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नार्को और लाई डिटेक्टर टेस्ट होगा
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 20 Dec 2015 12:04 AM IST
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बिजनौर। सीजेएम महेशानंद झा ने बहुचर्चित आजम हत्याकांड में सभी संदिग्ध आरोपियों का नार्को और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने के आदेश दिए हैं। टेस्ट के बाद ही संदिग्ध आरोपियों की हत्याकांड में संलिप्तता के बारे में पता चल सकेगा।
लखनऊ निवासी 27 वर्षीय आजम देहरादून में एमबीए में पढ़ता था। वह अपने मौसा के पास शोरूम पर काम करता था। 27 जुलाई 2014 को वह दून एक्सप्रेस से देहरादून से लखनऊ जा रहा था। ट्रेन में उसकी हत्या कर दी गई थी। शव ट्रेन में नगीना में मिला था।
इस हत्याकांड की रिपोर्ट बिजनौर जीआरपी थाने में अज्ञात में दर्ज कराई गई थी। इस मामले की विवेचना मौजूदा समय में मेरठ जीआरपी थानाध्यक्ष अशोक वर्मा कर रहे हैं।
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उन्होंने सीजेएम बिजनौर के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था कि अभी तक कि विवेचना में संदेह के आधार पर जकाउल्ला, सफुउल्ला, अर्शवारी, रमीजुल्ला, अमृत सिंह, माया कौर, सिद्धार्थ उर्फ सन्नी, मोनिका और रवि के नाम प्रकाश में आए हैं।
पुलिस उनका नार्को एनालाइसिस टेस्ट और लाई डिटेक्शन टेस्ट एफएसएल लखनऊ/हैदराबाद से कराए। जिससे कि इस हत्याकांड में उनकी संलिप्तता या असंलिप्तता का पता चल सके।
इस मामले में जीआरपी द्वारा अदालत में प्रार्थना पत्र देने के बाद संदिग्ध आरोपियों में से जकाउल्ला, सैफुल्ला, अर्शवारी, मोनिका, रवि, सिद्धार्थ उर्फ सन्नी शनिवार को अदालत में पेश हुए।
उन्होंने अपना टेस्ट कराने के लिए सहमति प्रदान की। अर्शवारी द्वारा यह कहा गया कि वह हृदय रोग से पीड़ित है। उसका टेस्ट सक्षम चिकित्सक की निगरानी में कराया जाए।
सीजेएम ने इस मामले में नार्को एनालाइसिस तथा लाई डिटेक्टर टेस्ट सक्षम एफएसएल से कराने के आदेश दिए हैं। उन्होंने टेस्ट की वीडियोग्राफी भी कराने के आदेश दिए हैं। उधर, बिजनौर पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का पालन होगा।
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लखनऊ निवासी 27 वर्षीय आजम देहरादून में एमबीए में पढ़ता था। वह अपने मौसा के पास शोरूम पर काम करता था। 27 जुलाई 2014 को वह दून एक्सप्रेस से देहरादून से लखनऊ जा रहा था। ट्रेन में उसकी हत्या कर दी गई थी। शव ट्रेन में नगीना में मिला था।
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इस हत्याकांड की रिपोर्ट बिजनौर जीआरपी थाने में अज्ञात में दर्ज कराई गई थी। इस मामले की विवेचना मौजूदा समय में मेरठ जीआरपी थानाध्यक्ष अशोक वर्मा कर रहे हैं।
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उन्होंने सीजेएम बिजनौर के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था कि अभी तक कि विवेचना में संदेह के आधार पर जकाउल्ला, सफुउल्ला, अर्शवारी, रमीजुल्ला, अमृत सिंह, माया कौर, सिद्धार्थ उर्फ सन्नी, मोनिका और रवि के नाम प्रकाश में आए हैं।
पुलिस उनका नार्को एनालाइसिस टेस्ट और लाई डिटेक्शन टेस्ट एफएसएल लखनऊ/हैदराबाद से कराए। जिससे कि इस हत्याकांड में उनकी संलिप्तता या असंलिप्तता का पता चल सके।
इस मामले में जीआरपी द्वारा अदालत में प्रार्थना पत्र देने के बाद संदिग्ध आरोपियों में से जकाउल्ला, सैफुल्ला, अर्शवारी, मोनिका, रवि, सिद्धार्थ उर्फ सन्नी शनिवार को अदालत में पेश हुए।
उन्होंने अपना टेस्ट कराने के लिए सहमति प्रदान की। अर्शवारी द्वारा यह कहा गया कि वह हृदय रोग से पीड़ित है। उसका टेस्ट सक्षम चिकित्सक की निगरानी में कराया जाए।
सीजेएम ने इस मामले में नार्को एनालाइसिस तथा लाई डिटेक्टर टेस्ट सक्षम एफएसएल से कराने के आदेश दिए हैं। उन्होंने टेस्ट की वीडियोग्राफी भी कराने के आदेश दिए हैं। उधर, बिजनौर पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का पालन होगा।