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सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का बिजली कनेक्शन काटा
Tue, 02 Apr 2019 11:46 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 02 Apr 2019 11:46 PM IST
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बिजनौर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी साफ करती मशीन।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जिले के सबसे महंगे प्रोजेक्ट सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का बिजली कनेक्शन कट गया है। प्लांट का बिजली बिल महीनों से जमा नहीं किया गया था। गंदे पानी को साफ करने और सीवर की गंदगी से खाद बनाने के 115 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का बिजली बिल जल निगम जमा नहीं कर पाया। सीवर का ट्रीटमेंट प्लांट अब कई दिनों से ठप पड़ा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के बंद होने पर जल निगम को नोटिस भेजा है।
बिजनौर में सीवर लाइन आज तक का सबसे महंगा प्रोजेक्ट है। इसे बिछाने का काम साल 2010 में शुरू किया गया था। करीब आठ साल बाद आखिरकार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हो गया। दिसंबर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया था। काजीपाड़ा से जाने वाले नाले का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में डालकर साफ करने का काम शुरू हो गया था, लेकिन इसका बिजली बिल जमा नहीं किया गया। इस पर विद्युत निगम का करीब 40 लाख रुपये का बकाया हो गया। आखिरकार विद्युत निगम अधिकारियों ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का कनेक्शन काट दिया है। कनेक्शन सात मार्च को काटा गया है, करीब एक महीने से ट्रीटमेंट प्लांट ठप पड़ा है। बिजनौर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को गंगा की सफाई में भी अहम माना गया था। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने भाषणों में जिले में बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का जिक्र करते रहते हैं।
प्लांट को 24 घंटे मिलती है बिजली
सीवर के ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जिला अस्पताल की तरह अलग से विद्युत लाइन बिछाई गई है। ट्रीटमेंट प्लांट को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है। लाइन बिछाने में ही विद्युत निगम ने मोटा बजट खर्च किया है। सफाई निरीक्षक अजय गौतम के अनुसार बिजनौर शहर की नालियों में हर रोज 14 करोड़ लीटर पानी बहता है। इस पूरे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किया जाएगा। साफ होने के बाद हर रोज साढ़े आठ करोड़ लीटर पानी मिलेगा। इस पानी को किसानों को दिया जाएगा। निर्माण कार्य आदि में भी यही पानी प्रयोग में लाया जाएगा। सीवर लाइन के ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 24 करोड़ लीटर प्रतिदिन की है। ट्रीटमेंट प्लांट की लागत 115 करोड़ रुपये है। इसमें 27 करोड़ की लागत से केवल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। जमीन खरीदने और सीवर लाइन डालने में बाकी पैसा खर्च हुआ है।
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बिजनौर में सीवर लाइन आज तक का सबसे महंगा प्रोजेक्ट है। इसे बिछाने का काम साल 2010 में शुरू किया गया था। करीब आठ साल बाद आखिरकार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हो गया। दिसंबर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया था। काजीपाड़ा से जाने वाले नाले का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में डालकर साफ करने का काम शुरू हो गया था, लेकिन इसका बिजली बिल जमा नहीं किया गया। इस पर विद्युत निगम का करीब 40 लाख रुपये का बकाया हो गया। आखिरकार विद्युत निगम अधिकारियों ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का कनेक्शन काट दिया है। कनेक्शन सात मार्च को काटा गया है, करीब एक महीने से ट्रीटमेंट प्लांट ठप पड़ा है। बिजनौर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को गंगा की सफाई में भी अहम माना गया था। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने भाषणों में जिले में बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का जिक्र करते रहते हैं।
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प्लांट को 24 घंटे मिलती है बिजली
सीवर के ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जिला अस्पताल की तरह अलग से विद्युत लाइन बिछाई गई है। ट्रीटमेंट प्लांट को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है। लाइन बिछाने में ही विद्युत निगम ने मोटा बजट खर्च किया है। सफाई निरीक्षक अजय गौतम के अनुसार बिजनौर शहर की नालियों में हर रोज 14 करोड़ लीटर पानी बहता है। इस पूरे पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किया जाएगा। साफ होने के बाद हर रोज साढ़े आठ करोड़ लीटर पानी मिलेगा। इस पानी को किसानों को दिया जाएगा। निर्माण कार्य आदि में भी यही पानी प्रयोग में लाया जाएगा। सीवर लाइन के ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 24 करोड़ लीटर प्रतिदिन की है। ट्रीटमेंट प्लांट की लागत 115 करोड़ रुपये है। इसमें 27 करोड़ की लागत से केवल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। जमीन खरीदने और सीवर लाइन डालने में बाकी पैसा खर्च हुआ है।
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