। इसे लेकर दिव्यांगों ने कलक्ट्रेट में धरना दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
मंगलवार को दिव्यांग कलक्ट्रेट में एकत्र हुए और धरना दिया। जिलाधिकारी कार्यालय में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि हर साल शासन-प्रशासन की ओर से तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांगता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मगर, दिव्यांग कई वर्षों से इसे काला दिवस के रूप में मनाते हैं। कारण दिव्यांगों की परेशानियों को जान बूझकर अनदेखा किया जाता है। उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों को पेंशन के नाम पर महज 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। वह भी छह से नौ माह में मिल पाते हैं। जबकि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में दिव्यांगजनों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। कहना है कि जब केंद्र या प्रदेश सरकार के कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 30 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। इतने में भी उनका गुजारा नहीं हो पाता तो फिर मात्र 500 रुपये प्रतिमाह में दिव्यांगों की गुजर बसर कैसे हो सकती है। इस दौरान दिव्यांगों की प्रतिमाह पेंशन 500 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने, शासन-प्रशासन की ओर से दिव्यांगों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन कराने, दिव्यांग आयोग का अध्यक्ष किसी दिव्यांग को ही बनाने, दिव्यांगों का शोषण करने वाले दलालों एवं सरकारी तंत्र के लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करने, रोडवेज की बसों में दिव्यांगों के साथ चालक-परिचालकों द्वारा अच्छा व्यवहार करने आदि की मांगें की गई। इस दौरान मोहित कुमार, सजाकत, इमरान झोझा, प्रदीप कुमार, ओमपाल, ललित, नुसरत, तेजपाल, बिजेंद्र सिंह, तेजपाल सिंह आदि शामिल रहे।
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