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फसल बर्बाद, किसान हताश

Fri, 04 Nov 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो
अमर उजाला/ब्यूरो Updated Fri, 04 Nov 2016 11:28 PM IST
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Crops, farmers desperate
बिजनौर के विकास भवन में कृषि अधिकारी कार्यालय पर तालाबंदी करते भाकियू कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में भाकियू के बैनर तले किसानों ने बासमती चावल में दाना नहीं पड़ने से बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग को लेकर विकास भवन स्थित जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में नारेबाजी कर ताला जड़ दिया। किसान कृषि अधिकारी कार्यालय के बाहर ही धरना देकर बैठ गए। 
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किसानों ने अधिकारियों पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। सीडीओ की मध्यस्थता में हुई बैठक में किसानों ने कृषि विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई। करीब एक घंटे चली बैठक में सीडीओ ने मामले की जांच किसानों एवं अधिकारियों की संयुक्त कमेटी से कराने की घोषणा की। इसके बाद ही किसानों का धरना समाप्त हुआ।  शुक्रवार को किसान भाकियू के बैनर तले गन्ना समिति में एकत्र हुए। संगठन के जिलाध्यक्ष रामऔतार सिंह व महासचिव दिगंबर सिंह की अगुवाई में नारेबाजी करते हुए किसान विकास भवन पहुंचे। कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किसानों के आने की सूचना पर पहले ही कार्यालय छोड़कर जा चुके थे। आक्रोशित किसानों ने बाकी विभागों के कर्मचारियों को बाहर निकालकर दफ्तर के मेन गेट पर ताला जड़ दिया। किसान गेट पर ही धरना देकर बैठ गए। करीब एक बजे सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी धरने पर बैठे किसानों के बीच पहुंचे तथा बातचीत के लिए आमंत्रित किया। करीब दो बजे किसानों की सभागार में बैठक शुरू हुई।
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बैठक शुरू होते ही जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने धान में दाना नहीं पड़ने पर जब अपनी सफाई देनी चाही, तो किसानों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। किसानों का आरोप था कि उन्हें जिला कृषि अधिकारी पर भरोसा नहीं है। सीडीओ के हस्तक्षेप पर किसान शांत हुए। बैठक में बताया गया कि जिले के 1487 किसानों को 245 क्विंटल बासमती चावल का बीज बेचा गया। दिगंबर सिंह द्वारा किसानों की सूची मांगने पर जिला कृषि अधिकारी से उनकी जमकर नोकझोंक हुई। दिगंबर सिंह के मुताबिक करीब 25000 बीघे में खड़ी धान की फसल बरबाद हुई है। प्रति क्विंटल धान की सरकारी खरीद के रेट पर मुआवजा मिले। आरोप लगाया कि कृषि विभाग के अधिकारी कमीशनखोरी में लिप्त हैं। किसानों ने कहा कि उन्हें जिला कृषि अधिकारी पर भरोसा नहीं है। जांच प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कराई जाए। इस पर सीडीओ ने कहा कि जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकारियों के साथ किसानों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। वरिष्ठ किसान नेता ओमपाल सिंह,बाबूराम तोमर मौजूद रहे। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष रामऔतार सिंह के अनुसार इस मामले को यूनियन की समीक्षा बैठक में उठाया जाएगा। यह बैठक छह नवंबर को रामपुर में होगी।  इसमें कई प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
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