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बिजनौर में मीथेन गैस का टैंक फटने से 7 मजदूर मरे

ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर Updated Wed, 12 Sep 2018 11:53 PM IST
बिजनौर में मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में मिथेन गैस का फटा टैंक।
बिजनौर में मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में मिथेन गैस का फटा टैंक। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर। नगीना मार्ग स्थित मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में बुधवार को मीथेन गैस का रिसाव बंद करने के वास्ते वेल्डिंग करते समय टैंक में हुए विस्फोट से सात मजदूरों की मौत हो गई है। चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे और टैंक में अभी और भी शव होने की आशंका है। गुस्साए लोगों ने कई बार नगीना मार्ग पर जाम लगाकर हंगामा किया। डीएम ने लापता लोगों की तलाश के बाद फैक्ट्री को सील करने के निर्देश दिए हैं। शहर कोतवाली में फैक्ट्री के मालिक कुलदीप जैन और मुख्य प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
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यह भीषण हादसा बुधवार सुबह करीब 7:50 पर हुआ। बताया जा रहा  है कि टैंक से मीथेन गैस का रिसाव हो रहा था, जिसे बंद कराने के लिए 12 मजदूरों को वेल्डिंग के वास्ते टैंक के ऊपर चढ़ाया गया था और इसी दौरान चिंगारी के संपर्क में आने से टैंक में जबरदस्त विस्फोट हो गया। वेल्डिंग मजदूर कई फीट ऊपर उछलकर खेतों और फैक्ट्री में जा गिरे। दो किलोमीटर दूर तक के गांव धमाके से दहल गए। फैक्ट्री की भीतरी दीवार टूट गई और टैंक के पिलर भी टूटकर जमीन में धंस गए और दूर जा गिरे। गांवों के लोग फैक्ट्री की ओर दौड़े और श्रमिकों को जिला अस्पताल पहुंचाया। सातों मृतकों की शिनाख्त हो गई है और ये सभी आसपास के गांवों के हैं। गांव मुजफ्फरपुर केशो निवासी गजेंद्र, अलावलपुर निवासी सतपाल, कपिल, मौजीपुर निवासी प्रवेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हैं। देर रात लापता अभयराम का शव टैंक काटकर निकाला गया। देर रात डीएम आवास पर सांसद भारतेंद्र सिंह की मध्यस्थता में फैक्ट्री प्रबंधन और किसान नेताओं की बैठक हुई, जिसमें फैक्ट्री मालिक की ओर से 12-12 लाख रुपये के चेक मृतक आश्रितों के लिए दिए गए हैं और ये गुरुवार को डीएम वितरित करेंगे।


अत्यंत ज्वलनशील है मीथेन गैस
मीथेन एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत ज्वलनशील गैस है, जो ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यह प्राकृतिक गैस का घटक और सबसे साधारण हाइड्रोकार्बन है। मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में शीरे से अल्कोहल बनाया जाता है और बचे हुए गंदे पानी से मीथेन गैस बनती है। यह पानी टैंकों में सड़ाया जाता है और बनने वाली गैस को बॉयलर चलाने के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। वेल्डिंग के दौरान टैंक में गैस होने की अनदेखी की गई और तकनीकी सहायक भी नहीं था। बिजनौर में ऐसी सात फैक्ट्री हैं।



जबरदस्त विस्फोट और दो किलोमीटर दूर तक दहल गए लोग
बिजनौर। जबरदस्त विस्फोट के साथ टैंक फटा और उस पर काम कर रहे मजदूर कई फीट ऊपर उछलकर आसपास के खेतों और फैक्ट्री के अंदर जा गिरे। धमाका इतना तेज था कि दो किलोमीटर दूर तक के गांवों में रहने वाले लोग दहल गए। फैक्ट्री के अंदर की दीवार टूट गई और टैंक के पिलर टूटकर जमीन में जा धंसे। कई पिलर दूर जाकर गिरे। फैक्ट्री में बिखरे पड़े हादसे के निशान गवाही दे रहे थे कि विस्फोट कितना जबरदस्त था। टैंक में अभी और भी शव हो सकते हैं, इस आशंका के चलते टैंक को खाली कराया जा रहा है। सर्च अभियान रात में भी जारी था।  प्रशासन 11 श्रमिकों के टैंक पर वेल्डिंग करने की बात बता रहा है। गांव वाले इस बात से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं। हादसे के बाद पहुंचे ग्रामीण अनुमान लगा रहे है कि हादसे के बाद कई और श्रमिक टैंक में गिरकर गए होंगे। उनका कहना है कि यह किसी ने नहीं देखा कि टैंक पर कितने लोग काम कर रहे थे। इसका पता तो केवल फैक्ट्री मालिक, अफसरों या फैक्ट्री के कर्मचारियों को है। लेकिन सभी हादसे के बाद से फरार हैं। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है।


टैंक का का पानी निकाला जा रहा है। आसपास के गांवों के कई लोग इस काम में जुटे हुए हैं। शाम के समय टैंक का एक गेट खोला तो उसमें दो शव फंसे दिखाई दिए। अभयराम के परिजनों को बुलाया गया तो उन्होंने अभयराम का शव होने से इंकार कर दिया। फंसे शवों को टैंक से निकालने की कवायद चल रही है। टैंक में दो शव फंसे मिलने के बाद गांव वालों को फैक्ट्री से बाहर कर दिया गया। प्रशासन ने फैक्ट्री में सर्च अभियान शुरू करा दिया है। टैंक से पूरा पानी निकलने में दो दिन लगेंगे।


देर शाम फिर लगाया जाम
बिजनौर। हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार को दिन में कई बार जाम लगाया। अधिकारी बार बार समझाकर जाम खुलवाते रहे। देर शाम फिर एक बार ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने फैक्ट्री के बाहर नगीना मार्ग पर  फिर से जाम लगा दिया। ये लोग मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने और फैक्ट्री स्वामी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।



लापता की तलाश में मिले दो और शव
बिजनौर। हादसे में  मृतक के शव और चीथड़े आसपास के खेतों तक पहुंच गए। लापता मजदूर अभयराम को आसपास के खेतों में तलाश किया गया। वहां नहीं मिला तो टैंक में जाल डालकर भी उसकी खोजबीन की गई, लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका। टैंक का एक गेट खोला गया तो वहां दो शव मिले। अभयराम के परिजनों को बुलाकर शनाख्त कराने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने उनमें से किसी की शनाख्त अभयराम के रूप में नहीं की। टैंक खाली कराने का काम शुरू कर दिया गया है।


फैक्ट्री में एक शिफ्ट में करते हैं 65 मजदूर काम
बिजनौर। मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में दोनों शिफ्टों में 130 मजदूर काम करते हैं। 250 रुपये से लेकर 400 रुपये तक इन्हें एक दिन की मजदूरी दी जाती है। एक शिफ्ट में 65 मजदूर काम पर आते हैं। 12 घंटे में ड्यूटी की अदला बदली होती है। बुधवार को भी 65 मजदूर फैक्ट्री में काम करने आए थे। रोज ये मजदूर आठ बजे तक फैक्ट्री में पहुंचते थे। लेकिन बुधवार को ये सुबह छह बजे ही फैक्ट्री आ गए थे।
गांव वालों के मुताबिक फैक्ट्री में समय से पहले श्रमिकों को इसलिए बुलाया गया था ताकि मरम्मत का काम तेजी से कराया जा सके। फैक्ट्री के मालिकों को पहले से ही मालूम था कि टैंक से गैस रिस रही है। उन्होंने टैंक के ऊपर बिना सोचे समझे कर्मचारियों को वेल्डिंग करने के लिए भेज दिया और यह हादसा हो गया। टैंक खाली कराने के बाद अगर इसकी वेल्डिंग कराते तो यह हादसा नहीं होता। डीएम अटल कुमार राय के मुताबिक टैंक पर वेल्डिंग करते समय गैस के आग को पकड़ने से यह हादसा हुआ है। इसके अलावा हादसे का कोई और कारण नजर नहीं आ रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।

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